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NYT से The Guardian तक, ज्ञानेश कुमार के खिलाफ प्रोटेस्ट पर ग्लोबल मीडिया ने क्या-क्या लिखा?

भारत में ECI और CEC ज्ञानेश कुमार के खिलाफ हो रहे विरोध प्रदर्शन को विदेशों में भी कवर किया जा रहा है. न्यूयॉर्क टाइम्स से लेकर अल जजीरा तक. हर न्यूज संस्था प्रदर्शन के बारे में लिख रही है.

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विदेशी मीडिया सीजेपी प्रोटेस्ट कवर कर रही है. (Courtesy- ITG)

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  • कॉकरोच जनता पार्टी के नेतृत्व में भारत में 2 अक्टूबर को मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर दिल्ली से मुंबई तक विरोध प्रदर्शन आयोजित किए गए।
  • यह विरोध प्रदर्शन उस वोटर वेरिफिकेशन अभियान के कारण शुरू हुआ जिसमें 13 करोड़ से अधिक मतदाताओं के नाम मतदाता सूची से हटाए गए थे, जिससे विपक्ष ने चुनाव आयोग पर धांधली का आरोप लगाया।
  • प्रदर्शनकारियों की बढ़ती संख्या और विरोध के कारण केंद्र सरकार ने सख्त कदम उठाए, जबकि आगे भी जंतर-मंतर पर बड़े प्रदर्शन और राजनीतिक दबाव की संभावना बनी हुई है।

भारत में चुनाव आयोग के कामकाज और स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन से जुड़े मामलों को लेकर विरोध प्रदर्शन हो रहे हैं. कॉकरोच जनता पार्टी के संस्थापक मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग कर रहे हैं. इसी क्रम में शुक्रवार, 2 अक्टूबर को दिल्ली से लेकर मुंबई तक विरोध प्रदर्शन किए गए. आने वाले दिनों में जंतर-मंतर पर भी उतरने की तैयारी है. इस विरोध प्रदर्शन को विदेशी मीडिया भी कवर रही है. अमेरिकी अखबार ‘न्यूयॉर्क टाइम्स’ से लेकर ‘द गार्डियन’ तक. सभी मशहूर न्यूज संस्थान भारत में हो रहे इस प्रदर्शन को कवर कर रहे हैं. 

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अमेरिकी अखबार न्यू यॉर्क टाइम्स ने अपनी रिपोर्ट में हेडिंग दी है, ‘भारत में वोट चोरी के खिलाफ रैली में पुलिस ने कई सौ लोगों को हिरासत में लिया.’ अखबार ने आगे लिखा,

2 अक्टूबर को भारत की राजधानी नई दिल्ली में पुलिस ने मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे की मांग कर रहे सैकड़ों प्रदर्शनकारियों को हिरासत में ले लिया. इस दौरान प्रशासन ने सड़कों पर बैरिकेडिंग लगा दी और इंटरनेट सर्विस पर रोक लगा दी. ये विरोध प्रदर्शन देश भर की वोटिंग लिस्ट में हुए बदलावों के खिलाफ था. 13 करोड़ से अधिक वोटर्स के नाम लिस्ट से हटा दिए गए हैं. विपक्षी दलों ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर 'वोट चोरी' का आरोप लगाया है. उनका कहना है कि सरकार अपने पक्ष में चुनावी नतीजे साधने के लिए चुनाव आयोग का इस्तेमाल कर वोटिंग लिस्ट में धांधली कर रही है. बीजेपी ने इसे नकार दिया.

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अखबार ने लिखा, 'मुंबई में पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को शिवाजी पार्क के अंदर जाने की इजाजत नहीं दी थी. लेकिन जब प्रदर्शनकारियों ने 'जेल भरो आंदोलन' की चेतावनी दी. और ये साफ किया कि सामूहिक गिरफ्तारियों का डर उन्हें नहीं रोक सकता तो पुलिस और उनके बीच एक सहमति बन गई.  शिवाजी पार्क के बाहर ही एक मंच तैयार किया गया और आसपास की सड़कों पर किसी मोहल्ले के त्योहार जैसा माहौल नजर आ रहा था. मुंबई में नजारा काफी उत्साह भरा था. जहां शहर के सबसे बड़े मैदान शिवाजी पार्क के पास हज़ारों लोग ताली बजाते, गाते और तिरंगा लहराते हुए जमा हुए.'

द गार्डियन ने क्या लिखा?

ब्रिटिश अखबार द गार्डियन ने हेडिंग दी. ‘भारत में वोटिंग लिस्ट में बदलाव को लेकर कॉकरोच मूवमेंट का नया विरोध प्रदर्शन शुरू’ अखबार ने आगे लिखा,

कॉकरोच जनता पार्टी की शुरुआत इंटरनेट पर एक सटायर के रूप में हुई थी, लेकिन देखते ही देखते ये युवाओं की ताकत का एक बड़ा मंच बन गई. नरेंद्र मोदी सरकार के लिए एक unexpected challenge के रूप में उभरी है. इसके चलते दिल्ली में हफ्तों तक बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन हुए, जिसके दबाव में आकर जुलाई में शिक्षा मंत्री को अपने पद से इस्तीफा देना पड़ा था. इसके बाद, संगठन ने ऐलान किया कि वो शिक्षा और लोकतंत्र के अहम मुद्दों पर सरकार को जवाबदेह ठहराने के लिए एक प्रेशर ग्रुप के रूप में लगातार एक्टिव रहेंगे.

