डॉनल्ड ट्रंप ने भी मान लिया कि उन्हें ईरानी खतरे को देखते हुए तुर्की से दूसरे प्लेन से लौटना पड़ा. जुलाई में ट्रंप ने तुर्की में नॉर्थ अटलांटिक ट्रीटी ऑर्गेनाइजेशन (NATO) समिट 2026 में हिस्सा लिया था. उनकी सुरक्षा के लिए जिम्मेदार सीक्रेट सर्विस को उनके प्लेन पर ईरानी हमले की खबर थी. एजेंसी ने उन्हें तय प्लेन के बजाय दूसरे विमान से जाने के लिए कहा. ट्रंप ने ऐसा ही किया.
ईरान से डर गए डॉनल्ड ट्रंप? तुर्की में चुपचाप दूसरे प्लेन से हुए रवाना, समझें पूरा मामला
Iran से मिली कथित 'हत्या की पक्की धमकी' के बाद Turkey के अंकारा में US President Donald Trump की फ्लाइट चुपचाप बदल दी गई. अमेरिकी एजेंसियों ने ट्रंप को फ्लाइट में खाना और दूसरी चीजें पहुंचाने वाले एयरपोर्ट कैटरिंग ट्रक से दूसरे प्लेन में चढ़ाया.

इंडिया टुडे की रिपोर्ट के मुताबिक, रिपोर्टर्स से बात करते हुए डॉनल्ड ट्रंप ने बड़ी साफगोई से कहा कि वे तो बस सीक्रेट सर्विस और यूएस मिलिट्री की बात मान रहे थे. ट्रंप दूसरे मिलिट्री प्लेन में बैठकर रवाना हो गए. प्रेसिडेंट के ऑफिशियल एयर फोर्स वन प्लेन का इस्तेमाल धोखे के रूप में किया गया, ताकि ट्रंप की लोकेशन पता न चल सके.
ट्रंप को केटरिंग ट्रक से ले गएवॉशिंगटन पोस्ट की रिपोर्ट के अनुसार, ईरान से मिली 'हत्या की पक्की धमकी' के बाद तुर्की के अंकारा में अमेरिकी राष्ट्रपति की फ्लाइट चुपचाप बदल दी गई. अमेरिकी एजेंसियों ने डॉनल्ड ट्रंप को फ्लाइट में खाना और दूसरी चीजें पहुंचाने वाले एयरपोर्ट कैटरिंग ट्रक से दूसरे प्लेन में चढ़ाया, ताकि किसी को पता ना चले. यह एक छोटा मिलिट्री प्लेन Air Force C-32A था.
ट्रंप कतर से गिफ्ट में मिले बोइंग 747-8 प्लेन से तुर्की पहुंचे थे. लेकिन पुराने एयर फोर्स वन जेट्स की तुलना में इस विमान की सिक्योरिटी कैपेबिलिटीज को लेकर चिंताएं जताई जाती हैं. ट्रंप तो दूसरे प्लेन से निकल गए, लेकिन जर्नलिस्ट और बाकी स्टाफ को उसी एयर फोर्स प्लेन से भेजा गया, जिस पर ईरानी हमले का खतरा था.
ईरान ने भले ही हमला नहीं किया, लेकिन अब सवाल उठ रहे हैं कि अमेरिका ने खतरे का पता होने के बावजूद पत्रकारों और स्टाफ को एयर फोर्स वन से क्यों भेजा.
डॉनल्ड ट्रंप ने क्या बताया?डॉनल्ड ट्रंप ने बताया कि उन्होंने सीक्रेट सर्विस से खतरे की डिटेल नहीं पूछी. ट्रंप ने कहा कि उनकी सिक्योरिटी टीम के निर्देश के मुताबिक ही उन्होंने काम किया. राष्ट्रपति ट्रंप ने घटना के बारे में बताया,
"मैं सीक्रेट सर्विस और मिलिट्री की बात मानता हूं. वे चाहते थे कि मैं एक अलग फ्लाइट, एक अलग प्लेन में जाऊं... मैं वही करता हूं जो वे कहते हैं... मुझे लगता है कि वहां कोई खतरा था. मैंने सच में इसके बारे में ज्यादा नहीं पूछा. मुझे बहुत धमकियां मिलती हैं."
राष्ट्रपति ने जोर दिया कि प्लेन पर वाकई बहुत बड़ा खतरा था. उन्होने कहा कि वही वो प्लेन था, जो उनके (ईरान) निशाने पर सबसे ज्यादा था.
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ट्रंप ने कूल अंदाज में कहा कि उनके लिए ईरान का खतरा कोई बड़ी बात नहीं है. अमेरिकी राष्ट्रपति के लिए तो खतरे रहते ही हैं. ये कोई नई बात नहीं है. ट्रंप बोले,
"मुझे कई तरह के खतरों का सामना करना पड़ता है, जिनके बारे में आपको पता नहीं है. किसी भी अहम राष्ट्रपति को कई खतरों का सामना करना पड़ता है. जो राष्ट्रपति खास अहमियत नहीं रखते, उन्हें कोई खतरा नहीं होता. मुझे लगता है कि शायद मैं सबसे अहम राष्ट्रपति हूं."
उन्होंने आगे कहा कि उन्हें रिस्क की कोई खास चिंता नहीं है. ट्रंप ने कहा, "ईमानदारी से कहूं तो मुझे किसी चीज की चिंता नहीं है. जो भी हो, आप मेरा एटीट्यूड जानते हैं? जो भी हो." ट्रंप ने यह भी कहा कि वे ईरान पर कतई भरोसा नहीं करते. उन्होंने कहा कि वे दुनिया के आखिरी इंसान होंगे, जो ईरान पर भरोसा करेंगे.
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