
सोशल मीडिया पर एक से एक बड़का-बड़का लोगों ने इसका चीरहरण किया. मशहूर वकील प्रशांत भूषण ने भी इस मामले पर केंद्र सरकार की खिंचाई करते हुए एक ट्वीट कर डाला. दिल्ली के सीएम अरविंद केजरीवाल ने भी इसे रीट्वीट करने में देर नहीं लगाई. ऐसे ही हजारों लोगों ने इस पर सवाल खड़े किए. भ्रष्टाचार के आरोप भी लगाए. सरकार से जवाब मांगने लगे. जवाब मांगने से पहले किसी ने इसे क्रॉस चेक तक करने की जरूरत नहीं समझी. सब कउवे को ढूंढने लगे. किसी ने अगर गूगल ही कर लिया होता तो हकीकत सामने आ जाती. पता चल जाता कि 5.15 बिलियन डॉलर थाईलैंड में पहले फेज के लिए जारी किए गए हैं. इस फेज में 250 किलोमीटर ट्रैक का निर्माण होना है.

बाद में प्रशांत भूषण ने दी सफाई.
बाद में प्रशांत भूषण को तो शायद अपनी गलती का अहसास हो गया तो उन्होंने माफी मांगते हुए एक और ट्वीट किया. इसमें उन्होंने बताया कि थोड़ी और रिसर्च के बाद पता चला कि 5.5 बिलियन डॉलर रकम 250 किलोमीटर के पहले फेज के लिए ही है. पर तमाम लोग ऐसे हैं जो अब भी अपनी बात पर अड़े हैं. सरकार से जवाब मांग के ही दम लेंगे.
थाईलैंड में 3000 नहीं, 873 किलोमीटर का है प्रोजेक्ट
लोगों ने जो अफवाह उड़ा रखी है, उसमें थाईलैंड में 3000 किलोमीटर के बुलेट ट्रेन के प्रोजेक्ट की बात कही जा रही है. जबकि असल में प्रोजेक्ट 873 किलोमीटर का है. ये ट्रेन थाईलैंड बॉर्डर को देश के इंडस्ट्रियल इलाकों और लाओस पोर्ट को जोड़ेगी. साउथ वेस्ट चीन का कन्मिंग शहर भी इस प्रोजेक्ट से जुड़ेगा. इसी लिहाज से ये प्रोजेक्ट चीन के लिए महत्वपूर्ण है. वहीं पहले फेज में बुलेट ट्रेन बैंगकॉक से नाखोन रातचसिमा को जोड़ेगी. इसका काम दिसंबर से शुरू हो जाएगा.
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