पश्चिम एशिया में तनाव लगातार बढ़ता जा रहा है. रविवार, 19 जुलाई को तड़के अमेरिकी सेना ने ईरान के कई ठिकानों पर ताबड़तोड़ हमले किए. यह कार्रवाई जॉर्डन में मौजूद अमेरिकी बेस पर हुए उस ईरानी हमले के जवाब में की गई है, जिसमें दो अमेरिकी सैनिकों की मौत हो गई और कई जवान घायल हुए. इस ताजा घटनाक्रम के बाद दोनों देशों के बीच जंग बढ़ने का खतरा बढ़ गया है.
ईरानी हमले में 2 अमेरिकी सैनिकों की मौत, बदले की आग में भड़के US ने ईरान पर बरसाए बम
US Iran War: जॉर्डन पर ईरानी हमले में दो अमेरिकी सैनिकों की मौत का बदला लेने के लिए अमेरिकी सेना ने ईरान के ठिकानों पर ताबड़तोड़ हमले किए. ईरान ने संकेत दिया है कि अमेरिका के साथ टकराव और बढ़ सकता है.


अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) ने बताया कि 17 जुलाई को ईरान ने जॉर्डन में मौजूद अमेरिकी बेस पर कई बैलिस्टिक मिसाइलें और ड्रोन हमले किए. इन हमलों का मुकाबला करते हुए दो अमेरिकी सैनिकों की मौत हो गई, जबकि कई सैनिक घायल हो गए. एक सैनिक अभी भी लापता है. CENTCOM ने बताया,
“चार अमेरिकी सैनिकों को इलाज के लिए जॉर्डन के अस्पतालों में ले जाया गया था. उन्हें अब छुट्टी दे दी गई है. जिन अन्य सैनिकों को मामूली चोटें आई थीं, वे ड्यूटी पर लौट आए हैं. परिवारों के सम्मान में, CENTCOM मारे गए सैनिकों की पहचान तब तक गुप्त रखेगा, जब तक कि उनके परिवार वालों को सूचित किए जाने के 24 घंटे पूरे न हो जाएं.”
अपने सैनिकों की मौत से भड़के अमेरिका ने रविवार तड़के ईरान पर कई हमले किए. ये जवाबी हमले अमेरिकी राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप के आदेश पर किए गए. अमेरिकी सेंट्रल कमांड ने एक बयान जारी कर बताया,
"इन हमलों का मकसद स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में कमर्शियल शिपिंग के लिए खतरा पैदा करने की ईरान की क्षमता को और कम करना है. साथ ही ईरान के इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) बलों को तुरंत सजा देना है जिन्होंने कल रात जॉर्डन में अमेरिकी सैनिकों पर हमले किए थे."
अमेरिकी रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ ने कहा कि जॉर्डन में ईरानी हमलों के दौरान दो अमेरिकी सैनिकों की मौत से वॉशिंगटन का इरादा और मजबूत होगा. पीट हेगसेथ ने एक बयान में कहा,
अब तक 16 सैनिकों की मौत"उनकी कुर्बानी हमारे संकल्प को और मजबूत करती है."
इस साल ईरान के साथ युद्ध में मरने वाले अमेरिकी सैनिको की कुल संख्या 16 हो गई है. यह जानकारी खुद अमेरिकी सेना ने दी. इन मौतों से एक बात तो साफ हो गई है कि मॉडर्न हवाई जंग में अमेरिकी सैनिकों के लिए खतरा अब सिर्फ सीधे युद्ध के मैदान तक सीमित नहीं रह गया है.
सैनिकों की जान का सबसे बड़ा खतरा ग्राउंड ऑपरेशन के दौरान होता है. लेकिन, ईरान से सैकड़ों किलोमीटर दूर अरब देशों में मौजूद अमेरिकी सैन्य ठिकाने भी ईरानी मिसाइल और ड्रोन हमलों की जद में हैं. माने, मोर्चे से दूर तैनात अमेरिकी सैनिक सुरक्षित नहीं हैं और लगातार ईरान के जानलेवा हवाई हमलों का शिकार बन रहे हैं.
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बढ़ सकता है टकरावईरान की मेहर न्यूज एजेंसी ने बताया कि अमेरिकी सेना ने दक्षिणी बंदरगाह शहर सिरिक के पास के इलाकों पर हमले किए. अमेरिकी सेना ने हाजियाबाद के पास भी हमला किया है लेकिन अभी तक किसी के घायल होने की खबर नहीं है. ईरान ने संकेत दिया है कि अमेरिका के साथ टकराव और बढ़ सकता है.
ईरान के सुप्रीम लीडर मुजतबा खामेनेई ने शनिवार को चेतावनी दी कि वॉशिंगटन को ईरान और उसके सहयोगियों से ‘कभी न भूलने वाले सबक’ सीखने को मिलेंगे. खामेनेई ने अमेरिका पर दोनों देशों के बीच हुए समझौते का बार-बार उल्लंघन करने का आरोप लगाया. वहीं, संयुक्त अरब अमीरात (UAE) ने शनिवार को तनाव को तुरंत खत्म करने की अपील की और सभी पक्षों से बातचीत पर लौटने की अपील की.
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