अभी साउथ ईस्ट फ़्रांस में जो भी केस बढ़ रहे हैं वो ओमिक्रॉन की वजह से हैं, और मुझे नहीं लगता कि ये वेरिएंट डेल्टा या ओमिक्रॉन से ज्यादा फैलेगा. फिर भी ये देखने वाली बात होगी कि इस वेरिएंट को किस श्रेणी में रखा जाता है.
फ्रांस में मिले इस नए कोरोना वेरिएंट में तो ओमिक्रॉन से भी ज्यादा म्यूटेशन हैं!
कितना खतरनाक है कोरोना का IHU वेरिएंट, जान लो.
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दक्षिण पूर्वी फ़्रांस में कोरोना के 12 मरीजों में कोरोना के नए वैरिएंट IHU की पुष्टि हुई है (फोटो सोर्स- AP और आजतक)
पहली बार साउथ अफ्रीका में पाया गया कोरोना वायरस (Coronavirus) का ओमिक्रॉन वेरिएंट (Omicron Variant) इतिहास का सबसे तेज़ फैलने वाला वायरस साबित हो चुका है. इसकी संक्रमण फैलाने की क्षमता हैरतअंगेज है. दुनियाभर में इसके फैलने के बाद इस समय औसतन 12-13 लाख नए संक्रमित हर रोज सामने आ रहे हैं. वहीं जान लेने के मामले में ओमिक्रॉन कितना खतरनाक हो सकता है, अभी इस पर रिसर्च चल रहे हैं. और इसी बीच फ्रांस से कोरोना के एक और नए वेरिएंट की खबर आई है. वहां के एक संस्थान ने इसकी खोज की है. अस्थायी तौर पर इसे IHU वेरिएंट नाम दिया गया है. फ़्रांस के वैज्ञानिकों ने बताया है कि फ़िलहाल 12 मरीजों में इस वेरिएंट को देखा गया है. उनका कहना है कि IHU में ओमिक्रॉन से भी ज्यादा म्यूटेशंस हैं.
कहां से आया नया वेरिएंट?
फ़्रांस के दूसरे बड़े शहर मार्सेले (Marseille) में IHU Mediterranee Infection नाम का एक स्वास्थ्य संबंधी संस्थान है. ट्रिब्यून इंडिया की एक खबर के मुताबिक वहां के वैज्ञानिकों ने बताया कि दक्षिण-पूर्वी फ़्रांस के एक ही इलाके में रहने वाले 12 मरीजों के सैम्पल्स पर qPCR टेस्ट किया गया था. इसी से सैम्पल्स में वायरस के असामान्य म्यूटेशंस का पता चला. कुल 46 म्यूटेशंस और 37 डिलीशंस देखे गए.
फ़्रांस के वैज्ञानिकों की स्टडी के मुताबिक इस वेरिएंट का पहला मरीज पूरी तरह से वैक्सीनेटेड था. वो कुछ समय पहले सेंट्रल अफ्रीका के कैमरून शहर से वापस लौटा था. वापस लौटने के 3 दिन बाद उसे सांस लेने में हल्की दिक्कत हुई. जांच की गई तो उसमें कोरोना का संक्रमण मिला, लेकिन ये इन्फेक्शन उस वक़्त चल रहे डेल्टा वेरिएंट का नहीं था और न ही उसके बाद शुरू हुए ओमिक्रॉन का. इसके बाद उसी इलाके के 2 वयस्क और 5 बच्चों में भी म्यूटेशंस का यही कॉम्बिनेशन देखा गया. इसके बाद सभी 8 पेशेंट्स के सैम्पल्स को फ़्रांस के यूनिवर्सिटी हॉस्पिटल इंस्टिट्यूट भेजा गया जहां इस पर गहन शोध किया गया.
कितना खतरनाक हो सकता है?
शोध का परिणाम आया कि इसका जीनोटाइप पैटर्न पुराने B.1.640.1 लीनिएज का ही है. इसके बाद इसे B.1.640.2 नाम दिया गया. लेकिन इसके स्पाइक प्रोटीन पर अपेक्षाकृत पुराने बीटा वेरिएंट से ज्यादा म्यूटेशंस हैं. इसके अलावा इसमें N501Y म्यूटेशन है. एक्सपर्ट्स कहते हैं कि इस म्यूटेशन के चलते ये ज्यादा फैलने वाला हो सकता है. IHU में E484K म्यूटेशन भी मौजूद है जिसके चलते आशंका जताई गई है कि ये वैक्सीन के प्रभाव को भी कम कर सकता है. ये दोनों म्यूटेशन अल्फ़ा, बीटा और गामा वेरिएंट में भी पाए गए थे.
एक्सपर्ट्स क्या कहते हैं?
IHU इंस्टिट्यूट के वैज्ञानिक फ़िलिप कोल्सन कहते हैं कि ये इस बात का उदाहरण है कि कोविड-19 के वेरिएंट्स का अनुमान लगाना कितना मुश्किल है. विदेशों से नए वेरिएंट का आना और उसे आगे फैलने से रोकना मुश्किल है. जीनोम स्तर पर इन वेरिएंट की निगरानी करने की ज़रूरत और बढ़ गई है. अमेरिकन एपिडेमियोलॉजिस्ट एरिक फील डिंग ने लगातार कई ट्वीट करके इस वेरिएंट के बारे में कई बातें कही हैं. सोर्सेज के हवाले से एरिक कहते हैं,
इसी तरह फ़्रांस के साइंटिस्ट फ़िलिप कोल्सन कहते हैं कि अभी इस वेरिएंट के एपिडेमियोलॉजिकल या क्लिनिकल फ़ीचर्स के बारे में बताना जल्दबाजी होगी. यानी अभी साफ़ तौर पर नहीं कहा जा सकता है कि ये कितना खतरनाक हो सकता है और कितनी तेजी से फ़ैल सकता है. आपको बता दें कि विश्व स्वास्थ्य संगठन यानी WHO कोरोना के हर नए वेरिएंट को दो केटेगरी में रखता है. एक, वेरिएंट ऑफ़ कंसर्न, और दूसरी वेरिएंट ऑफ़ इंटरेस्ट. ज्यादा खतरनाक वेरिएंट ऑफ़ कंसर्न की श्रेणी वाला वेरिएंट माना जाता है. ओमिक्रॉन को भी इसी श्रेणी में रखा गया था.
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