रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) ने अपना मई बुलेटिन जारी कर दिया है. बुलेटिन के अनुसार सेंट्रल बैंक ने दावा किया है कि भारत की अर्थव्यवस्था मौजूदा वित्त वर्ष की पहली तिमाही में 7.5 फीसदी के आसपास की वृद्धि कर सकती है. RBI ने अभी पहली तिमाही के आंकड़े जारी नहीं किए हैं. ये आंकड़े 31 मई को जारी किए जाएंगे.
RBI के मई बुलेटिन में भारतीय अर्थव्यवस्था को लेकर बड़ा दावा
रिपोर्ट में कहा गया है कि कम से कम दो साल में पहली बार फास्ट मूविंग कंज्यूमर गुड्स (FMCG) की ग्रामीण मांग ने शहरी बाजारों को पीछे छोड़ दिया है.

इंडिया टुडे की रिपोर्ट के मुताबिक RBI के बुलेटिन 'स्टेट ऑफ दी इकोनॉमी' पर प्रकाशित एक लेख में कहा गया है कि ग्लोबल इकोनॉमी के लिए नजरिया नाजुक होता जा रहा है, क्योंकि महंगाई पर नियंत्रण घट रहा है. बुलेटिन के अनुसार ग्लोबल लेवल पर कैपिटल फ्लो में उतार-चढ़ाव देखा गया है, क्योंकि घबराए हुए इन्वेस्टर्स अभी जोखिम से दूर हैं.
रिजर्व बैंक का ये लेख डिप्टी गवर्नर माइकल देवव्रत पात्रा की अगुवाई वाली टीम ने तैयार किया है. बुलेटिन में कहा गया है कि इस बात की उम्मीद बढ़ रही है कि भारत लंबे समय से प्रतीक्षित अर्थव्यवस्था की उड़ान की दहलीज पर है. हालिया संकेत डिमांड की गति तेज होने की ओर इशारा कर रहे हैं. रिपोर्ट में कहा गया है कि कम से कम दो साल में पहली बार फास्ट मूविंग कंज्यूमर गुड्स (FMCG) की ग्रामीण मांग ने शहरी बाजारों को पीछे छोड़ दिया है. FMCG की बिक्री में 6.5 प्रतिशत की वृद्धि देखी गई है. वहीं, ग्रामीण क्षेत्रों में इसमें 7.6 प्रतिशत की वृद्धि हुई है. शहरी क्षेत्रों में ये वृद्धि 5.7 प्रतिशत रही है.
RBI के बुलेटिन के अनुसार ग्रामीण अर्थव्यवस्था में बढ़ती मांग और गैर-खाद्य खर्च के कारण इस वित्त वर्ष की पहली तिमाही में भारत की इकोनॉमी में ग्रोथ 7.5 प्रतिशत रहने का अनुमान है. रिपोर्ट के मुताबिक अप्रैल 2023 से अप्रैल 2024 के बीच टोल कलेक्शन में 8.6 फीसदी की ग्रोथ देखी गई है. वहीं ऑटोमोबाइल की बिक्री में 25.4 फीसदी की ग्रोथ रही. इसके कारण पैसेंजर व्हीकल के सेगमेंट में सबसे ज्यादा वृद्धि देखी गई.
रिपोर्ट के अनुसार खाद्य श्रेणी में सब्जियों, अनाज, दालों, मांस और मछली की कीमतें निकट समय में 5 प्रतिशत के करीब वृद्धि देख सकती हैं. ये सब ईंधन के दामों में गिरावट के बावजूद अनुमानित है. हालांकि केंद्रीय बैंक ने कहा कि बुलेटिन में दिए गए विचार लेखक के हैं, RBI इन विचारों का प्रतिनिधित्व नहीं करता है.
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