ICMR ने BHU के कोवैक्सीन से जुड़ी स्टडी (covaxin side effects) को खारिज कर दिया. स्टडी का दावा था कि कोवैक्सीन लगवाने वाले लगभग एक-तिहाई व्यक्तियों को स्वास्थ्य संबंधी परेशानियों का सामना करना पड़ा. रिपोर्ट के सामने आने पर ICMR ने BHU के संबंधित प्रोफेसरों को चेतावनी दी. ICMR ने स्टडी की कई गंभीर खामियों को उजागर किया जो दावों की विश्वसनीयता को कमजोर करती हैं।
BHU की कोवैक्सीन स्टडी को ICMR ने किया खारिज. डायरेक्टर ने पत्र लिखकर दी चेतावनी
ICMR के महानिदेशक डॉ. राजीव बहल ने इस Study के लेखकों और जर्नल के संपादक को एक पत्र लिखा. पत्र में उन्होंने स्टडी की तकनीक और डिजाइन पर सवाल उठाए . स्टडी की आलोचना करते हुए उन्होंने BHU को शुद्धि पत्र (erratum) जारी करने को कहा. साथ ही स्टडी में से ICMR का नाम हटाने को कहा.
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ICMR के महानिदेशक डॉ. राजीव बहल ने इस स्टडी के लेखकों और जर्नल के संपादक को एक पत्र लिखा. पत्र में उन्होंने स्टडी की तकनीक और डिजाइन पर सवाल उठाए . स्टडी की आलोचना करते हुए उन्होंने BHU को शुद्धि पत्र (erratum) जारी करने को कहा. साथ ही स्टडी में से ICMR का नाम हटाने को कहा.
डॉ. बहल ने लिखा- " यह भी देखा गया है कि इसी तरह के पिछले पेपरों में भी आपने बिना अनुमति के ICMR का नाम दिया है." उन्होंने स्टडी के लेखकों और संपादक से स्पष्टीकरण भी मांगा कि " ICMR को उनके खिलाफ कानूनी और प्रशासनिक कार्रवाई क्यों नहीं करनी चाहिए".

INDIA TODAY की रिपोर्ट के मुताबिक डॉ. बहल ने बताया कि स्टडी में ऐसे लोगों के सैंपल की कमी है जिन्हें वैक्सीन नहीं लगा है . जो वैक्सिनेटेड और अनवैक्सिनेटेड (जिनका टीकाकरण नहीं हुआ है) ग्रुप के बीच घटनाओं की दर की तुलना करने के लिए महत्वपूर्ण है.
क्या है BHU की स्टडी का दावा?
दरअसल , कोरोना की वैक्सीन "COVAXIN" जिसे भारत बायोटेक कंपनी ने बनाया. इसको लेकर बीएचयू ने स्टडी की थी. इस स्टडी को जर्मन-ब्रिटिश प्रकाशन कंपनी स्प्रिंगर नेचर ने छापा था. जिसमें Covaxin टीके से भी दिक्कत की बात कही गई. स्टडी 926 लोगों पर की गई थी. जिसमें लगभग 50% लोगों ने टीके के बाद इन्फेक्शन की बात कही थी. इसमें मुख्य रूप से वायरल और गले में इन्फेक्शन शामिल है. इस स्टडी में 635 किशोर और 291 व्यस्क लोगों को शामिल किया गया था. जिन्हें कोवैक्सिन का टीका लगाया गया. इसमें टीके के बाद आई समस्याओं को AESI यानी Adverse events of special interest के तौर पर बताया गया था.
(ये स्टोरी हमारे साथ इंटर्नशिप कर रहे आनंद पाण्डेय ने लिखी है.)
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