हालांकि 3600 करोड़ की लागत से बनाए जा रहे शिवाजी स्मारक का सीधा विरोध ना कर के ओवैसी ने 'मराठी माणूस' से पंगा लेना टाल दिया. उन्होंने कहा कि वो इस स्मारक के खिलाफ़ नहीं हैं. इतिहास को याद करते हुए ये बात भी कही कि शिवाजी की सेना और प्रशासन में कई सारे मुस्लिम हुआ करते थे. लेकिन ये बात जताना भी नहीं भूले कि ऐसे उपक्रमों पर पैसे बरबाद करने की जगह उन पैसों को समाज की भलाई के कामों में लगाया जाए तो बेहतर. उन्होंने कहा, 'स्मारक बनाना अच्छा है लेकिन बाढ़ को रोकने के लिए क्या किया गया? कौन रोकेगा उसे?"मुंबई में इस साल की अपनी पहली चुनावी रैली में उनके भाषण की कुछ प्रमुख बातें ये रही:
- अगर वो जीत के आते हैं तो निगम के बजट का 21 परसेंट यानी 7,770 करोड़ रुपए मुसलमानों पर खर्च करेंगे. मुंबई की कुल आबादी का 21 प्रतिशत मुसलमानों का है.
- मुंबई के उर्दू स्कूलों में टीचर्स की भारी कमी है और बुनियादी ढांचा भी नदारद है. इस पर काम किया जाएगा.
- मुस्लिम-बहुल इलाके बेहराम बाग़ में मैटरनिटी हॉस्पिटल बंद पड़ा हुआ है. उसे खुलवाया जाएगा.
- मुस्लिम बहुल बस्तियों में सरकारी डिस्पेंसरियां ना के बराबर हैं. उनकी संख्या बढ़ाई जायेगी.
- बीएमसी के 37,000 करोड़ के बजट में मुस्लिमों के लिए अलग से फंड रखे जाने की उन्होंने जम के वकालत की.
ओवैसी ने दावा किया कि उनकी पार्टी किसी भी धर्म के खिलाफ़ नहीं है. हां, वो मुसलमानों के साथ हो रहे भेदभाव के लिए चिंतित हैं और मुस्लिमों के जायज़ हक के लिए लड़ाई लड़ते रहेंगे.यहां ये बताना दिलचस्प रहेगा कि ओवैसी के भाषण के दूसरे ही दिन सुप्रीम कोर्ट का ये स्टेटमेंट आया है, 'धर्म, जाति, नस्ल समुदाय या भाषा के आधार पर वोट मांगने के लिए की जाने वाली कोई भी अपील भ्रष्ट आचरण है.'
देखिये असदुद्दीन ओवैसी का लल्लनटॉप इंटरव्यू: https://www.youtube.com/watch?v=vPAANXU5tVM











