संसद की एथिक्स कमेटी को बिजनेसमैन दर्शन हीरानंदानी का लेटर मिल गया है. कमेटी के अध्यक्ष विनोद कुमार सोनकर ने इसकी पुष्टि की है. इस लेटर में हीरानंदानी ने तृणमूल कांग्रेस की सांसद महुआ मोइत्रा (TMC MP Mahua Moitra) पर आर्थिक लाभ के बदले संसद में सवाल पूछने और पीएम मोदी को बदनाम करने का आरोप लगाया है.
महुआ मोइत्रा पर हीरानंदानी का लेटर एथिक्स कमेटी को मिल गया, अध्यक्ष ने बताया अब क्या होगा
महुआ मोइत्रा को तलब करने का निर्णय 26 अक्टूबर को बीजेपी सांसद निशिकांत दुबे और सुप्रीम कोर्ट के वकील जय अनंत देहादराई के बयानों को सुनने के बाद लिया जाएगा.


दर्शन हीरानंदानी का पत्र मिलने के बाद विनोद सोनकर ने बताया कि अगर जरूरत पड़ी तो TMC सांसद को 26 अक्टूबर के बाद तलब किया जाएगा.
हीरानंदानी से मिले लेटर को सोनकर ने ‘शपथ पत्र’ बताया. साथ ही कहा कि महुआ मोइत्रा को तलब करने का निर्णय 26 अक्टूबर को बीजेपी सांसद निशिकांत दुबे और सुप्रीम कोर्ट के वकील जय अनंत देहादराई के बयानों को सुनने के बाद लिया जाएगा.
वहीं सोनकर के बयान का जवाब देते हुए महुआ मोइत्रा ने सोशल मीडिया वेबसाइट X पर लिखा,
“एथिक्स कमेटी के अध्यक्ष मीडिया से खुलकर बात करते हैं. कृपया नीचे लोकसभा नियमों को देखें. ‘शपथ पत्र’ मीडिया तक कैसे पहुंचता है? अध्यक्ष को पहले इसकी जांच करानी चाहिए कि ये कैसे लीक हुआ. मैं दोहराती हूं-बीजेपी का एक सूत्रीय एजेंडा मुझे लोकसभा से निष्कासित करने का है, जिससे कि मैं अडानी के खिलाफ कुछ न बोलूं.”
इससे पहले विनोद कुमार सोनकर ने बताया था कि इस मामले की जांच की जाएगी. साथ ही सभी सबूतों को परखा जाएगा. इंडिया टुडे से जुड़ी पॉलोमी साहा की रिपोर्ट के मुताबिक एथिक्स कमेटी के अध्यक्ष ने मामले पर कहा था,
"ये एक गंभीर मामला है, इसमें कोई शक नहीं है. हमने दोनों पार्टियों से सबूत जमा करने के लिए कहा है."
बता दें कि भारतीय जनता पार्टी (BJP) के सांसद निशिकांत दुबे ने TMC सांसद महुआ मोइत्रा पर संसद में सवाल पूछने के लिए रिश्वत लेने के आरोप लगाए थे. उन्होंने सुप्रीम कोर्ट के एक वकील जय अनंत देहदराई की सीबीआई को लिखी चिट्ठी के आधार मोइत्रा पर ये आरोप लगाए थे. साथ ही लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला, केंद्रीय आईटी मंत्री अश्विनी वैष्णव और उनके राज्य मंत्री राजीव चंद्रशेखर को पत्र लिखकर इन आरोपों की जांच के लिए एक जांच पैनल गठित करने की मांग की थी.
मोइत्रा ने किया खारिजमहुआ मोइत्रा ने इन आरोपों को सिरे से खारिज किया है. उन्होंने आरोप लगाया कि प्रधानमंत्री ऑफिस (PMO) ने दर्शन हीरानंदानी से जबरन हलफनामे पर हस्ताक्षर करवाए हैं. मोइत्रा ने हलफनामे की विश्वसनीयता पर सवाल उठाते हुए कहा कि ये कागज के एक सफेद टुकड़े पर है, ना ही इसमें कोई लेटरहेड है और ना ही आधिकारिक स्टाम्प.
उधर, हीरानंदानी समूह ने अपने ऊपर लगे इन आरोपों को खारिज किया है. उन्होंने कहा कि हीरानंदानी समूह ने हमेशा सरकार के साथ मिलकर काम किया है. वो देश के हित में काम करते हैं और ऐसा करते रहेंगे.
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