NCERT की राजनीतिक विज्ञान की संशोधित किताबें बाजार में आ चुकी हैं. इनमें कई तरह के बदलाव किए गए हैं. बाबरी मस्जिद का नाम हटाए जाने से लेकर गुजरात दंगों और अयोध्या विवाद के संदर्भों को ‘कम पन्नों में सीमित’ किए जाने की चर्चा है. NCERT पर पाठ्यक्रम के ‘भगवाकरण’ का आरोप लग रहा है. इस पर NCERT के डायरेक्टर दिनेश प्रसाद सकलानी ने अपना पक्ष रखा था. अब AIMIM के अध्यक्ष और सांसद असदुद्दीन ओवैसी की प्रतिक्रिया आई है. उन्होंने 12वीं की इन किताबों में किए गए बदलावों को लेकर तंज कसा है.
असदुद्दीन ओवैसी ने NCERT को मारा ताना, बाबरी मस्जिद से लेकर गुजरात दंगों तक में हुआ है संशोधन
NCERT की 12वीं की किताब में Babri Masjid का नाम हटा दिया गया है. उसे 'तीन गुंबद वाली संरचना' कहा गया है. साथ ही नई किताब में अयोध्या विवाद के मुद्दे को संक्षेप में समेट दिया गया है.

किताबों में हुए बदलाव पर NCERT डायरेक्टर दिनेश प्रसाद सकलानी ने 16 जून को न्यूज एजेंसी PTI से बात की थी. उन्होंने गुजरात दंगों और बाबरी मस्जिद विध्वंस के संदर्भों को स्कूल की किताबों में संशोधित किए जाने पर कहा,
“हमें स्कूली किताबों में दंगों के बारे में क्यों पढ़ाना चाहिए? हम सकारात्मक नागरिक बनाना चाहते हैं, न कि हिंसक और अवसादग्रस्त व्यक्ति. क्या हमें अपने छात्रों को इस तरह से पढ़ाना चाहिए कि वे आक्रामक हो जाएं, समाज में नफरत पैदा करें या नफरत का शिकार बनें? क्या यह शिक्षा का उद्देश्य है? हिंसा के बारे में क्यों पढ़ाया जाना चाहिए? जब बच्चे बड़े होंगे, तो वे इसके बारे में जानेंगे. लेकिन स्कूल की किताबों में ऐसा नहीं करना चाहिए. उन्हें बड़े होने पर यह समझने दें कि क्या हुआ और क्यों हुआ, बदलावों के बारे में हंगामा अप्रासंगिक है.”
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अब NCERT डायरेक्टर के इसी बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए असदुद्दीन ओवैसी ने X पर लिखा,
"जो लोग इतिहास से सीखने में विफल रहते हैं वो इसे दोहराते हैं."
ये पहला मौका नहीं है जब ओवैसी NCERT की किताबों में हुए बदलावों पर सवाल उठा रहे हैं. वो NCERT के पाठ्यक्रम में हुए बदलावों का हवाला देते हुए सरकार पर आरोप लगा चुके हैं कि मोदी सरकार किताबों से मुगलों की तारीख को मिटा रही है.
वहीं दिनेश सकलानी ने कहा है कि किताबों में बदलाव सालाना संशोधन का हिस्सा हैं और इसे शोर-शराबे का विषय नहीं बनाया जाना चाहिए. उन्होंने कहा कि बदलावों का निर्णय विषय के विशेषज्ञों द्वारा किया जाता है और वो इस प्रक्रिया में निर्देश या हस्तक्षेप नहीं करते हैं. उनके मुताबिक NCERT राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) 2020 के अनुरूप स्कूली किताबों के पाठ्यक्रम को संशोधित कर रहा है.
क्या बदलाव हुए हैं?NCERT की किताबों में बाबरी मस्जिद का नाम हटा दिया गया है. उसे "तीन गुंबद वाली संरचना" कहा गया है. साथ ही नई किताब में अयोध्या विवाद के मुद्दे को कम पन्नों में समेट दिया गया है. इसके अलावा पहले के सिलेबस से कई बिंदु हटाए गए हैं. हटाए गए विवरणों में गुजरात के सोमनाथ से अयोध्या तक BJP की रथयात्रा, कारसेवकों की भूमिका, बाबरी मस्जिद विध्वंस के बाद सांप्रदायिक हिंसा, 1992 में BJP शासित राज्यों में राष्ट्रपति शासन और BJP के 'अयोध्या की घटनाओं पर खेद जताना' जैसे मुद्दे हैं.
किताब के नए संस्करण में अयोध्या विवाद पर सुप्रीम कोर्ट के फ़ैसले को जोड़ा गया है. इसके बाद इसमें अयोध्या विवाद पर सुप्रीम कोर्ट की संवैधानिक पीठ के 5-0 के फैसले का ज़िक्र भी किया गया है. बताया गया है कि 9 नवंबर, 2019 के फैसले ने मंदिर के लिए मंच तैयार किया, जिसका उद्घाटन इस साल जनवरी में हुआ.
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