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भारत के दम पर पॉपुलैरिटी बटोर रहा है चीन का वीडियो गेम Black Myth: Wukong, कनेक्शन जान चौंक जाएंगे

Black Myth Wukong Video Game: चीनी यात्री Hiuen Tsang भारत यात्रा पर आए थे. उनके बताए यात्रा वृतांत से बना Chinese Game लोगों के बीच खासा वायरल है. आखिर क्या है इस गेम में?

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ह्वेन सांग की यात्रा और Black Myth: Wukong नाम के एक वीडियो गेम का कनेक्शन

गेमिंग इंडस्ट्री में इन दिनों एक चाइनीज़ गेम ने तहलका मचाया हुआ है. Black Myth: Wukong नाम के एक वीडियो गेम ने रिकॉर्ड बना दिया है. रिलीज़ होने के पहले 3 दिन के अंदर ही इस गेम की 1 करोड़ प्रतियां बिक गईं. तबसे लगातार ये गेम चर्चा का विषय बना हुआ है. गेम के बारे में शॉर्ट में बताएं तो 'सन वुकोंग' यानी मंकी गॉड को एक चट्टान पर कैद कर लिया जाता है. आजाद होने के लिए उसे 6 चीजों की जरुरत है. 6 अवशेष- जो 6 इन्द्रियों से संबंधित हैं. आंख, नाक, जीभ, शरीर, और मस्तिष्क. ये अवशेष पाने के लिए उसे अलग अलग शक्तियों से लड़ना पड़ता है. ये कहानी आधारित है 16 वीं शताब्दी में लिखे गए एक उपन्यास पर. जिसका नाम है - 'जर्नी टू द वेस्ट'. दरअसल जर्नी टू द वेस्ट में जिस वेस्ट की बात कही गई है. असल में वो भारत है.

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इस नॉवेल में बताई कहानी की शुरुआत सातवीं शताब्दी से होती है. लगभग 602 ईस्वीं में चीन के हेनान प्रांत में एक बालक का जन्म हुआ. चेन हुई नाम पड़ा. चेन हुई का बड़ा भाई एक बौद्ध मठ में मॉन्क हुआ करता था. उसी से प्रभावित होकर चेन हुई ने तय किया कि वो भी बौद्ध साधू बनेगा. 16 साल की उम्र तक सब ठीक रहा लेकिन फिर चेन हुई के प्रांत में गृह युद्ध छिड़ गया. और दोनों भाई वहां से भाग निकले. और एक दूसरे मठ में शरण ले ली. चेन हुई कि उम्र अभी मात्र 16 साल थी. लेकिन दिमाग तेज़ था. लिहाजा उसने नई जगह जाकर एक सीनियर साधु से दीक्षा ली. और उनके सानिध्य में बुद्ध धर्म के कठिन और एडवांस समझे जाने वाले ग्रन्थ पढ़ने लगा. कुछ साल यूं ही अध्ययन करने के बाद चेन हुई खुद भी साधु बन गया. और उसे एक नया नाम मिला- जुआन जांग.

भारत क्यों आया जुआन?

ग्रंथों के अध्यन के दौरान एक समय ऐसा आया कि 20 साल का जुआन जांग कन्फ्यूज हो जाता है. ग्रंथों की कई बातें उसे समझ नहीं आती. बड़ी दिक्कत ये थी कि सारी किताबें चीनी भाषा में थी. जिन्हें इंडिया से चीन ले जाकर ट्रांसलेट किया गया था. अंत में इस कन्फ्यूजन को दूर करने के लिए जुआन जांग फैसला करता है कि वो इंडिया जाएगा. जुआन जांग ने फाह्यान के बारे में सुना था. फाह्यान चौथी सदी में भारत आए थे. और यहां से कई बौद्ध ग्रंथ वापिस चीन ले गए थे. जुआन जांग को उम्मीद थी कि फाह्यान की तरह ही उसे भी नए ग्रन्थ मिल जाएंगे. 

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चीनी यात्री  ह्वेन सांग

इंडिया जाने के लिए वो सम्राट से परमिशन मांगता है लेकिन सम्राट कर देते हैं इंकार. जुआन जांग इसके बावजूद भारत जाने का फैसला करता है. और इस तरह 629 ईस्वीं में शुरू होती है वो यात्रा, जिसका जिक्र इतिहास की महानतम यात्राओं में से एक में होता है. जुआन जांग को हम भारत में ह्वेन सांग के नाम से जानते हैं. 16 शताब्दी में चीन में उनकी कहानी पर बेस्ड एक नावेल लिखी गई. एक मिथकीय कहानी. इस कहानी में ह्वेन सांग की भारत यात्रा का जिक्र है. लेकिन कुछ मिथकीय किरादरों के साथ.

