ईरान के खिलाफ युद्ध अब अमेरिका के 'गले की हड्डी' बन गया है. एक तरफ जंग के खत्म होने के कोई आसार दूर-दूर तक नहीं है. दूसरी ओर यूएस का मिसाइलों का बेड़ा तेजी से खत्म हो रहा है. दावा किया जा रहा है कि अमेरिकी सेना की सटीक निशाना लगाने वाली लंबी दूरी की मिसाइलें खत्म होने के कगार पर हैं.
अमेरिका की सटीक मिसाइलों का स्टॉक लगभग खत्म : रिपोर्ट
US long range precision missiles: दावा है कि अमेरिका ने फरवरी से शुरू हुए युद्ध में अपनी सटीक निशाना लगाने वाली लंबी दूरी की मिसाइलों का बड़ा हिस्सा इस्तेमाल कर लिया है.

अंतरराष्ट्रीय न्यूज एजेंसी रॉयर्ट्स ने सूत्रों के हवाले से बताया है कि अमेरिका ने लॉन्ग रेंज मिसाइल का बड़ा हिस्सा इस्तेमाल कर लिया है. इनमें जमीन से जमीन पर वार करने वाली आर्मी टैक्टिकल मिसाइल सिस्टम (ATACMS) और प्रिसिजन स्ट्राइक मिसाइल (PrSM) शामिल हैं. इन मिसाइल का स्टॉक लगभग खत्म हो गया है.
हालांकि एक सूत्र ने बताया कि प्रिसिजन वेपन्स यानी सटीक टारगेट वाले हथियारों की भारी कमी के बावजूद अमेरिका दोबारा सप्लाई कर सकता है.
हथियारों के स्टॉक के आंकड़ों को लेकर सवाल करने पर व्हाइट हाउस ने ट्रंप का एक बयान जारी किया. कहा कि अमेरिका के पास न सिर्फ दुनिया में किसी भी अन्य देश की तुलना में कहीं ज्यादा हथियार, बल्कि इनकी संख्या जरूरत से कहीं ज्यादा है.
बयान में कहा गया,
"हमारी रक्षा कंपनियां इस समय पहले के मुकाबले कहीं ज्यादा हथियार बना रही हैं. साथ ही वह रिकॉर्ड स्तर पर अपने प्लांट और उपकरणों का विस्तार भी कर रही हैं."
जानकारों का मानना है कि आर्टिलरी शेल्स (विस्फोटक गोले) और कई तरह की मिसाइलों समेत कुछ खास हथियार रिकॉर्ड स्तर पर बनाए जा रहे हैं. मगर वे चेतावनी देते हैं कि लंबे समय तक चलने वाले युद्ध के लिए इनकी सप्लाई कम पड़ सकती है.
रॉयटर्स ने मिसाइल स्टॉक को लेकर लॉकहीड मार्टिन और रेथियॉन कंपनियों से भी बात की, मगर वहां से भी जवाब नहीं आया. यह दोनों कंपनियां मिसाइलें और मिसाइल सिस्टम बनाती हैं. इसके बाद पेंटागन के मुख्य प्रवक्ता शॉन पारनेल ने मामले पर टिप्पणी दी. कहा,
हथियारों के खत्म होने की दी थी जानकारी"अमेरिका की सेना दुनिया की सबसे ताकतवर सेना है. ट्रंप अगर कहीं कार्रवाई करना चाहते है, तो उसके लिए भी हर जरूरी चीज मौजूद है.”
ऐसा बताया गया है कि पिछले हफ्ते ट्रंप ने ईरान के अंदर एक और बड़ा हमला न करने का फैसला सैन्य सलाहकारों की चेतावनी के बाद लिया था. उन्होंने राष्ट्रपति को हथियार स्टॉक में कमी आने की जानकारी दी थी. हालांकि, एक अधिकारी ने इन दावों का खंडन किया. उसने कहा कि ट्रंप ने खाड़ी देशों के दबाव के कारण एक और हमला न करने का फैसला किया था.
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सेंटर फॉर स्ट्रैटेजिक एंड इंटरनेशनल स्टडीज (CSIS) ने एक रिपोर्ट में अनुमान लगाया कि फरवरी और जुलाई के बीच लगभग 65% पैट्रियट इंटरसेप्टर इस्तेमाल हो चुके थे. अमेरिकी स्टॉक में THAAD बैलिस्टिक मिसाइल इंटरसेप्टर की संख्या युद्ध की शुरुआत की तुलना में 38% कम हो गई. पैट्रियट और THAAD सिस्टम दुश्मन मिसाइलों का पता लगाकर उन्हें नष्ट कर देते हैं.
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