9/11 हमले की 25वीं बरसी नजदीक है. 11 सितंबर 2001 को अमेरिका के न्यूयॉर्क में वर्ल्ड ट्रेड सेंटर के ट्विन टावर पर प्लेन घुसाकर आतंकियों ने जो हमला किया, उसे याद कर आज भी रूह कांप जाती है. इस कायरतापूर्ण हमले के 25 सालों के बाद बोतल से जिन्न फिर बाहर निकला है. सऊदी अरब का शख्स उमर-अल-बयौमी पर 9/11 हमले में संदिग्ध था. पकड़ा भी गया, लेकिन अमेरिकी जांच एजेंसी फेडरल ब्यूरो ऑफ इन्वेस्टिगेशन (FBI) की कथित ढील से आज आजाद घूम रहा है.
9/11 हमले का सऊदी अरब से संबंध, FBI की ढील... 25 साल बाद क्या सामने आया?
9/11 Attack में अमेरिका में रहने वाले उमर-अल-बयौमी पर शक तब बढ़ा, जब उसका नाम एक रेंटल एग्रीमेंट में नजर आया. Pentagon पर हमले में शामिल हाईजैकर्स में से दो हाईजैकर्स को बयौमी ने कथित तौर पर किराए पर घर दिलाया था. इन दो हाईजैकर्स के नाम Nawaf al-Hazmi और Khalid al-Mihdhar हैं.

9/11 हमलों में मारे गए लोगों के परिवारों ने अमेरिकी अदालत में 1 ट्रिलियन डॉलर (करीब 94.49 लाख करोड़ रुपये) का मुकदमा दायर किया है. इसमें अटैक में सऊदी अरब के अधिकारियों का हाथ होने का आरोप लगाया गया है. इन हमलों में 2,976 लोगों की मौत हुई थी.
अल कायदा नेता से नजदीकीमुकदमे के कागजात में उमर-अल-बयौमी को लेकर परिवारों की तरफ से गंभीर आरोप लगाए गए हैं. उसका अल कायदा के फ्यूचर लीडर अनवर अल-अवलाकी से कथित कनेक्शन निकला. सऊदी अधिकारियों के साथ भी उसे देखा गया.
अदालत के दस्तावेजों में उमर अल-बयौमी के बारे में गंभीर आरोप हैं. पता चला है कि उसके अल-कायदा के भावी नेता अनवर अल-अवलाकी से कथित संबंध थे और उसे सऊदी अधिकारियों के साथ भी देखा गया था.

9/11 हमले की जांच हुई, तो FBI ने इन्वेस्टिगेशन शुरू की. प्लेन हाईजैकर्स के साथ संबंधों का आरोप उमर-अल-बयौमी. बयौमी 1994 में सऊदी अरब से अमेरिका के सैन डिएगो आया था. उसने इन आरोपों से इनकार किया. सफाई दी कि वो तो अमेरिका इंग्लिश पढ़ने आया था.
सऊदी अधिकारियों से लिंक?BBC की रिपोर्ट के मुताबिक, कोर्ट रिकॉर्ड से पता चला कि उमर-अल-बयौमी तो ज्यादातर पढ़ाई से दूर ही रहा. उसकी इन्वॉल्वमेंट धार्मिक कामकाज में ज्यादा रही, जैसे मजहबी प्रोग्राम कराना. BBC ने 1997 और 1998 के कुछ फुटेज हासिल किए. इसमें बयौमी मिलिट्री स्टाइल में अनवर अल-अवलाकी के साथ पेंटबॉल खेलता दिखा.
पेंटबॉल एक एंटरटेनिंग गेम है, जिसमें एक-दूसरे को नकली बुलेट से शूट किया जाता है. अनवर अल-अवलाकी उस समय अल कायदा का बड़ा नेता नहीं था, लेकिन बाद में उसका कद बड़ा होता गया. 9/11 हमले की जांच करने वाले FBI एजेंट्स ने बताया गया कि इसमें हिस्सा लेने वाले कुछ लोग जिहाद की ट्रेनिंग लेते थे.
एक दूसरी क्लिप में उमर-अल-बयौमी 1998 में अनवर अल-अवलाकी को आदर के साथ मिलता दिखा. उसकी सऊदी अधिकारियों के साथ मीटिंग के भी फुटेज मिले. ये अधिकारी सऊदी अरब के इस्लामिक मामलों के मंत्रालय से जुड़े थे.
9/11 हाईजैकर्स से संबंध?उमर-अल-बयौमी पर शक तब बढ़ा जब उसका नाम एक रेंटल एग्रीमेंट में नजर आया. पेंटागन पर हमले में शामिल हाईजैकर्स में से दो हाईजैकर्स को बयौमी ने कथित तौर पर किराए पर घर दिलाया था. इन दो हाईजैकर्स के नाम नवाफ अल हाजमी और खालिद अल मिहधर हैं.
