सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा एक ताजा वीडियो क्लिप एक इंटरव्यू के दौरान का है. जानी मानी न्यूज संस्था BBC ने दक्षिण अमेरिकी देश गुयाना (Guyana) के राष्ट्रपति इरफान अली (Irfaan Ali) के साथ इंटरव्यू किया. इंटरव्यू लेने वाले थे पत्रकार स्टीवन सैकर. रिसर्च की कमी के चलते ऐसा सवाल पूछ लिया कि भारतीय मूल के राष्ट्रपति ने उन्हें बुरी तरह हड़का दिया.
पत्रकार ने प्रदूषण पर सवाल पूछा, भारतीय मूल के राष्ट्रपति ने फिर जो लेक्चर दिया, वीडियो दुनिया में छा गया
Climate Change पर हो रही चर्चा के दौरान BBC के पत्रकार ने Guyana के President पर कुछ आरोप लगाए. राष्ट्रपति ने जो जवाब दिया, पूरे मामले की पिच्चर साफ हो गई.

दरअसल गुयाना दुनिया में सबसे ज्यादा तेल प्रोड्यूस करने वाले देशों में शामिल है. इसी पर पत्रकार ने कह दिया कि ज्यादा तेल से ज्यादा कार्बन एमिशन भी होता है जिससे क्लाइमेट पर असर पड़ता है. फिर राष्ट्रपति ने कुछ ऐसी बातें कहीं जो स्टीवन को पसंद नहीं आई होंगी. दोनों के बीच क्या बातचीत हुई, वो डीटेल में जान लेते हैं,
पत्रकार ने पूछा- उम्मीद की जा रही है कि आपके तट से अगले एक या दो दशक में 150 अरब डॉलर (12 लाख 50 हजार करोड़ रुपये) का तेल और गैस निकाला जाएगा. इसका मतलब है कि 2 बिलियन टन से ज्यादा कार्बन एमिशन आपके समुद्र तल से निकलेगा और वायुमंडल में छोड़ा जाएगा.
राष्ट्रपति ने टोका और कहा- क्या आप जानते हैं कि गुयाना में इंग्लैंड और स्कॉटलैंड के बराबर का एक जंगल है, जो 19.5 गीगाटन कार्बन स्टोर करता है. वो जंगल हमने जिंदा रखा है.
स्टीवन ने पूछा- क्या इससे आपको कार्बन एमिशन करने का अधिकार मिल जाता है.
राष्ट्रपति ने जवाब दिया- क्या आपको अधिकार है कि आप हमें क्लाइमेट चेंज पर लेक्चर दें. आज मैं आपको क्लाइमेट चेंज पर लेक्चर दूंगा. क्योंकि हमने एक जंगल को बचाकर रखा है जो 19.5 गीगाटन कार्बन स्टोर करता है जिसका आप और पूरी दुनिया आनंद उठाती है. जिसकी आपको कोई वैल्यू नहीं है. जिसे गुयाना के लोगों ने जिंदा रखा है. हमारे देश में वनों की कटाई की दर दुनिया में सबसे कम है. तेल और गैस संसाधनों की सबसे बड़ी खोज के बाद भी हम अभी नेट जीरो मेंटेन कर रहे हैं.
राष्ट्रपति ने आगे कहा- दुनिया ने पिछले 50 सालों में अपनी समस्त जैव विविधता का 65% बायोडायवर्सिटी को खो दिया है. हमने उसे अब तक बरकरार रखा है. क्या आपको इसकी वैल्यू है. क्या आप उसका पैसा देते हैं. क्या दुनिया इसकी कीमत चुकाएगी. क्या आप उन लोगों के लिए काम करते हैं जो पर्यावरण को नुकसान पहुंचा रहे हैं? क्या आप और आपका सिस्टम उन लोगों की जेब में हैं जो औद्योगिक क्रांति के जरिए पर्यावरण को बर्बाद कर रहे हैं और अब हमें लेक्चर दे रहे हैं? ये पाखंड है.
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