जब सब चमत्कार करने में पड़े हैं. मोदी जी से लेकर रिजर्व बैंक तक, तो एटीएम क्यों पीछे रहें. नए नोट क्यों पीछे रहें. बारिश में कलर छोड़ने और गांधी जी के चश्मे सहित गायब हो जाने के बाद नया शाहकार. भोपाल में स्टेट बैंक के एक एटीएम से पांच पांच सौ के नोट निकाले गए. उनमें एक तरफ प्रिंट ही नहीं था. एकदम सफेद. सेगांव के रहने वाले हैं हेमंत सोनी. एसबीआई के एटीएम गए थे कैश निकालने. डेढ़ हजार रुपए निकाले. सब पांच पांच सौ के नोट. लेकिन दो नोट चमत्कारी थे. उनमें एक तरफ कुछ भी लिखा पढ़ी नहीं थी. गांधी थे लेकिन लालकिला गायब हो गया. गांधी का गायब होना फिर भी समझा जा सकता है. वो कहीं उठकर चले गए होंगे. इतने सालों से नोटों में जमे रहकर बोर हो गए होंगे. लेकिन लालकिला? वो कहां चला जाएगा. https://www.youtube.com/watch?v=Z2bG8qTYJY4 बाबू साहब दौड़कर वहीं की मेन ब्रांच में पहुंचे. डिप्टी मैनेजर ने कहा कि नोट डिफेक्टिव नहीं हैं. सही तरीके से प्रिंट नहीं हुए हैं. पता नहीं और क्या होता तो डिफेक्टिव होते. अगर उसमें लालकिले की जगह स्टेच्यू ऑफ लिबर्टी की फोटो होती तो डिफेक्टिव माना जा सकता था. इसके पहले भी कमाल एमपी में ही हुआ था. नहीं, हम व्यापम की बात नहीं कर रहे. वहां 2000 के ऐसे नोट आए थे जिनमें गांधी जी की तस्वीर नहीं थी. इसको कोई कुछ भी कहे. निगेटिव लोग निगेटिव प्रचार भी करेंगे इसका. बल्कि ये ब्लैक मनी को व्हाइट करने की शुरुआत लग रही है. जो कि एक अच्छा प्रयास है. स्वागत किया जाना चाहिए.
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मुबारक हो, भोपाल में एटीएम से पहली बार 'व्हाइट मनी' निकली है
पूरा व्हाइट नहीं है लेकिन एक तरफ तो है. एसबीआई के एटीएम का पता लिख लीजिए.
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फोटो - thelallantop
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