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पूर्व सांसद धनंजय सिंह को 7 साल की सजा, चुनाव लड़ने का सपना टूटा

धनंजय सिंह के खिलाफ अपहरण का केस जनवरी 2020 में जल निगम के प्रोजेक्ट मैनेजर ने दर्ज कराया था.

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चार साल पहले धनंजय सिंह के खिलाफ ये केस दर्ज हुआ था. (फोटो- फेसबुक)

जौनपुर की स्पेशल कोर्ट ने अपराधी से राजनेता बने पूर्व सांसद धनंजय सिंह (Dhananjay Singh) को सात साल की सजा सुनाई है. चार साल पुराने अपहरण और रंगदारी मामले में एक दिन पहले जौनपुर की MP/MLA कोर्ट ने उन्हें दोषी करार दिया था. दोषी साबित होने के तुरंत बाद उन्हें जेल भेज दिया गया था. धनंजय सिंह साल 2009 में बसपा से लोकसभा सांसद बने थे.

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कोर्ट ने पूर्व सांसद पर 50 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया है. इस मामले में धनंजय के एक सहयोगी संतोष विक्रम सिंह को भी सात साल की सजा मिली है.

किस मामले में सजा मिली?

कभी यूपी के ‘मोस्ट वॉन्टेड’ क्रिमिनल रहे धनंजय सिंह के खिलाफ ये केस 2020 में दर्ज हुआ था. 10 मई 2020 को जौनपुर के लाइन बाजार थाने में यूपी जल निगम के प्रोजेक्ट मैनेजर अभिनव सिंघल ने अपहरण, रंगदारी व अन्य धाराओं में केस दर्ज कराया था. अभिनव सिंघल तब करोड़ों रुपये के सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट प्रोजेक्ट को देख रहे थे. उन्होंने आरोप लगाया कि धनंजय सिंह इस प्रोजेक्ट में माल सप्लाई का कॉन्ट्रैक्ट लेना चाहते थे. ये प्रोजेक्ट करीब 300 करोड़ रुपये का था.

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शिकायत में बताया गया कि उनके सहयोगी विक्रम दो साथियों के साथ अभिनव का अपहरण कर पूर्व सांसद के आवास पर ले गए थे. वहां धनंजय सिंह पिस्टल के साथ आए और उन्हें धमकाया कि वो कम गुणवत्ता वाली सामग्री का इस्तेमाल करें.

शिकायत के मुताबिक, अभिनव ने इनकार किया तो उन्हें गालियां दी गईं और धमकी देते हुए रंगदारी मांगी गई. शिकायत के आधार पर पुलिस ने मामले में FIR दर्ज कर पूर्व सांसद को गिरफ्तार कर लिया था. हालांकि, बाद में कोर्ट से धनंजय सिंह को जमानत मिल गई थी.

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धनंजय सिंह और संतोष विक्रम के खिलाफ आईपीसी की कई धाराओं के तहत केस दर्ज हुआ था. इसमें अपहरण, जान की धमकी देकर रंगदारी, जानबूझकर अपमानित करना और आपराधिक धमकी देने जैसे आरोप थे.

लोकसभा चुनाव लड़ने की तैयारी

साल 2002 में धनंजय पहली बार जौनपुर की रारी विधानसभा से पहली बार निर्दलीय विधायक बने थे. इसके बाद अगला चुनाव नीतीश कुमार की पार्टी जनता दल यूनाइटेड (JDU) की टिकट पर लड़ा. फिर से जीत गए. लेकिन एक साल बाद ही उन्होंने मायावती की बहुजन समाज पार्टी (BSP) का दामन थाम लिया. 2009 के लोकसभा चुनाव में मायावती ने उन्हें टिकट दे दिया. धनंजय सिंह जीते और पहली बार सांसद बने. लेकिन दो साल में ही मायावती ने धनंजय को पार्टी से निकाल दिया. ये कहते हुए कि वो पार्टी विरोधी गतिविधियों में लिप्त थे.

इसके बाद धनंजय सिंह को चुनावी सफलता नहीं मिली. उन्होंने 2014 का लोकसभा चुनाव लड़ा लेकिन हार गए. फिर 2017 का विधानसभा चुनाव लड़ा उसमें भी हार गए. साल 2022 में भी JDU के टिकट से विधायकी का चुनाव लड़े. मल्हनी सीट पर उन्हें सपा के लकी यादव से हार का सामना करना पड़ा था.

लोकसभा चुनाव 2024 को लेकर धनंजय एक बार फिर उत्साहित थे. चर्चा थी कि जेडीयू के टिकट पर वे जौनपुर से लोकसभा चुनाव लड़ सकते हैं. बीजेपी ने अपनी पहली लिस्ट में जौनपुर से कृपाशंकर को टिकट दिया है. हालांकि इसके बाद भी वे नहीं रुके. 2 मार्च को एक पोस्ट में उन्होंने लिखा था, “साथियो, तैयार रहिए. लक्ष्य बस एक लोकसभा 73, जौनपुर.”

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