उमर-अल-बयौमी बाद में ब्रिटेन के बर्मिंघम चला गया. लेकिन उसका 9/11 हमले से पीछा नहीं छूटा. 21 दिसंबर 2001 को ब्रिटेन की मेट्रोपॉलिटन पुलिस ने उसे गिरफ्तार कर लिया. जहां वो रह रहा था, पुलिस को वहां से कई सबूत मिले. इनमें हजारों डॉक्यूमेंट्स, फोटोग्राफ्स और कम से कम 80 वीडियोटेप शामिल थे.
सबसे बड़ा सबूत क्या मिला?बयौमी के खिलाफ सबसे बड़ा सबूत जो हाथ लगा वो एक नोटबुक है. इसमें एक डायग्राम बना था, जिसमें प्लेन की ऊंचाई और टारगेट से दूरी की मैथमेटिकल कैलकुलेशन थी. इतना बड़ा सबूत मिलने के बाद बयौमी का कुछ नहीं बिगड़ा.
आरोप है कि लंदन में मौजूद FBI एजेंट्स ने मांगने पर भी ये डायग्राम सैन डिएगो में जांच कर रहे FBI अधिकारियों और 9/11 कमीशन को नहीं दिए गए. 9/11 कमीशन पर ही 9/11 हमले की पूरी जांच की जिम्मेदारी थी. यहां तक कि बयौमी से पूछताछ करने वाले ब्रिटिश जासूसों को भी इस डायग्राम के बारे में नहीं बताया गया.
9/11 पीड़ितों के परिवारों की कानूनी टीम की सदस्य जोडी वेस्टब्रुक फ्लावर्स ने BBC को बताया,
"यह क्रैश का मैथमेटिकल हिसाब-किताब है. जब हमें पता चला कि यह क्या था, तो हमें समझ आ गया कि यही वो पक्का सबूत था जिसकी हमें तलाश थी."
बाद में एक फेडरल जज ने पाया कि दस्तावेज पहली नजर में 'बयौमी को 9/11 हमलों की जानकारी से जोड़ता है.'
FBI पर सवालसैन डिएगो के FBI एजेंट्स ने ब्रिटेन से मिले सबूतों को बार-बार मांगा, लेकिन उन्हें बहुत कम सबूत दिए गए. जबकि ज्यादातर सबूत कुछ मीटर दूर लंदन के पुलिस स्टेशन में थे, जहां बयौमी को पकड़कर रखा गया था. ब्रिटिश कानून के मुताबिक, 7 दिन से ज्यादा बिना आरोप दर्ज किए किसी को हिरासत में नहीं रख सकते. इसलिए उमर-अल-बयौमी को छोड़ दिया गया.
जेफरी ब्रेनहोल्ट उस समय डिपार्टमेंट ऑफ जस्टिस में काउंटर-टेररिज्म डिपार्टमेंट के डिप्टी डायरेक्टर थे. वे 9/11 के बाद आतंकवाद के आरोपों पर काम करने वाले प्रॉसिक्यूटर की देखरेख करते थे. उन्होंने BBC को बताया कि बयौमी का नाम, उस पर आरोप तय किए जाने की बड़ी संभावना के तौर पर सामने आया.
लेकिन, न्यूयॉर्क अटॉर्नी ऑफिस ने कभी भी आरोप लगाने की मंजूरी उन्हें या उनके साथियों को नहीं भेजी. जेफरी ब्रेनहोल्ट ने कहा कि अगर ऐसा किया गया होता, तो प्लेन का डायग्राम बयौमी के खिलाफ एक अहम सबूत साबित होता. उन्होंने कहा,
"हमने इससे कमजोर सबूतों के आधार पर भी लोगों को दोषी ठहराया है."
सैन डिएगो में जांच की लीड करने वाले रिक लैम्बर्ट ने कहा,
"मुझे लगता है कि अगर हमें वो सबूत मिल जाता और हमने उसका एनालिसिस किया होता, तो हम पहेली के टुकड़ों को बहुत तेजी से जोड़ पाते."
एजेंट्स ने उन सऊदी अधिकारियों से भी पूछताछ करनी चाही जिनका बयौमी से संबंध था. लैम्बर्ट के अनुसार, इसकी इजाजत नहीं दी गई.
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9/11 हमलों के पीड़ितों के परिवार इन हमलों में सऊदी अरब की भूमिका साबित करने की कोशिश कर रहे हैं. सऊदी अरब का हमेशा से यही कहना रहा है कि ना तो देश और ना ही उसके अधिकारी इसमें शामिल थे. वहीं, उमर अल-बयौमी ने भी 9/11 हमलों में किसी भी तरह की भूमिका या हाईजैकर्स से किसी भी संबंध से इनकार किया है.
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