मिडिल ईस्ट में संकट जारी है और इस बीच वैश्विक समीकरण भी बदलते दिख रहे हैं. इजरायल ने ईस्ट यरुशलम में ब्रिटिश वाणिज्य दूतावास (British Consulate In Palestine) बंद करने की धमकी दी है. इस पर ब्रिटेन ने पलटवार किया है. ब्रिटेन के पूर्व अटॉर्नी जनरल डोमिनिक ग्रीव ने ब्रिटिश विदेश मंत्रालय (UK Foreign Office) को इस मामले में सलाह दी है. उन्होंने कहा कि इजरायल के पास ब्रिटिश दूतावस को बंद करने का कानूनी अधिकार नहीं है.
इजरायल और ब्रिटेन के बीच रिश्तों में आई तल्खी, ब्रिटिश दूतावास बंद करने पर आमने सामने
ब्रिटेन का यरुशलम मिशन 1838 से मौजूद है और इजरायल के बनने से भी 100 साल से ज्यादा पुराना है. ये तेल अवीव स्थित ब्रिटिश दूतावास से अलग है. इजरायल ने अब यरुशलम में ब्रिटिश वाणिज्य दूतावास को बंद करने की धमकी दी है.

इजरायल ने कहा है कि वो 8 अक्टूबर को ईस्ट यरुशलम स्थित ब्रिटिश वाणिज्य दूतावास को बंद कर सकता है. ब्रिटिश विदेश मंत्री एड मिलिबैंड ने फिलिस्तीन में मौजूद गैर-कानूनी इजराइली बस्तियों में बने सामान के इंपोर्ट पर बैन लगाने का ऐलान किया था. इजरायल का यह फैसला उसका ही जवाब माना जा रहा है.
ईस्ट यरूशलम फिलिस्तीन काब्रिटिश अखबार दी गॉर्डियन ने अपनी रिपोर्ट में लिखा, डोमिनिक ग्रीव के मुताबिक, ब्रिटिश कान्सुलेट ईस्ट यरुशलम में है. इसे संयुक्त राष्ट्र (UN) और ब्रिटेन समेत ज्यादातर देश कब्जे वाले फिलिस्तीनी क्षेत्र के तौर पर मानते हैं. इसलिए इजरायल वहां अपनी संप्रभु सत्ता का इस्तेमाल कर ब्रिटिश दूतावास को बंद नहीं कर सकता. भारत भी ईस्ट यरुशलम को फिलिस्तीन का हिस्सा मानता है.
ब्रिटिश संसद के उच्च सदन 'हाउस ऑफ लॉर्ड्स' में भी यह मुद्दा उठा. पूर्व ब्रिटिश राजदूत लॉर्ड हेनै ने विदेश मंत्रालय से पूछा कि क्या इजरायल की कार्रवाई कानूनी तौर पर वैध है? विदेश मंत्रालय के मंत्री लॉर्ड वुड ने कहा कि उनके सहयोगी की बात में दम हो सकता है. उन्होंने ये भी माना कि इस विषय पर लॉर्ड हेनै उनसे ज्यादा जानकारी रखते हैं. लेकिन उन्हें डर है कि इजरायल असल में कॉन्सुलेट को काम करने लायक नहीं रहने देगा.
पूर्व अटॉर्नी जनरल डोमिनिक ग्रीव ने ब्रिटेन से इस फैसले को कोर्ट में चुनौती देने की मांग की है. उनका कहना है कि इजरायल एक कब्जा जमाने वाली शक्ति के तौर पर ईस्ट यरुशलम पर संप्रभु शक्तियों के इस्तेमाल की मांग कर रहा. हालांकि, इजरायल के पास हकीकत में ऐसी शक्तियां नहीं हैं.
यरुशलम मिशन 1838 से मौजूदब्रिटेन का यरुशलम मिशन 1838 से मौजूद है और इजरायल के बनने से भी 100 साल से ज्यादा पुराना है. ये तेल अवीव स्थित ब्रिटिश दूतावास से अलग है. ब्रिटिश कान्सुलेट यरुशलम, वेस्ट बैंक और गाजा से जुड़े मामलों को देखता है. ग्रीव ने कहा,
"फिलिस्तीन को मान्यता देने के बाद भी ब्रिटने ने ईस्ट यरुशलम में कॉन्सुलेट जनरल बनाए रखा. यह ब्रिटेन के उस स्टैंड के मुताबिक है कि यरुशलम की अंतिम स्थिति अभी तय होनी बाकी है. इससे इजरायल की संप्रभुता को मान्यता नहीं मिलती."
उन्होंने ये भी कहा कि ब्रिटेन सरकार का फर्ज है कि वो इजरायल के इस कदम का विरोध करे. उनके मुताबिक, दूतावास बंद होने का असर केवल ब्रिटेन पर नहीं बल्कि फिलिस्तीनियों पर भी पड़ेगा. इससे ब्रिटिश मदद, निगरानी और वेस्ट बैंक और गाजा से रिपोर्टिंग पर असर पड़ सकता है.
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इजरायल के विदेश मंत्री गिदोन सा'आर ने पूरे यरुशलम पर इजरायल की संप्रभुता का दावा किया है. वहीं, संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) की स्थिति इसके उलट है. वो ईस्ट यरुशलम पर इजरायल की संप्रभुता को मान्यता नहीं देती.
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