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बुलंदशहर में मारे गए इंस्पेक्टर सुबोध के पिता भी हुए थे शहीद

सुबोध के पिता भी पुलिस फोर्स में थे. डकैतों से मुठभेड़ में उन्हें गोली लगी. उन्हीं की जगह सुबोध को नौकरी मिली.

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बाईं तरफ की फोटो तब की है, जब SHO सुबोध कुमार सिंह जिंदा थे. साथ में खड़ी हैं उनकी पत्नी. दाहिनी तरफ के फ्रेम में पत्नी रो रही हैं. उनके सामने उनके पति की लाश रखी है (फोटो: फेसबुक+ANI)
इंस्पेक्टर सुबोध कुमार सिंह. बुलंदशहर के स्याना थाना के SHO. 3 दिसंबर, 2018 को एक भीड़ ने उनकी हत्या कर दी. भीड़ ने उन्हें मारा-पीटा. मगर उनकी जान गई गोली से. कई साल सुबोध के पिता भी ऐसी ही एक गोली से मारे गए थे. वो भी पुलिस में ही थे. सुबोध को पुलिस में जो नौकरी मिली थी, वो अपने पिता की ही जगह पर मिली थी. डाकुओं से एनकाउंटर के दौरान जान गई थी पिता की सुबोध के पिता का नाम था राम अवतार राठौर. वो पुलिस फोर्स में थे. साल 1994 में एक बार डाकुओं से मुठभेड़ के दौरान उन्हें गोली लगी. उनकी मौत हो गई. चूंकि वो ऑन ड्यूटी मारे गए थे, तो उनके पांच बेटों में से एक- सुबोध कुमार सिंह को उनकी जगह पुलिस फोर्स में नौकरी मिल गई. ये 1994 का ही साल था. सुबोध के परिवार में कौन-कौन है? सुबोध का परिवार एटा के तरवां गांव का रहने वाला है. कुछ सालों पहले इन्होंने एटा के बापू नगर में घर बनवाया और यहां शिफ्ट हो गए. फिर जब सुबोध की मां गुजरीं, तो ये लोग ग्रेटर नोएडा शिफ्ट हो गए. सुबोध के परिवार में दो बेटे और पत्नी रजनी हैं. बड़ा बेटा श्रेय ग्रेजुएशन कर रहा है. छोटा अभिषेक इंटर में है. सुबोध का परिवार पहले एटा के बापू नगर में रहता था. फिर जब उनकी गुजर गईं, तो ये लोग ग्रेटर नोएडा में शिफ्ट हो गए. गांव में उनके पड़ोसी गुलिंद्र सिंह ने हमें इस परिवार की कहानी बताई. सुबोध के एक और भाई पुलिस में हैं. वो दरोगा की पोस्ट पर हैं. सुबोध के बड़े भाई आर्मी से रिटायर हो चुके हैं.
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