उद्योगपति गौतम अडानी को लेकर कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने पीएम मोदी पर निशाना साधा है. दरअसल अमेरिका के एक फेडरल जज ने अडानी ग्रुप के चेयरमैन गौतम अडानी के खिलाफ आपराधिक आरोपों को स्थायी रूप से खारिज कर दिया है. इस पर नेता विपक्ष राहुल गांधी सरकार और पीएम पर हमलावर हैं. राहुल गांधी ने कहा कि इस मामले में जो दिख रहा है, उससे कहीं ज्यादा कुछ है. उन्होंने आरोप लगाया कि एक कमज़ोर पड़ चुके PM को भारत के हितों का सौदा करने के लिए मजबूर किया गया है.
US में अडानी पर केस खारिज, राहुल गांधी का हमला, 'कमजोर PM ने देश के हितों का सौदा किया'
US के एक फेडरल जज ने Adani Group के चेयरमैन Gautam Adani के खिलाफ आपराधिक आरोपों को स्थायी रूप से खारिज कर दिया है. Rahul Gandhi ने कहा कि इस मामले में जो दिख रहा है, उससे कहीं ज्यादा कुछ है. उन्होंने सीधे पीएम मोदी पर हमला बोल दिया.

लोकसभा में नेता विपक्ष राहुल गांधी ने यह भी दावा किया कि भारत को इसकी भारी कीमत चुकानी पड़ रही है. इस पूरे मुद्दे पर राहुल गांधी ने X पर एक पोस्ट की है. पोस्ट में उन्होंने एक मीडिया रिपोर्ट का स्क्रीनशॉट शेयर किया है. इस रिपोर्ट में बताया गया था कि अमेरिकी अदालत ने अडानी और उनके भतीजे सागर अडानी के खिलाफ आरोपों को खारिज करने की मंजूरी दी है. ये मंजूरी अमेरिकी न्याय विभाग के अनुरोध पर दी गई है. उन्होंने अपनी पोस्ट में कहा,
इस मामले में जो दिख रहा है, उससे कहीं ज्यादा कुछ है. एक कमजोर पड़ चुके PM को भारत के हितों का सौदा करने के लिए मजबूर किया गया. भारत इसकी भारी कीमत चुका रहा है.

अमेरिकी फेडरल जज ने गौतम अडानी और उनके भतीजे सागर अडानी के खिलाफ आपराधिक आरोपों को स्थायी रूप से खारिज कर दिया है. लगभग दो साल से यह मामला अमेरिका में चल रहा था. लेकिन इस फैसले के साथ ही अडानी पर आया ये कानूनी संकट टल गया है. न्यूयॉर्क के ईस्टर्न डिस्ट्रिक्ट के अमेरिकी डिस्ट्रिक्ट जज निकोलस गारौफिस ने आरोपों को खारिज करने की मंजूरी दे दी है. द हिंदू की रिपोर्ट के मुताबिक ये मंजूरी न्याय विभाग के अनुरोध पर दी गई है. अडानी ने इस फैसले का स्वागत करते हुए कहा कि उन्होंने इसे विनम्रता और न्यायिक प्रक्रिया के प्रति गहरे सम्मान के साथ स्वीकार किया है.
10 अगस्त को जारी 47 पन्नों के आदेश में, जज गारौफिस ने न्याय विभाग के रूल 48(a) प्रस्ताव को मंजूरी दे दी. इसके तहत गौतम अडानी, सागर अडानी और अडानी ग्रीन एनर्जी के पूर्व CEO विनीत जैन के खिलाफ आरोप-पत्र (indictment) के दूसरे, तीसरे और चौथे आरोपों (counts) को खारिज कर दिया गया. इन आरोपों में सिक्योरिटीज-फ्रॉड की साजिश, वायर-फ्रॉड की साजिश और सिक्योरिटीज फ्रॉड शामिल थे. इन आरोपों को 'विद प्रिज्यूडिस' (with prejudice) खारिज किया गया. इसका मतलब है कि इन आरोपों को दोबारा दायर नहीं किया जा सकता.
दो आरोपों पर फैसला सुरक्षितजज गैराफिस ने Foreign Corrupt Practices Act के उल्लंघन और न्याय में बाधा डालने की साजिश के आरोप पर फैसला सुरक्षित रख लिया. इन दोनों मामलों में भारत में रहने वाले पांच सह-आरोपी भी शामिल हैं जो कोर्ट में पेश नहीं हुए. सह आरोपियों में रंजीत गुप्ता, सिरिल कैबेन्स, सौरभ अग्रवाल, दीपक मल्होत्रा और रूपेश अग्रवाल शामिल हैं. न्याय विभाग के पास कोर्ट की जरूरतों को पूरा करने के लिए 31 अगस्त तक का समय है. जबकि पेश न होने वाले आरोपियों के वकीलों को उसी तारीख तक अपने क्लाइंट की सहमति की पुष्टि करनी होगी.
फैसला देते हुए जज ने जोर देकर कहा कि केस को खारिज करना प्रॉसीक्यूशन पक्ष के विवेक का इस्तेमाल था. ये आरोपों पर कोई फैसला नहीं था. जज गैराफिस ने लिखा -
किसी को भी इस फैसले को सरकार के निर्णय से कोर्ट की सहमति या मामले की असलियत पर कोई राय नहीं समझना चाहिए.
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आपको बता दें कि इस मामले में न तो कोई ट्रायल हुआ, न ही गवाहों से पूछताछ हुई और न ही कोर्ट में सबूतों की जांच की गई. दूसरी तरफ अडानी ग्रुप ने लगातार आरोपों से इनकार किया है. ग्रुप ने कहा है कि उसने लागू कानूनों के अनुसार काम किया है. मामले को खारिज करने का अनुरोध अमेरिकी न्याय विभाग से आया था. विभाग ने तर्क दिया कि बाइडेन प्रशासन के कार्यकाल के आखिरी हफ्तों में सार्वजनिक किए गए इस मामले के ट्रायल तक पहुंचने की संभावना बहुत कम थी. ऐसा लगता था कि यह राजनीतिक रूप से प्रेरित है. साथ ही ये सिर्फ नाम खराब करने (name and shame) की कवायद थी.
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