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कोरोना वैक्सीन लेने वाले जिस शख्स की मौत हुई थी, उसकी पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट से अलग ही कहानी पता चली है

फेफड़ों और दिल में मिले ख़ून और मवाद के थक्के

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देश में कोरोना की वैक्सीन लगाने का काम चल रहा है. टीकाकरण के बाद निश्चित समय के लिए लोगों को निगरानी में रखा जाता है ताकि देखा जा सके कोई परेशानी तो नहीं हो रही. (सांकेतिक फ़ोटो : PTI)
यूपी का मुरादाबाद. यहां के ज़िला अस्पताल में 48 वर्षीय स्वास्थ्यकर्मी महिपाल सिंह को 16 जनवरी को कोरोना की वैक्सीन लगी थी. इसके एक दिन बाद यानी 17 जनवरी को महिपाल की मौत हो गयी. उनके परिजनों ने आरोप लगाया कि वैक्सीन लगवाने के बाद महिपाल सिंह की मौत हुई. लेकिन पोस्ट्मॉर्टम रिपोर्ट बताती है कि महिपाल के दिल की नसों में ब्लॉकेज था, जिसके कारण उन्हें हार्ट अटैक आया और मौत हुई.
महिपाल की पोस्ट्मॉर्टम रिपोर्ट में फेफड़ों में मवाद के थक्के भी पाए गए. इसके अलावा दिल पर फ़ैट जमा था. दिल की नसों में खून के कई थक्के पाए गए. ये भी बात सामने आयी कि महिपाल के दिल का वज़न 500 ग्राम था, जबकि आम दिल का वज़न 200 ग्राम के आसपास होता है. 
Moradabad Covid Vaccine Death Postmortem Report मुरादाबाद के सीएमओ की ओर से महिपाल की पोस्ट्मॉर्टम रिपोर्ट की जानकारी दी गई.

पोस्ट्मॉर्टम में ये दावा किया गया है कि महिपाल की मृत्यु हार्ट अटैक के कारण हुई है. लेकिन फिर भी उनके फेफड़े, दिल और ख़ून के सैम्पल्स को विसरा जांच के लिए सुरक्षित रख लिया गया है.
बता दें, 17 जनवरी को ड्यूटी से लौटने के बाद महिपाल की तबियत बिगड़ने लगी थी.  महिपाल के परिजनों ने इमरजेंसी हेल्पलाइन 108 पर कॉल करके जानकारी दी. आजतक के मुरादाबाद संवाददाता शरद गौतम की रिपोर्ट बताती है कि एम्बुलेंस आने तक महिपाल की तबियत और बिगड़ गयी. आनन-फ़ानन में महिपाल को अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने महिपाल को मृत घोषित कर दिया.  डॉक्टरों ने दिखाया वैक्सीन पर भरोसा देश में इन दिनों कोरोना की वैक्सीन लगाने का काम चल रहा है. कोरोना की वैक्सीन लगने के बाद प्रतिकूल प्रभाव वाले 447 केस आने की जानकारी रविवार को स्वास्थ्य मंत्रालय ने दी थी. लेकिन कोरोना की वैक्सीन लगवा चुके कई बड़े डॉक्टरों ने इस पर भरोसा दिखाया है.
मेदान्ता के मेडिकल डायरेक्टर डॉ. राकेश कपूर ने कहा कि कोरोना वैक्सीन लगवाने के बाद वह आधे घंटे तक ऑब्जर्वेशन रूम में रहे. उन्हें किसी प्रकार की कोई दिक्कत नहीं हुई. टीकाकरण के बाद उन्होंने एक सर्जरी भी की. वह पूरी तरह से स्वस्थ हैं.
वहीं लखनऊ के SGPGI के डायरेक्टर आरके धीमान को कोविशील्ड का टीका दिया गया. उन्होंने कहा कि उन्हें भी किसी तरह की कोई दिक़्क़त नहीं हुई. टीका लगवाने के बाद वह वैक्सीनेशन डे पर घंटों तक निरीक्षण का कार्य देखते रखे.
एम्स के निदेशक डॉक्टर रणदीप गुलेरिया ने भी वैक्सीन लेने के अपने अनुभव साझा किए. साथ ही वैक्सीन को लेकर डर कम करने का प्रयास किया. उन्होंने कहा,
“मुझे (वैक्सीन का) कोई साइड इफेक्ट नहीं है. मैं सुबह से काम कर रहा हूं. अभी मीटिंग भी कर रहा हूं. मैं बिल्कुल ठीक हूं. मैं लोगों को यही कहूंगा कि अगर हमें कोविड से बाहर निकलना है, मृत्यु दर को कम करना है, अर्थव्यवस्था को सुधारना है, स्कूल शुरू करने हैं, जिंदगी पटरी पर लौटानी है तो सभी को आगे आकर वैक्सीन लेनी चाहिए. तभी हम आगे बढ़ पाएंगे.”
साइड इफ़ेक्ट और एलर्जी पर रणदीप गुलेरिया ने कहा, 
“अगर आप कोई भी दवाई लेते हों, तो कुछ एलर्जिक रिएक्शन हो सकता है. बॉडी में जहां (कोरोना का) टीका लगा है, वहां पर थोड़ा सा दर्द, हल्का फीवर हो सकता है. लेकिन 10 पर्सेंट से भी कम लोगों को ऐसा होता है. अगर आप क्रोसिन पैरासिटामॉल भी लेंगे तो भी एलर्जिक रीएक्शन हो सकता है.”
गुलेरिया ने आगे कहा कि अगर सीरियस साइड इफेक्ट्स की बात करें तो चकत्ते हो सकते हैं, घबराहट हो सकती है या सांस फूल सकती है. लेकिन इसमें भी घबराने की कोई बात नहीं है. कोरोना वैक्सीन लगाने वाली हर जगह पर इंतजाम किए गए हैं. साइड इफेक्ट्स से निपटने के लिए केंद्र भी बनाए गए हैं.

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