फ्रांस की राजधानी पेरिस का मशहूर एफिल टावर 7 सितंबर को कुछ देर के लिए बंद रहा. वजह? यहां कुछ कर्मचारी एक हिंदू संगठन के दौरे को लेकर प्रोटेस्ट कर रहे थे. आरोप है कि जब हिंदू संगठन से जुड़ा एक जत्था वहां पहुंचा तो उसने महिला कर्मचारियों को हटने के लिए कह दिया. और उनकी जगह पुरुषों की तैनाती की गई. इसके बाद ट्रेड यूनियन ने मोर्चा खोल दिया और अब पेरिस के मेयर ने जांच के आदेश दिए हैं.
'एफिल टावर देखने गए हिंदू संगठन ने कहा महिला कर्मियों को दूर रखिए', पता है फिर क्या हुआ?
Eiffel Tower BAPS Row: 7 सितंबर को एफिल टावर कुछ देरी से खुला. यहां कुछ कर्मचारी प्रोटेस्ट कर रहे थे. ट्रेड यूनियन से जुड़ी एक महिला कर्मचारी ने बताया कि एक हिंदू संगठन के दौरे के दौरान महिलाओं को उनकी जगह से हटने को कहा गया था. पूरा विवाद क्या है?

फ्रांस 24 की रिपोर्ट के मुताबिक, मामला शनिवार 5 सितंबर का है. इस दिन बोचासनवासी अक्षर पुरुषोत्तम स्वामीनारायण संस्था (BAPS) नाम के हिंदू धार्मिक संगठन से जुड़ा एक प्रतिनिधिमंडल एक मंदिर के उद्घाटन के लिए पेरिस पहुंचा था. इसमें 100 लोग शामिल थे. यूनियन का आरोप है कि इस दौरान एफिल टावर पर काम कर रही महिला कर्मचारियों से वर्कप्लेस खाली करने को कहा गया ताकि उनकी जगह पुरुष ले सकें.
एफिल टावर का विवाद कैसे बढ़ा?ट्रेड यूनियन से जुड़ी एक महिला कर्मचारी ने बताया कि इस बात के विरोध में कुछ लोग एफिल टावर के बाहर जमा हुए. उन्हें मैनेजमेंट से बात करनी थी. ये मीटिंग सोमवार 7 सितंबर को हुई. इसी वजह से 7 सितंबर को एफिल टावर कुछ देरी से खुला. गेट पर लिखा गया - ‘ऑपरेशनल कारणों की वजह से गेट खुलने में देरी हो रही है.’
इसके बाद यूनियन और टावर का संचालन करने वाली कंपनी SETE के बीच संवाद हुआ. मैनेजमेंट ने महिला कर्मचारियों से माफ़ी मांगी. कंपनी ने बताया कि संगठन की ओर से ये मांग की गई थी कि इस दौरे को ऐसे प्लान किया जाए जिससे महिलाओं से कम से कम राब्ता हो. लेकिन कंपनी ने स्टैंड लेते हुए कहा कि ये शर्तें नहीं मानी जा सकतीं. SETE ने कहा कि ये कंपनी के नियमों के खिलाफ है. कंपनी स्त्री और पुरुष में भेद नहीं करती.
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मेयर ने दिए जांच के आदेशबातचीत के बाद एफिल टावर का गेट खोल दिया गया. मगर पेरिस के मेयर इमैनुएल ग्रेगोयर ने मामले की जांच के आदेश दे दिए हैं. उन्होंने X पर एक पोस्ट कर इस घटना की निंदा की. उन्होंने यूनियन के प्रोटेस्ट का समर्थन किया और कहा ‘जेंडर के आधार पर ये तय नहीं किया जाएगा कि कौन कहां काम करेगा. महिलाओं को हर जगह जाने की आज़ादी है. ये हमारे संस्कार नहीं हैं.’
इस घटना पर फ्रांस में कई लोगों ने विरोध जताया. फ्रांस की नेशनल असेंबली की अध्यक्ष याएल ब्रॉन-पिवे ने कहा कि विदेशी मेहमानों की मांग पूरी करने के लिए महिलाओं को पीछे नहीं किया जा सकता. दूसरे लोगों का स्वागत करना फ्रांस के मूल्यों को छोड़ना नहीं है.
उधर दूसरी तरफ, हिंदू संगठन ने ऐसे किसी आरोप से इनकार किया है. हालांकि उन्होंने कहा कि अगर इस घटना से किसी की भावनाएं आहत हुई हों तो माफ कर दें.
शनिवार को हुए उद्घाटन कार्यक्रम में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी वर्चुअली शामिल हुए थे. पीएम मोदी ने कार्यक्रम में भारत और फ्रांस के सांस्कृतिक संबंधों पर बात की.
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