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बिलकिस बानो के बलात्कारियों को कानून के तहत जेल से छोड़ गया - केंद्रीय मंत्री प्रह्लाद जोशी

"किसी के जेल में आवश्यक समय गुजारने के बाद रिहा होने का प्रावधान है"

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(बाएं-दाएं) प्रह्लाद जोशी और बिलकिस बानो. (तस्वीरें- ट्विटर और इंडिया टुडे)

बिलकिस बानो के बलात्कारियों को माफी देने के पक्ष में गुजरात सरकार तो कोर्ट में दलीलें दे ही रही थी कि अब केंद्र सरकार के एक मंत्री भी राज्य सरकार के इस फैसले का बचाव कर रहे हैं. प्रह्लाद जोशी. केंद्रीय कोयला, खान और संसदीय कार्य मंत्री. उन्होंने कहा है कि बिलकिस बानो का बलात्कार करने वाले 11 दोषियों को माफी 'कानूनी प्रावधान' के तहत ही दी गई है.

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बिलकिस बानो के बलात्कारियों को छोड़े जाने पर क्या बोले प्रह्लाद जोशी?

प्रह्लाद जोशी इस समय गुजरात में हैं. वहां विधानसभा चुनाव के मद्देनजर बीजेपी की ‘गुजरात गौरव यात्रा’ में हिस्सा ले रहे हैं. पार्टी का प्रचार कर रहे हैं. इस दौरान इंडियन एक्सप्रेस से बातचीत में केंद्रीय मंत्री ने कहा,

"जो भी हुआ (दोषियों को माफी) है वो कानून के तहत ही हुआ है. किसी के जेल में आवश्यक समय गुजारने के बाद रिहा होने का प्रावधान है. इस केस में उसी प्रावधान - जो पूरी तरह कानूनी है - का पालन किया गया है."

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प्रह्लाद जोशी केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार के पहले कैबिनेट मंत्री और वरिष्ठ बीजेपी नेता हैं जिन्होंने सार्वजनिक रूप से रेप और हत्या के इन 11 दोषियों को रिहा किए जाने के फैसले का बचाव किया है. अभी तक गुजरात और केंद्र में सत्तारूढ़ बीजेपी के नेता की ओर से इन अपराधियों को माफी मिलने और इनका सम्मान किए जाने को लेकर कोई बयान सामने नहीं आया था. केवल महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने एक बयान में इन अपराधियों का 'सम्मान' किए जाने को गलत बताया था.

उन्होंने कहा था,

"दोषी जेल में रहे हैं और उन्हें सुप्रीम कोर्ट के आदेश के तहत छोड़ा गया है. हालांकि, जेल से छूटने पर किसी भी अपराधी का सम्मान करना गलत है. अपराधी का सम्मान नहीं किया जा सकता."

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बता दें कि 3 मार्च, 2002 को दाहोद जिले के रंधिकपुर गांव में बिलकिस बानो का गैंगरेप हुआ था और उनकी 3 साल की बच्ची समेत परिवार के सात सदस्यों की हत्या कर दी गई थी. बिलकिस की 3 साल की बच्ची की हत्या उसे पटककर की गई थी. जब वारदात को अंजाम दिया गया था, तब बिलकिस बानो 5 महीने की गर्भवती थी. इस मामले के इन 11 लोगों को साल 2004 में गिरफ्तार किया गया था.

फिर अहमदाबाद में केस का ट्रायल शुरू हुआ. हालांकि, बिलकिस बानो ने आशंका जताई कि गवाहों को नुकसान पहुंचाया जा सकता है और केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) द्वारा एकत्रित सबूतों से छेड़छाड़ की जा सकती है. ऐसे में सुप्रीम कोर्ट ने अगस्त 2004 में इस केस को मुंबई ट्रांसफर कर दिया था.

मामले में 21 जनवरी, 2008 को मुंबई की एक विशेष सीबीआई अदालत ने 11 आरोपियों को दोषी पाया था और आजीवन कारावास की सजा सुनाई थी. बाद में बॉम्बे हाईकोर्ट ने उनकी सजा को बरकरार रखा.

15 अगस्त, 2022 को बलात्कारियों - जिनके नाम राधेश्याम शाह, जसवंत चतुरभाई नाई, केशुभाई वदानिया, बकाभाई वदानिया, राजीभाई सोनी, रमेशभाई चौहान, शैलेशभाई भट्ट, बिपिन चंद्र जोशी, गोविंदभाई नाई, मितेश भट्ट और प्रदीप मोढिया हैं - को गोधरा जेल से रिहा कर दिया गया. 

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