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MDH, EVEREST के मसाला सैंपलों में नहीं मिले कैंसरकारी तत्व, FSSAI की रिपोर्ट

FSSAI ने बताया है कि दोनों कंपनियों के 28 सैंपल में एथलीन ऑक्साइड का कोई भी अंश नहीं मिला है. 6 सैंपल की रिपोर्ट अभी पेंडिंग है.

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FSSAI ने 34 सैंपल की जांच की थी. (फाइल फोटो)

भारतीय मसालों को लेकर पिछले दिनों हुए विवाद के बाद अब फूड सेफ्टी एंड स्टैंडर्ड्स अथॉरिटी ऑफ इंडिया यानी FSSAI की रिपोर्ट सामने आई है. FSSAI ने कहा है कि MDH और एवरेस्ट मसालों के सैंपल में एथलीन ऑक्साइड नहीं पाया गया है. पिछले महीने सिंगापुर और हांगकांग में इन दोनों कंपनियों के कुछ मसालों की गुणवत्ता पर सवाल उठे थे. और इसकी खरीद बिक्री पर रोक लगा दी गई थी. इसके बाद FSSAI ने इन मसालों की जांच शुरू की थी.

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FSSAI ने बताया है कि दोनों कंपनियों के 28 सैंपल में एथलीन ऑक्साइड का कोई भी अंश नहीं मिला है. 6 सैंपल की रिपोर्ट अभी पेंडिंग है. समाचार एजेंसी ANI की रिपोर्ट के मुताबिक, दोनों ब्रांड के 34 सैंपल इकट्ठा किए गए थे. इसमें महाराष्ट्र और गुजरात से एवरेस्ट के 9 सैंपल और दिल्ली, हरियाणा और राजस्थान में MDH के 25 सैंपल लिए गए थे. 

रिपोर्ट बताती है कि मसालों की जांच कई मानकों पर की गई. मसलन, मसालों में नमी, भारी धातुओं, एफ्लाटोक्सिन्स और कीटनाशक जैसी चीजों की मौजूदगी की भी जांच की गई. मसालों में एथलीन ऑक्साइड के लिए सैंपल की जांच NABL से मान्यता प्राप्त लैब में की गई.

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एथिलीन ऑक्साइड (EtO) हल्की मीठी गंध वाली एक ज्वलनशील, रेडियोएक्टिव गैस है, जो मनुष्यों के पोषण के लिए कतई नहीं है. इसकी वजह से थोड़े समय के लिए आंख में जलन, सिरदर्द, मतली, उल्टी, दस्त, सांस की तकलीफ हो सकती है. लंबे समय तक इसका इस्तेमाल कैंसर, न्यूरोटॉक्सिसिटी, आदि का सबब बन सकता है.

पिछले महीने हांगकांग के खाद्य सुरक्षा केंद्र (CFS) ने MDH और एवरेस्ट के उत्पादों की खरीद-बिक्री पर रोक लगाई थी. वहीं, सिंगापुर की खाद्य एजेंसी ने ऐसे मसालों को वापस लेने का निर्देश दिया था. इन मसालों में, MDH के मद्रास करी पाउडर, एवरेस्ट फिश करी मसाला, MDH सांभर मसाला, और MDH करी पाउडर शामिल थे.

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पिछले हफ्ते नेपाल ने भी एवरेस्ट और MDH के मसालों की खपत और बिक्री पर बैन लगा दिया था. नेपाल के खाद्य प्रौद्योगिकी और गुणवत्ता नियंत्रण विभाग ने कहा था कि इन दो मसालों में मौजूद केमिकल्स का टेस्ट चल रहा है. अंतिम रिपोर्ट आने तक प्रतिबंध लगा रहेगा. वहीं, रॉयटर्स की एक रिपोर्ट बताती है कि विवाद बढ़ने के बाद MDH और एवरेस्ट के मसाले न्यूजीलैंड, अमेरिका और ऑस्ट्रेलिया में भी जांच के दायरे में आ गए हैं.

MDH और एवरेस्ट कई दशकों से भारत में इस्तेमाल हो रहे मसाले हैं. सिर्फ भारत ही नहीं, बल्कि मध्य पूर्व सहित कई देशों में इसे निर्यात भी किया जाता है.

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