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ट्विशा शर्मा केस: हाई कोर्ट में अपनी पैरवी खुद करेंगी रिटायर्ड जज गिरिबाला सिंह

Twisha Sharma Case: ट्विशा शर्मा मौत मामले में आरोपी रिटायर्ड जज Giribala Singh अपने केस की पैरवी खुद कर सकती हैं. Madhya Pradesh High Court की वेकेशन बेंच के सामने केस सुनवाई के लिए लिस्टेड है.

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हाई कोर्ट में अपनी पैरवी खुद करेंगी ट्विशा की सास गिरिबाला सिंह

भोपाल के चर्चित ट्विशा शर्मा मामले में नया अपडेट सामने आया है. सुप्रीम कोर्ट में चीफ जस्टिस सूर्यकांत की अगुवाई वाली बेंच ने सोमवार (25 मई) को केस की सुनवाई की है. अब मध्यप्रदेश हाई कोर्ट की वेकेशन बेंच के सामने इससे जुड़े मामले की सुनवाई होने वाली है, जिसमें ट्विशा की सास और रिटायर्ड जज गिरिबाला सिंह खुद अपनी पैरवी कर सकती हैं.

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टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के मुताबिक, रिटायर्ड जज गिरिबाला सिंह मध्यप्रदेश हाई कोर्ट में अपना पक्ष खुद रख सकती हैं. कथित तौर पर दहेज के लिए प्रताड़ित करने के मामले में रिटायर्ड जज भी आरोपी हैं. मामले में आरोपी ट्विशा के पति समर्थ सिंह पहले ही पुलिस हिरासत में हैं.

बता दें कि गिरिबाला सिंह फिलहाल अग्रिम जमानत पर बाहर हैं, लेकिन ट्विशा के परिवार ने बेल कैंसल करने के लिए हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है. सूत्रों के हवाले से बताया जा रहा है कि मामले में गिरिबाला अपनी पैरवी खुद कर सकती हैं.

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हाई कोर्ट में उनके वकील एनोष जॉर्ज कार्लो भी मौजूद रहेंगे. बता दें कि मीडियो को दिए इंटरव्यू में रिटायर्ड जज ने अपनी दिवंगत बहू पर ड्रग्स लेने और अपनी मर्जी से अबॉर्शन कराने का आरोप लगाया था. उन्होंने ट्विशा के मायकेवालों पर भी कई तरह के आरोप लगाए थे.

Twisha Sharma Case: सुप्रीम कोर्ट ने दिए अहम निर्देश

सुप्रीम कोर्ट ने ट्विशा केस का स्वत: संज्ञान लेकर सुनवाई की. इस दौरान कोर्ट ने कहा कि यह देखना तकलीफदेह है कि इस केस में न्यायपालिका की निष्ठा और निष्पक्षता के ऊपर सवाल उठाए गए. सर्वोच्च अदालत ने कुछ निर्देश दिए-

- कोर्ट ने ट्विशा शर्मा के परिवार को निर्देश दिया है कि वह मामले से जुड़े कानूनी पक्षों की चर्चा मीडिया में न करें. संबंधित दस्तावेज और सबूत कोर्ट और न्यायिक अधिकारियों के सामने पेश करें.

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- सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान सॉलिसिटर जनरल ने अहम टिप्पणी करते हुए कहा कि इस मामले में यह सत्य है कि एक 33 साल की महिला की मौत हुई है. यह परिवारों के लिए भी सीख है कि उन्हें समझना चाहिए कि तलाकशुदा बेटी का होना, उसकी मौत से बेहतर है.

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