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कौन है मंकी गॉड

जर्नी टू द वेस्ट नाम की इस नावेल के अनुसार, ह्वेन सांग की भारत यात्रा के दौरान. चार लोग उनके साथ थे. पहला - सन वुकोंग. या मंकी किंग. Black Myth: Wukong, हाल में प्रचलित हुआ वीडियो गेम, सन वुकोंग की कहानी के ऊपर ही बेस्ड है.

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Monkey king
मंकी गॉड जो ह्वेन सांग की भारत यात्रा में उनके साथ जाता है

चीनी लोककथाओं के अनुसार, सन वुकोंग का जन्म एक पत्थर से हुआ था. दिव्य शक्तियां हासिल करने के बाद वो देवताओं से युद्ध लड़ता है. जिसके चलते बुद्ध उसे एक पहाड़ कर कैद कर लेते हैं. कहानी के अनुसार वुकोंग, बंदरों का राजा है. उसके हाथ में एक जादुई छड़ी होती है. वो रूप बदल सकता है. और एक ही छलांग में कई हजार मील भूमि छलांग सकता है. जर्नी टू द वेस्ट के अनुसार, ह्वेन सांग जब भारत की यात्रा पर जाते हैं. मंकी गॉड भी उनके साथ जाता है, ताकि भूतों, राक्षसों और ड्रैगन के साथ लड़ाई में उनकी मदद कर सके.

मंकी गॉड के अलावा ह्वेन सांग के साथ जाने वाले दूसरे किरदारों में, एक सूअर, स्वर्ग से निष्काषित एक जनरल, और एक सफ़ेद ड्रैगन हॉर्स होता है. ये सब ह्वेन सांग के शिष्य होते हैं. और यात्रा में उनकी मदद करते हैं. नावेल के अनुसार इन सबका लक्ष्य भारत में गृद्धकूट पर्वत तक पहुंचना होता है. ताकि वहां से वे बौद्ध ग्रन्थ लेकर वापिस लौट सकें.

भारत के बारे में क्या है?

इस नावेल को आप पढ़ेंगे तो इसमें अधिकतर मिथकीय एलिमेंट्स हैं. लेकिन मोटामाटी कहानी का सार इतिहास से लिया गया है. मसलन ह्वेन सांग सच में भारत आए थे. इसी प्रकार गिद्धकूट पर्वत भी एक असली स्थान है. जो आज के बिहार के राजगृह में पड़ता है. गिद्ध कूट पर्वत के बारे में माना जाता है कि इस स्थान का गौतम बुद्ध से गहरा रिश्ता था. और यहां उन्होंने कई प्रवचन भी दिए थे. 
इतना समझ गए तो आपको Black Myth: Wukong का इंडिया कनेक्शन भी समझ आ गया होगा. फिलहाल अपन ह्वेन सांग की असली कहानी पर लौटते हैं. क्योंकि ह्वेन सांग की कहानी केवल दिलचस्प ही नहीं है. इससे हमें 1300 साल पुराने भारत के बारे में कई बातें पता चलती हैं.

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चीनी यात्री ह्वेन सांग जो सिल्क रुट के रास्ते भारत आया

ह्वेन सांग ने सिल्क रुट के रास्ते भारत तक यात्रा की थी. अपने यात्रा वृतांतों में वे ताशकंद, बैक्ट्रिया, गांधार जैसे शहरों में बौद्ध स्तूपों और मूर्तियों का जिक्र करते हैं. जिससे पता चलता है कि ह्वेन सांग के वक्त में बौद्ध धर्म का अफ़ग़ानिस्तान और सेन्ट्रल एशिया में भी काफी प्रभाव था. एक जगह वो बताते हैं कि उनकी मुलाक़ात 2000 तुर्क घुड़सवारों की एक टोली से हुई थी. जो यात्रियों को लूटकर सामान आपस में बांट लेते थे.

इनके अलावा भी ह्वेन सांग ने भारत के कई शहरों का जिक्र किया है. मसलन कश्मीर के बारे में वो बताते हैं कि वहां 100 से ज्यादा मठ हुआ करते थे. जिनमें 5 हजार के लगभग साधु रहा करते थे. 
ह्वेन सांग का मुख्य उद्देश्य नालंदा पहुंचना था. इस यात्रा में उन्होंने कान्यकुब्ज यानी कन्नौज, अयोध्या, प्रयाग, कौशाम्बी जैसे शहरों की भी यात्रा की. इस दौरान उन्होंने भारतीय आम जीवन के बारे में जो कुछ देखा, उसका ब्यौरा वो कुछ इस प्रकार देते हैं.

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कैसा था भारत के आम आदमी का जीवन?

"भारत में कई सारे राज्य हैं, जो शहरों और गांवों में बंटे हुए हैं. शहरों में चौकोर चारदीवारी होती है. और गलियों में दुकानें लगती हैं " ह्वेन सांग बताते हैं कि भारत में घरों के अंदर गाय का गोबर लीपा जाता है, और घरों को फूलों से सजाया जाता है. इस प्रकार भारत के आम जीवन का चित्रण करते हुए ह्वेन सांग ने आम लोगों के पहनावे, खान पान, रीति रिवाजों का भी डिटेल में जिक्र किया है. ऐसी डिटेल्स उस वक्त के किसी और ग्रन्थ में मुश्किल से मिलती है.