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अल जजीरा ने हेडिंग दी. ‘कॉकरोच मूवमेंट के नए विरोध प्रदर्शन शुरू होते ही भारतीय प्रशासन सख्त.'

अलजजीरा ने लिखा,

Gen Z के नेतृत्व वाली कॉकरोच जनता पार्टी और दूसरे छात्र संगठनों, विपक्षी दलों के प्रदर्शन को रोकने के लिए नई दिल्ली और मुंबई में सुरक्षा बलों ने सख्त कदम उठाए. राजधानी में सैकड़ों पुलिस और अर्धसैनिक बलों के जवानों ने प्रदर्शन स्थल को चारों तरफ से बैरिकेड लगाकर घेर लिया. जैसे ही प्रदर्शनकारी वहां पहुंचे, पुलिस ने उन्हें बसों में भरकर हिरासत में लेना शुरू कर दिया. जंतर-मंतर के आसपास के कम से कम 11 मेट्रो स्टेशनों को बंद कर दिया गया. लाउडस्पीकर के जरिए लगातार भीड़ को तितर-बितर होने की चेतावनियां दी जाती रहीं. मुंबई में शाम 4 बजे तय प्रदर्शन के लिए शिवाजी पार्क में धीरे-धीरे भीड़ जुटने लगी. वहां भारी पुलिस बल तैनात थी और आसपास के इलाके को नो-पार्किंग जोन घोषित कर दिया गया.

चीन के अखबार ने क्या लिखा?

साउथ चाइन मॉर्निंग पोस्ट ने भी हेडिंग दी. ‘भारत के पीएम मोदी दो तरफा दबाव फेस कर रहे हैं. एक तो सीजेपी और दूसरा विपक्ष’ अखबार ने आगे लिखा,

इस प्रोटेस्ट से केंद्र सरकार के सामने एक नई राजनीतिक चुनौती खड़ी हो गई है. जानकारों का मानना है कि विरोध प्रदर्शनों ने विपक्ष को youth movement के करीब ला दिया है, जिससे वो लंबे समय से जुड़ने की कोशिश कर रहा था. दोनों का साथ आना बिखरे हुए विपक्ष को मजबूत कर सकता है, लेकिन इस दबाव के जरिए भारतीय जनता पार्टी से अपनी मांगें मनवा पाना कहीं अधिक कठिन होगा.

साउथ चाइन मॉर्निंग पोस्ट ने एक्सपर्ट्स को कोट करके छापा है कि छात्रों के नेतृत्व वाली कॉकरोच जनता पार्टी की कामयाबी ने विपक्ष को जनता के बीच अपना समर्थन बढ़ाने की नई ऊर्जा और मजबूती दी है. विपक्ष की उठाई जा रही मांगें आम नागरिकों को वाजिब लग रही हैं. परीक्षा से जुड़ा मुद्दा सरकार के लिए कोई बड़ा खतरा बनने की आशंका नहीं है. केंद्र सरकार शिक्षा मंत्री के इस्तीफे के कुछ ही हफ्तों बाद मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे की मांग कभी नहीं मानेगी, क्योंकि ऐसा करने से सरकार की कमजोरी का संदेश जाएगा. हालांकि अगर सरकार ने कॉकरोच आंदोलन का विरोध किया या इसे दबाने की कोशिश की, तो यह मामला भड़ककर एक बहुत बड़ा संकट बन सकता है.

एक्सपर्ट को कोट करके लिखा, ‘राहुल गांधी का कद हाल के महीनों में एक राजनेता के तौर पर जरूर बढ़ा है, लेकिन देश के नेता के रूप में नरेंद्र मोदी की जगह लेने के लिए वे अभी भी शीर्ष दावेदार नहीं हैं. राहुल को समर्थन मिल तो रहा है, लेकिन ये काफी नहीं है. बहुत कम लोग उन्हें ऐसे व्यक्ति के रूप में देखते हैं, जो मोदी की जगह ले सके. जनता की नज़र में मोदी उनसे कहीं अधिक चतुर और कुशल हैं.’

बांग्लादेश के डेली स्टार ने लिखा, ‘ये विरोध प्रदर्शन इस साल युवाओं के नेतृत्व में शुरू हुए आंदोलनों की कड़ी में सबसे नया है. इसने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर उनके 12 साल के शासनकाल में अब तक का सबसे बड़ा और अप्रत्याशित दबाव बना दिया है. आलोचकों का आरोप है कि पिछले साल शुरू किए गए देशव्यापी वोटर वेरिफिकेशन अभियान से लाखों पात्र और वैध नागरिकों के नाम मतदाता सूची से काट दिए गए हैं.’

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विवादों के घेरे में CEC

देश की सबसे भरोसेमंद संस्थाओं में गिने जाने वाले चुनाव आयोग का कहना है कि इस पूरी प्रक्रिया का मकसद केवल फर्जी, मृत या ineligible मतदाताओं के नाम सूची से हटाना है. विवादों के केंद्र में घिरे मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने इस पूरे मामले पर अब तक कोई टिप्पणी नहीं की है. कॉकरोच जनता पार्टी और सामाजिक संगठनों के नेतृत्व में हजारों लोगों के सड़कों पर उतरने से प्रधानमंत्री पर दबाव फिर बढ़ गया है. मई 2026 में एक ऑनलाइन सटायर के रूप में शुरू हुए CJP के समर्थक मुंबई के शिवाजी पार्क में जुटे. जुलाई 2026 में शिक्षा मंत्री के इस्तीफे के लिए देशव्यापी आंदोलन के बाद यह उनका पहला बड़ा प्रदर्शन था.

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