उत्तर प्रदेश का बाइक बोट घोटाला. जिसमें बाइक सर्विस देने के नाम पर लोगों से हजारों करोड़ रुपये ठग लिए गए. खबर है कि इस घोटाले की जांच कर रही CBI ने FIR दर्ज कर ली है. 15 हजार करोड़ रुपये की धोखाधड़ी वाले इस घोटाले का मास्टरमाइंड संजय भाटी है. शिकायत में उसके अलावा 14 और लोगों के नाम दर्ज हैं. इससे पहले प्रवर्तन निदेशालय ने इस मामले की जांच शुरू की थी. बता दें कि गौतम बुद्ध नगर के दादरी पुलिस स्टेशन में संजय भाटी और अन्य आरोपियों के खिलाफ कई FIR दर्ज की गई थीं. उसके बाद ED ने उनके खिलाफ जांच शुरू की थी. खबरों के मुताबिक जांच एजेंसी अब तक संजय भाटी की कंपनी की 216 करोड़ रुपये की संपत्ति कुर्क कर चुकी है.
क्या है बाइक बोट घोटाला?
संजय भाटी ने गर्वित इनोवेटिव प्रमोटर्स लिमिटेड (GIPL) नाम की कंपनी बनाई थी. इस कंपनी ने 2017-18 में 'बाइक बोट' नाम से स्टार्टअप बिजनेस शुरू किया था. बताया गया कि ये ओला और उबर की तरह ऐप बेस्ड बाइक टैक्सी सर्विस देगी. इन बाइकों को निवेशकों से पैसे लेकर खऱीदा गया था. लोगों को बताया गया कि आप एक या एक से ज्यादा बाइक की कीमत का पैसा कंपनी में निवेश करें. बदले में कंपनी आपको हर महीने एक निश्चित रिटर्न देती रहेगी. मसलन, एक प्लान के मुताबिक 62,100 रुपए के निवेश पर कंपनी हर महीने 9,756 रुपए का रिटर्न देने का वादा करती थी. यानी साल भर में 1 लाख 17 हजार रुपए से भी ज्यादा का रिटर्न. कंपनी के ऐसे कई प्लान थे. साल 2019 में कंपनी ने इलेक्ट्रिक बाइक योजना शुरू की. लोगों से ऐसी हर बाइक के लिए लगभग सवा लाख रुपये जमा करवा लिए. बदले में एक वर्ष तक 17 हजार रुपए हर महीने देने का वादा किया. कंपनी ने इस तरह पैसा जुटाने के लिए देशभर में फ्रैंचाइजी बांट रखी थीं. लेकिन जब लोगों को रिटर्न मिलना बंद हो गया, तो वे कंपनी के अलग-अलग ऑफिसों में हंगामा करने लगे. वे इसकी शिकायत लेकर पुलिस के पास पहुंचे तो पता चला कि बाइक टैक्सी सर्विस देने के नाम पर पब्लिक से हजारों करोड़ रुपये का इन्वेस्टमेंट करा लिया गया. दिसंबर 2020 में दिल्ली पुलिस की आर्थिक अपराध शाखा ने GIPL के डायरेक्टर संजय भाटी को गिरफ्तार कर लिया. घोटाले से जुड़े मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक GIPL ने देश के कई हिस्सों में बड़े पैमाने पर अपना जाल फैलाया हुआ था. दिल्ली, हरियाणा और उत्तर प्रदेश के कई शहरों में इस कंपनी ने अपने ऑफ़िस खोले हुए थे जहां उसने निवेश के बहाने लोगों से करोड़ों की ठगी की. पुलिस की भूमिका की बात करें तो उस पर कंपनी के खिलाफ कार्रवाई ना करने के आरोप लगे. आजतक की रिपोर्ट के मुताबिक निवेशकों का दावा था कि वे अपनी शिकायत लेकर स्थानीय पुलिस के अलावा बड़े पुलिस अधिकारियों के पास भी गए थे, लेकिन कोई ऐक्शन नहीं लिया गया.