ह्वेन सांग की सम्राट हर्षवर्धन से मुलाकात

आम जीवन से हटकर राजाओं की बात करें तो भारत में ह्वेन सांग की मुलाक़ात सम्राट हर्षवर्धन से भी हुई थी. हर्षवर्धन ने उन्हें एक धर्म सम्मलेन में शामिल होने का न्यौता दिया था. बकौल ह्वेन सांग, भारत में विभिन्न मतों के बीच डीबेट हुआ करती थी. और इस बहस को सुनने में राजा महाराजा भी दिलचस्पी दिखाते थे. ह्वेन सांग लिखते हैं कि सम्राट हर्षवर्धन उन्हें प्रयाग के कुम्भ मेले में भी लेकर गए थे. 

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ह्वेन सांग ने सम्राट हर्षवर्धन की सेना के बारे में बताया

जहां उन्होंने देखा कि सम्राट लोगों में खूब दान दक्षिणा बांटते हैं. ह्वेन सांग ने सम्राट हर्षवर्धन की सेना के बारे में लिखा है. जिसके अनुसार हर्षवर्धन की सेना में एक लाख से ज्यादा सैनिक थे। वहीं घुड़सवारों और हाथियों का भी युद्ध में इस्तेमाल होता था. ह्वेन सांग लिखते हैं,

 “हर्षवर्धन एक योग्य शासक हैं. उनके राज्य में विद्रोह की घटनाएं कम होती हैं. लोगों पर टैक्स भी कम लगाया जाता है. और राजकोष का अधिकतर पैसा, जमीन पर टैक्स लगाकर जमा किया जाता है.”

ह्वेन सांग नालंदा क्यों गए?

ह्वेन सांग ने कुल 14 वर्ष भारत में बिताए. उनका मुख्य उद्देश्य बौद्ध ग्रन्थ हासिल करना था. उनका ये उद्देश्य पूरा हुआ नालंदा में. 637 ईस्वी के आसपास ह्वेनसांग नालंदा आए थे. उन्होंने कुल मिलाकर पांच वर्ष नालंदा में बिताए. यहां उन्हें मोक्षदेव नाम मिला. ह्वेनसांग ने नालंदा के एक चांसलर, शिलाभद्र का जिक्र किया है. जो ह्वेन सांग के अनुसार योग शास्त्र के सबसे बड़े शिक्षक थे. नालंदा से लौटते हुए ह्वेन सांग 657 ग्रन्थ और बौद्ध धर्म से जुड़े 150 अवशेष अपने साथ वापस ले गए.

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चीनी यात्री ह्वेन सांग ने कुल 14 वर्ष भारत में बिताए

कहानी के मुताबिक ये सब ले जाने में ह्वेन सांग को 20 घोड़ों की जरूरत पड़ी थी. ये सब सामान लेकर वे 645 ईस्वीं में चीन वापिस लौटे थे. यहां उन्होंने बौद्ध ग्रंथों का चीनी भाषा में ट्रांसलेशन किया और Records of the Western Regions नाम की एक किताब लिखी. जिसमें उन्होंने अपनी भारत यात्रा का विस्तार से वर्णन किया है.

ह्वेन सांग ने  ड्रैगन के बारे में क्या लिखा है?

दिलचस्प बात ये है कि इस किताब में ह्वेन सांग ने कुछ ऐसी बातें भी लिखी हैं, जो वास्तविक नहीं मालूम पड़ती। मसलन किताब में उन्होंने ड्रैगन प्रजाति के ऐसे जीवों का वर्णन किया है. जो अपना रूप बदलकर घोडा बन जाते थे। और इन घोड़ों और महिलाओं के संसर्ग से ऐसे ड्रैगन-मेन पैदा होते थे, जो पूरा का पूरा शहर बर्बाद कर सकते थे.

इसी प्रकार कपिलवस्तु के पास उन्होंने एक ऐसे स्तूप का जिक्र किया है, जहां एक ड्रैगन और सांप के मिले जुले स्वरूप वाला एक जीव तालाब से निकलकर स्तूप की परिक्रमा करता था. और एक हाथी अपनी सूंड में फूल पकड़कर स्तूप पर चढ़ाता था. ह्वेन सांग के लिखे में इन बातों के जिक्र से पता चलता है कि शायद ऐसी लोककथाएं उन्होंने सुनी होंगी. इन्हीं के आधार पर 16 वीं शताब्दी में रुझोंग नाम के एक चीनी लेखक ने एक उपन्यास गढ़ा. और उसी के बेस पर एक वीडियो गेम बन चुका है. जिसमें आप खुद मंकी गॉड बनकर एडवेंचर का आनंद ले सकते हैं.  

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