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थाईलैंड में बुलेट ट्रेन बनने पर लोग भारत वाली को क्यों कोस रहे हैं

सोशल मीडिया पर लोग मोदी सरकार से मांग रहे जवाब.

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थाईलैंड में बुलेट ट्रेन की तुलना लोग भारत की बुलेट ट्रेन से करके सरकार से जवाब मांग रहे हैं.
आजकल सबकी ट्रेन बुलेट पर अटकी हुई है. तमाम लोगों की जिंदगी का एकै मकसद हो गया है- बुलेट ट्रेन नहीं चलने देंगे. एलफिंस्टन स्टेशन पर भगदड़ मचने के बाद मनसे के बड़बोले नेता राज ठाकरे ने धमकी दी कि पहले मुंबई के स्टेशनों को दुरुस्त करें वरना महाराष्ट्र में बुलेट ट्रेन की एक ईंट नहीं रखने देंगे. कुछ और लोग हैं, जिन्हें रात में बुलेट ट्रेन के सपने आते हैं. डरावने वाले, तभी तो वो इस प्रोजेक्ट की छीछालेदर करने का कोई मौका नहीं छोड़ते. और इस बार तो मामला लबर-लबर में गड़बड़ा गया. दरअसल थाईलैंड में भी एक बुलेट ट्रेन का प्रोजेक्ट शुरू होना है. वहां चीन को काम मिला है. एक खबर आई कि थाईलैंड ने इस प्रोजेक्ट के लिए 5.5 बिलियन डॉलर यानी लगभग साढ़े तीन खरब रुपए का फंड रिलीज कर दिया है. और बस कउवा कान ले उड़ा वाली हालत हो गई. तमाम लोगों ने सोशल साइट्स पर इसकी तुलना भारत के मुंबई-अहमदाबाद प्रोजेक्ट से करनी शुरू कर दी. बताया गया कि थाईलैंड में 3000 किलोमीटर के प्रोजेक्ट पर 5.5 बिलियन डॉलर खर्च हो रहा है. जबकि भारत में महज 500 किलोमीटर पर ही 17 बिलियन डॉलर यानी लगभग 11 खरब रुपए खर्च कर दिए जा रहे हैं. (इन खरबों को जोड़ने में हमारा दिमाग घूम गया).
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सोशल मीडिया पर एक से एक बड़का-बड़का लोगों ने इसका चीरहरण किया. मशहूर वकील प्रशांत भूषण ने भी इस मामले पर केंद्र सरकार की खिंचाई करते हुए एक ट्वीट कर डाला. दिल्ली के सीएम अरविंद केजरीवाल ने भी इसे रीट्वीट करने में देर नहीं लगाई. ऐसे ही हजारों लोगों ने इस पर सवाल खड़े किए. भ्रष्टाचार के आरोप भी लगाए. सरकार से जवाब मांगने लगे. जवाब मांगने से पहले किसी ने इसे क्रॉस चेक तक करने की जरूरत नहीं समझी. सब कउवे को ढूंढने लगे. किसी ने अगर गूगल ही कर लिया होता तो हकीकत सामने आ जाती. पता चल जाता कि 5.15 बिलियन डॉलर थाईलैंड में पहले फेज के लिए जारी किए गए हैं. इस फेज में 250 किलोमीटर ट्रैक का निर्माण होना है.
बाद में प्रशांत भूषण ने दी सफाई.
बाद में प्रशांत भूषण ने दी सफाई.

बाद में प्रशांत भूषण को तो शायद अपनी गलती का अहसास हो गया तो उन्होंने माफी मांगते हुए एक और ट्वीट किया. इसमें उन्होंने बताया कि थोड़ी और रिसर्च के बाद पता चला कि 5.5 बिलियन डॉलर रकम 250 किलोमीटर के पहले फेज के लिए ही है. पर तमाम लोग ऐसे हैं जो अब भी अपनी बात पर अड़े हैं. सरकार से जवाब मांग के ही दम लेंगे.
थाईलैंड में 3000 नहीं, 873 किलोमीटर का है प्रोजेक्ट
लोगों ने जो अफवाह उड़ा रखी है, उसमें थाईलैंड में 3000 किलोमीटर के बुलेट ट्रेन के प्रोजेक्ट की बात कही जा रही है. जबकि असल में प्रोजेक्ट 873 किलोमीटर का है. ये ट्रेन थाईलैंड बॉर्डर को देश के इंडस्ट्रियल इलाकों और लाओस पोर्ट को जोड़ेगी. साउथ वेस्ट चीन का कन्मिंग शहर भी इस प्रोजेक्ट से जुड़ेगा. इसी लिहाज से ये प्रोजेक्ट चीन के लिए महत्वपूर्ण है. वहीं पहले फेज में बुलेट ट्रेन बैंगकॉक से नाखोन रातचसिमा को जोड़ेगी. इसका काम दिसंबर से शुरू हो जाएगा.


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