वास्तव में नौसेना की जरूरत सीमा पर है, जहां से आतंकी घुसपैठ करते हैं. आखिर क्यों हर कोई (नौसेना में) दक्षिण मुंबई में रहना चाहता है? वो (नौसेना) मेरे पास आए थे और प्लॉट की मांग की थी. पर मैं उन्हें एक इंच जमीन भी नहीं दूंगा. मेहरबानी कर मेरे पास फिर न आएं. सभी दक्षिण मुंबई की अहम जमीन पर क्वॉर्टर और फ्लैट बनवाना चाहते हैं. हम आपका (नौसेना का) सम्मान करते हैं, लेकिन आपको पाकिस्तान सीमा पर जाना चाहिए और गश्त करनी चाहिए.
समझ नहीं आ रहा कि किस तरह गडकरी जी का शुक्रिया किया जाए जो उन्होंने नौसेना को उनकी ड्यूटी याद दिला दी. मानो अब तक तो नौसेना खाली मछलियां पकड़ने का काम कर रही थी. और पाकिस्तान की सीमा पर सुरक्षा के लिए गडकरी अपने मंत्रालय का काम निपटाने के बाद नाइट शिफ्ट में जाते हैं. अपना 54 इंच का सीना लेकर. 56 इंच का तो किसी और के पास है.
रही बात प्लॉट देने की तो मत दीजिए. बनवाइये उस पर बड़े-बड़े होटल और बिल्डिंगें. मगर कम से कम सेना को जलील तो ना कीजिए. वो भी एक सार्वजनिक कार्यक्रम में. वो भी पश्चिमी नौसैनिक कमान के प्रमुख वाइस एडमिरल गिरीश लूथरा के सामने. इतनी तमीज तो आपको होनी ही चाहिए. कुछ नहीं तो सामने बैठे उस नौसैनिक का ही खयाल कर लेते. नितिन गडकरी साहब का बड़बोलापन यहीं नहीं थमा. गुस्से की असली वजह भी सामने आ गई. बोले-
मैंने सुना कि आपने (नौसेना ने) मालाबार हिल पर तैरते पुल (फ्लोटिंग जेटी) के निर्माण की योजना पर रोक लगा दी. जबकि उच्च न्यायालय से इसे मंजूरी मिल गयी है. इस तरह की विकास परियोजनाओं को रोकना आदत बन गई है. मालाबार हिल में नौसेना कहां है? मालाबार हिल में कहीं नौसेना नहीं है और नौसेना को इस इलाके से कोई लेना-देना नहीं है. आप मेरे पास लाओ, हम सरकार हैं. कोई नेवी और डिफेंस मिनिस्टर सरकार नहीं है. पीएम ने इंफ्रास्ट्रक्चर परियोजनाओं के लिए मुझे कमेटी का अध्यक्ष बनाया है. परियोजनाएं जैसे ही मेरे एजेंडे में आती हैं, उन्हें मंजूरी मिल जाती है.

नितिन गडकरी का नेवी पर सारा गुस्सा एक प्रॉजेक्ट को लेकर निकला.
तो भइया सारा गुस्सा मालाबार हिल में बनने वाली एक परियोजना को लेकर है, जिस पर सेना ने अड़ंगा डाल दिया है. चलिए मान लिया कि सेना ने गलत किया. आप सही हैं तो कार्रवाई करवाइये. जांच बैठाइये. ये किसी सार्वजनिक मंच पर रोना रोने से क्या होगा. चंद लोगों की वजह से पूरी नौसेना को जलील करने से क्या मिलेगा. क्या प्रॉजेक्ट निकल जाएगा. और इतना अहंकार. हद है. हम सरकार हैं. हम. पता है भइया. आप ही हैं. यही बात अगली बार पीएम नरेंद्र मोदी से मिलिएगा तो उन्हें भी बोल दीजिएगा. और जो जवाब मिले, उसे इसी तरह किसी सार्वजनिक मंच पर बताइएगा. अगर है हिम्मत तो.
सेना को ये भी बताने की कोई जरूरत नहीं है कि वो सरकार नहीं है. उसे भली भांति ये पता है. और वो अपनी जिम्मेदारी अच्छे से निभा रही है. तमाम लोग शहीद हुए हैं. रही बात इसकी कि डिफेंस मिनिस्टर सरकार नहीं हैं, तो ये भी जब निर्मला सीतारमण से मिलिएगा तो उन्हें बता दीजिएगा. वो शायद पूरी कैबिनेट, पूरे एनडीए के सांसदों को सरकार मानती होंगी. उन्हें नहीं पता होगा कि सरकार आप चला रहे हैं. वो शायद इस भ्रम में जी रही हों कि पार्टी में अब भी लोकतंत्र है. पार्टी विद अ डिफरेंस के दावे वाले लोग हैं. और फिर निर्मला सीतारमण जो बोलें वो भी किसी सार्वजनिक मंच पर बता दीजिएगा.

हर बात पर लोगों को पाकिस्तान चले जाने की सलाह देने वाले नेता क्या अब नितिन गडकरी को ये सलाह नहीं देंगे. उन्हें देशद्रोही का सर्टिफिकेट देने वाला कोई है क्या? खैर, यही राजनीति है. अच्छा-अच्छा गप गप और बुरा-बुरा थू थू. लेकिन ये अच्छी बात नहीं है.
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