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कश्मीर: एनकाउंटर में मारे गए नागरिकों के शव कब्र से निकाले, परिवार ने किया सुपुर्द-ए-खाक

भारी विरोध के बाद प्रशासन ने शवों को निकालने का फैसला लिया

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हैदरपोरा एनकाउंटर में मारे गए लोगों के शव 18 नवंबर को देर रात खोदे गए (दोनों फोटो : आजतक)
कश्मीर के हैदरपोरा में सेना के एनकाउंटर में मारे गए दो नागरिकों के शवों का अंतिम संस्कार कर दिया गया है. गुरुवार 18 नवंबर को देर रात इन शवों को कब्र से निकालकर इनके परिजनों को सौंपा गया. जिसके बाद परिजनों ने इन्हें सुपुर्द-ए-खाक किया. 18 नवंबर को ही हैदरपोरा एनकाउंटर की मजिस्ट्रेट जांच का आदेश दिया गया था. इसके बाद जांच अधिकारी खुर्शीद अहमद शाह ने शवों को कब्र से निकाल कर परिवार को सौंपने की कार्रवाई की. अल्ताफ भट और मुद्दसिर गुल की एनकाउंटर में मौत के बाद से इनका परिवार शवों को सौंपने की मांग कर रहा था. एनकाउंटर पर सवाल क्यों? बीते 15 नवंबर को हुए इस एनकाउंटर में दो आतंकी, एक व्यापारी और एक डॉक्टर की मौत हुई थी. कश्मीर जोन के आईजी विजय कुमार ने एनकाउंटर के बाद बताया था कि बीते 15 नवंबर की शाम को श्रीनगर के हैदरपोरा इलाके में पुलिस, सेना और अर्धसैनिक बलों की एक संयुक्त टीम ने आतंकवादियों की मौजूदगी की सूचना मिलने पर एक शॉपिंग कॉम्प्लेक्स की घेराबंदी की. मुठभेड़ में दो आतंकियों और दो नागरिकों की मौत हुई. मारे गए नागरिकों में से एक शॉपिंग कॉम्प्लेक्स के मालिक मोहम्मद अल्ताफ भट और दूसरे दंत चिकित्सक डॉ. मुद्दसिर गुल हैं. ये दोनों ही आतंकवादियों के सहयोगी थे. डॉक्टर गुल के परिवार ने पुलिस के इस दावे को खारिज कर दिया था. परिवार का कहना था कि सुरक्षा बलों के आरोप फर्जी हैं और गुल का आतंकियों से कोई संबंध नहीं था. डॉ गुल की पत्नी ने सरकार से इंसाफ दिलाने की मांग की. हैदरपोरा में इस एनकाउंटर को जबरदस्त विरोध शुरू हो गया. इस एनकाउंटर को लेकर जम्मू-कश्मीर की पूर्व मुख्यमंत्री महबूबा मुफ़्ती भी सेना पर हमलावर हो गईं. जिसके बाद उन्हें नजरबंद कर दिया गया. विरोध बढ़ने पर उपराज्यपाल ने दिए जांच के आदेश जब नागरिकों की मौत का विरोध बढ़ने लगा तो जम्‍मू-कश्‍मीर प्रशासन ने श्रीनगर के एडीएम को एनकाउंटर की जांच करने के आदेश दिए. बीते 18 नवंबर को कश्मीर के उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने एक ट्वीट के जरिए इसकी जानकारी दी. उन्होंने लिखा,
"हैदरपोरा एनकाउंर की एडीएम रैंक के एक अधिकारी से न्यायिक जांच कराने के आदेश दे दिए गए हैं. रिपोर्ट के समयबद्ध तरीके से जमा होते ही सरकार इस मामले में उचित कार्रवाई करेगी. जम्मू-कश्मीर प्रशासन निर्दोष नागरिकों की सुरक्षा करने की अपनी प्रतिबद्धता दोहराता है और वह सुनिश्चित करेगा कि किसी के साथ भी अन्याय न हो."

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