संयुक्त राष्ट्र (United Nations) के मानवाधिकार कार्यालय ने फिलिस्तीनी नागरिकों के खिलाफ इजरायली सेना की कार्रवाई पर एक रिपोर्ट जारी की है. रिपोर्ट में इजरायली सेना के कब्जे वाले वेस्ट बैंक में फिलिस्तीनी नागरिकों के 3 रिफ्यूजी कैंपों को ‘जबरन’ खाली कराने का जिक्र है. साथ ही इजरायल के ‘ऑपरेशन आयरन वॉल’ के तहत वेस्ट बैंक में की जाने वाले कार्रवाइयों को ‘जातीय संहार’ और ‘जबरन विस्थापन’ वाला बताया गया है.
‘जॉर्डन चले जाओ’, UN की रिपोर्ट में इजरायल पर फिलिस्तीनियों को कैंपों से भगाने का आरोप
United Nations Human Rights Commission ने एक रिपोर्ट जारी की है. रिपोर्ट में West Bank के 3 Refugee Camps में इजरायली सेना के Operation Iron Wall को लेकर चिंता जाहिर की है. इसके अलावा इलाके में अवैध इजरायली बस्तियों के बाने का भी जिक्र है.

United Nations Human Rights Commission ने शुक्रवार, 4 सितंबर को ‘वेस्ट बैंक में फिलिस्तीनी शरणार्थी शिविरों का विनाश (दिसंबर 2024 – जनवरी 2026) के नाम से एक रिपोर्ट जारी की. रिपोर्ट के मुताबिक, जनवरी और फरवरी 2025 में इजरायल के ‘ऑपरेशन आयरन वॉल’ में 102 फिलिस्तीनी नागरिकों की मौत गई. इसके अलावा फिलिस्तीन के वेस्ट बैंक के उत्तरी इलाके में स्थिति ‘जेनिन, नूर शम्स और तुलकर्म’ रिफ्यूजी कैंपों से करीब 33 हजार से ज्यादा रहवासियों को ‘जबरन’ विस्थापित होना पड़ा.
जॉर्डन चले जाना चाहिएइन कैंपों से विस्थापित फिलिस्तीनी नागरिकों ने घटना के बारे में बताया. उन्होंने बताया कि इजरायली अधिकारियों ने उनसे कहा कि अब कोई रिफ्यूजी कैंप नहीं होगा और उन्हें (फिलिस्तीनी नागरिकों को) ‘जॉर्डन चले जाना चाहिए.’ ऑपरेशन के तहत इजरायली सेना, पुलिस और अन्य सुरक्षा बलों ने फिलिस्तीनी नागरिकों को मारा. सैकड़ों घर नष्ट किए. सड़कों और अन्य बुनियादी ढांचों को नुकसान पहुंचाया. यहां तक कि पानी और बिजली की आपूर्ति को भी रोक दिया. इसके अलावा तीनों रिफ्यूजी कैंपों में पहुंचाए जाने वाली मदद को भी रोक दिया.
अक्टूबर 2025 तक इजरायली सेना ने जेनिन से 52%, नूर शम्स से 48% और तुलकर्म से 36% इमारतों को तोड़ दिया या हमला कर उन्हें नुकसान पहुंचाया. ये तीनों कैंप उन 19 कैंपों का ही हिस्सा हैं, जिन्हें साल 1948 में ‘नक्बा’ (विस्थापन की घटना) के दौरान बनाया गया था. रिपोर्ट में दावा किया गया की इजरायली सेना ने ‘ऑपरेशन शुरू होने के बाद ही इन तीनों कैंप्स पर कब्जा कर लिया. और वहां की पूरी आबादी को जबरदस्ती हटा दिया गया.’
‘अंतरराष्ट्रीय कानूनों का उल्लंघन’रिपोर्ट में इजरायली सेना की कार्रवाईयों को ‘अंतरराष्ट्रीय कानूनों का उल्लंघन’ बताया गया है. कहा गया कि ‘कैंपों को नागरिकों के रहने लायक न छोड़ना. फिलिस्तीनी नागरिकों विस्थापित होने के लिए मजबूर करना, उन्हें वापस लौटने से रोकने के लिए एयर स्ट्राइक करना, बख्तरबंद बुलडोजर का इस्तेमाल और धमाका करना और बिना जरूरत के सैन्य ताकत का इस्तेमाल करना अंतरराष्ट्रीय कानूनों के तहत सही नहीं है.’
UNHRC के हाई कमिश्नर वोल्कर ने कहा,
‘ऑपरेशन आयरन वॉल को जिस तरह से चलाया गया, उससे पता चलता है कि इसका मकसद ज्यादा से ज्यादा फिलिस्तीन नागरिकों को बाहर निकालना था. और ज्यादा अवैध इजरायली बस्तियों के लिए जगह बनाना था, जो अंतरराष्ट्रीय कानून का उल्लंघन है.’
ऑपरेशन के दौरान इजरायली सेना के हमलों में करीब 102 फिलिस्तीनी नागरिकों की मौत हो गई. इसमें 21 बच्चे भी थे. यह आंकड़ा उस समय वेस्ट बैंक में इजरायली सेना की कार्रवाई में मारे गए लोगों का 46% था. रिपोर्ट में कुछ नागरिकों के मौतों का जिक्र किया गया है. इसमें बताया कि गया 8 माह की प्रेग्नेंट सोंडोस शलाबी की मौत इजरायली सेना की कार्रवाई में हुई. हमले के वक्त वो नूर शम्स कैंप से गाड़ी से दूर जाने की कोशिश कर रही थीं.
बच्ची के सिर में गोली लगीइसके अलावा 10 साल के सद्दाम हुसैन रजब को तुलकर्म कैंप में पेट में गोली लगने से मौत हो गई थी. सद्दाम उस समय मस्जिद जाने के लिए अपने पिता का इंतजार कर रहे थे. इसके अलावा 43 साल के अहमद निमेर अल-शायब को उस वक्त गोली लगने से मौत हो गई, जब वो जेनिन कैंप से कार से निकलने की कोशिश कर रहे थे. इजरायली सेना ने की गोलीबारी में जेनिन कैंप की एक 2 साल की बच्ची की भी मौत हो गई थी. गोलीबारी के समय बच्ची अपनी मां और मौसी के साथ डिनर कर रही थी. रिपोर्ट में बताया गया कि बच्ची के सिर में गोली लगी थी, जिससे उसकी मौत हो गई.
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