यकीन नहीं आता तो कांग्रेस का ऑफिशियल ट्विटर हैंडल देखिए. वहां आपको ये वीडियो मिलेगा -
इन दो वीडियो में जो दिखाया जा रहा है, उसकी पॉलिटिक्स को एक पल के लिए अलग रख सकें, तो पाएंगे कि दोनों बढ़िया वीडियो हैं. ऐसा मैं खालिस सौंदर्यबोध (एस्थेटिक्स) के लिहाज़ से कह रहा हूं. पहले वीडियो के थंबनेल में कढ़ाई पर चढ़े एक पतीले में योगी आदित्यनाथ नज़र आते हैं. इसके साथ एक ध्यान खींचक हेडिंग है. इतने के लिए एक मिनिट छह सेकंड दुनिया का सबसे व्यस्त आदमी भी निकाल सकता है.
भाजपा पर हमला करने के लिए जिन मुद्दों और भाषा का इस्तेमाल कांग्रेस आमतौर पर करती है, पहले वीडियो में उन्हीं को बड़ी चतुराई से एक रेसेपी की तरह परोस दिया गया है. इसी से वीडियो के स्लग (वीडियो में नज़र आने वाला टेक्स्ट) बने हैं, जिनमें पन है. बात को पुख्ता करने के लिए समाचारों की कतरनें लगी हैं. और चुनकर फुटेज का इस्तेमाल हुआ है. बढ़िया एडिट.

वीडियो ट्विटर के लिए टेलर मेड हैं
दूसरे वीडियो में प्रधानमंत्री मोदी को ऑकवर्ड बताया गया है. उनके गले लगने के तरीके के आधार पर. एक बार फिर एक छोटा सा वीडियो. प्रधानमंत्री के पद की गरिमा को ठेस पहुंचाए बिना ये कहा जा सकता है कि नरेंद्र मोदी की शख्सियत, ओहदा और रीच (लोगों पर उनकी पकड़ का विस्तार) एक अच्छे मीम के लिए ज़रूरी मसाला और मौका दोनों उपलब्ध कराते हैं. सो यहां किया भी गया है. विदेशी दौरों पर बढ़िया मीम बनाए गए और बढ़िया स्लग लगाए गए.
ध्यान इन वीडियो की टाइमिंग पर भी दिया जाना चाहिए. कर्नाटक में भाजपा कैंपेन पर कट्टरता फैलाने का इल्ज़ाम लगा तो भाजपा में हिंदुत्व के पोस्टर बॉय पर तंज़ कसता वीडियो आया. प्रधानमंत्री मोदी प्रोटोकॉल तोड़कर इज़रायल के प्रधानमंत्री नेतन्याहू से गले मिले, तो उनके गले लगने पर वीडियो छाप दिया गया.

गले लगो, तो ऐसे (कांग्रेस के आधिकारिक ट्विटर हैंडल से)
कुल मिलाकर ये दोनों वीडियो आप तक एक बात पहुंचाते हैं. वो आपको पसंद या नापसंद आ सकती है. लेकिन उसकी प्रस्तुति के दिलचस्प होने को आप नकार नहीं सकते. आप एक बार ही सही, हंस देते हैं. नहीं हंसे, तो कांग्रेस 'टेक इट विद अ पंच ऑफ सॉल्ट' कहकर बरी हो जाएगी. क्योंकि मौज लेने पर फांसी नहीं हो सकती.
एक और बात है. ये वीडियो ट्वीटर के लिए टेलर मेड हैं. ट्विटर पर जिस तरह की कॉस्मोपॉलिटन जनता समय ज़ाया करती है, उस हिसाब से वीडियो में 'होमोसेक्सुएलिटी', 'मिसोजिनी' और 'ब्रोमैंस' का उल्लेख आता है.आज कांग्रेस के सामने जितनी चुनौतियां हैं, उनमें कम्यूनिकेशन शायद सबसे बड़ी है. तिस पर उसका पाला भाजपा से पड़ा है, जिसने खुद कम्यूनिकेशन के इस खेल के नियम तय किए हैं. उसके प्रधानमंत्री पंचायत स्तर के उपचुनाव जीतने पर भी काडर को ट्वीट कर के बधाई दे सकते हैं. ट्वीट-रिट्वीट और सूचनाओं की बाढ़ में कांग्रेस पानी में हाथ पटकती रहती है, तैर कम ही पाती है.

कैप्शन लिखा तो है, हम क्या लिख दें अब और.
योगी आदित्यनाथ या प्रधानमंत्री मोदी के बारे में कांग्रेस का कोई नेता अगर यही सारी बातें एक लाइव भाषण में कहता, तो निश्चित तौर पर ट्रोल हो जाता. तो ये दो वीडियो कांग्रेस के लिए बड़ी उपलब्धि हैं. उसने भाजपा के खिलाफ उसी का हथियार उठाने की कोशिश लाख बार पहले भी की है. लेकिन अब जाकर हुआ है कि वार सही पड़ा है.
अब दो चीज़ें हैं जिन्हें देखना दिलचस्प होगा. पहली ये कि कांग्रेस अपनी आईटी सेल में आए इस नए वीडियो एडिटर और सोशल मीडिया मैनेजर को कितने दिन रिटेन कर पाती है. और दूसरा ये कि भाजपा की आईटी सेल अब क्या करती है. क्योंकि कांग्रेस के पास अगर नरेंद्र मोदी हैं, तो भाजपा के पास राहुल गांधी हैं.
शरलॉक के शब्दों में, द गेम इज़ ऑन मितरों.
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