इतना सब बवाल हुआ क्योंकि एक वो आदमी इससे नाराज था, जिसके पास महाराष्ट्र में सिर्फ एक विधायक है, लेकिन उसकी ताकत संविधान के समांतर चुनौती बनकर खड़ी है. उड़ी हमले के बाद राज ठाकरे ने कहा था कि वो एक भी ऐसी फिल्म रिलीज नहीं होने देंगे जिसमें पाकिस्तानी कलाकार ने काम किया हो.इस मीटिंग में प्रोड्यूसर्स गिल्ड के प्रेसिडेंट मुकेश भट्ट, प्रोड्यूसर सिद्धार्थ रॉय कपूर, साजिद नाडियाडवाला और फॉक्स स्टार स्टूडियोज के विजय सिंह भी मौजूद थे. मीटिंग के बाद मुकेश भट्ट ने कहा कि हमने मुख्यमंत्री को भरोसा दिया कि वो फ्यूचर में किसी पाकिस्तानी कलाकार के साथ काम नहीं करेंगे. लेकिन राज ठाकरे ने इस बैठक के बाद जो कहा वो ज्यादा खतरनाक है. उन्होंने कहा, 'हर प्रोड्यूसर जो पाकिस्तानी एक्टर के साथ काम करेगा, उसे आर्मी वेलफेयर फंड में 5 करोड़ रुपये देने होंगे.'
इसका क्या मतलब है? ये तो उनकी अपनी ही सोच में विरोधाभास है. अगर राज ठाकरे मानते हैं कि पाकिस्तानी कलाकारों को बैन करना सच में 'देश हित' में है तो 5 करोड़ के लिए समझौता क्यों? क्या हमारा सैनिक कोश 5 करोड़ के बिना सिकुड़ा जा रहा है जो वह 'देशहित' को भी ताक पर रखने को तैयार हैं?ठाकरे ने ये भी कहा कि प्रोड्यूसर्स को लिखित में देना होगा कि वो पाकिस्तानी एक्टर्स को कभी काम नहीं देंगे. इस 'निपटारे' को राज ठाकरे ने अपनी जीत बताया और कहा कि हम पाकिस्तानी कलाकारों के भारत में काम करने के खिलाफ हमेशा प्रदर्शन करते रहे हैं. लेकिन बॉलीवुड ने कभी इसे नहीं समझा. अब उन्हें समझ आ गया है. रीढ़ की हड्डी चटकने की आवाज़ आ रही है?
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