जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 हटाने के सरकार के फैसले को सुप्रीम कोर्ट ने बरकरार रखा. चीन का अब इस पर बयान आया है. चीन ने कहा है कि उसने कभी भी भारत के केंद्र शासित प्रदेश लद्दाख को मान्यता नहीं दी है. उसका कहना है कि अनुच्छेद 370 हटाने का फैसला भारत ने एकतरफा तरीके से लिया है और इसलिए चीन इसे नहीं मानता (China's reaction on SC decision on article 370).
धारा-370 हटाने पर SC का फैसला चीन को चुभा, अब किस हिस्से पर अपना दावा ठोक दिया?
Jammu-Kashmir से अनुच्छेद 370 को हटाने के फैसले को सुप्रीम कोर्ट द्वारा वैध करार दिए जाने पर China की प्रतिक्रिया आई है. जानिए लद्दाख को लेकर China ने क्या-क्या कहा?

चीनी विदेश मंत्रालय की प्रवक्ता माओ निंग ने बुधवार, 13 दिसंबर को कहा,
‘अनुच्छेद 370 पर इंडियन सुप्रीम कोर्ट का फैसला आया है. कोर्ट ने जम्मू-कश्मीर से केंद्र शासित प्रदेश लद्दाख को अलग करने के भारत सरकार के फैसले को बरकरार रखा है. चीन-भारत सीमा के पश्चिमी हिस्से पर जो हमारा दावा है, उसपर इस फैसले का कोई असर नहीं पड़ने वाला है.’
माओ ने आगे कहा कि भारत की अदालत का फैसला इस तथ्य को नहीं बदलता है कि चीन-भारत सीमा का पश्चिमी भाग हमेशा चीन का रहा है.
इससे पहले मंगलवार, 12 दिसंबर को भी माओ निंग ने इस मसले पर एक बयान दिया था. उन्होंने एक पाकिस्तानी पत्रकार के सवाल का जवाब देते हुए कहा था कि भारत और पाकिस्तान के बीच कश्मीर मुद्दा बातचीत के जरिए हल किया जाना चाहिए. आगे बोली थीं कि कश्मीर मुद्दे पर चीन की स्थिति स्पष्ट है, ये भारत और पाकिस्तान के बीच लंबे समय से चला आ रहा विवाद है और इसे संयुक्त राष्ट्र चार्टर, संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (यूएनएससी) के प्रस्तावों और द्विपक्षीय समझौतों के मुताबिक शांतिपूर्ण तरीकों से हल किया जाना चाहिए.
Pakistan इस मुद्दे पर क्या बोला?पाकिस्तान ने भी जम्मू-कश्मीर पर भारतीय सुप्रीम कोर्ट के फैसले को खारिज कर दिया. पाकिस्तान विदेश मंत्रालय की ओर से जारी बयान में कहा गया,
“जम्मू कश्मीर का विवाद एक अंतरराष्ट्रीय स्तर का विवाद है, जो सात दशकों से संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के एजेंडे में शामिल है. जम्मू कश्मीर को लेकर अंतिम फैसला संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के प्रस्तावों और कश्मीरी लोगों की उम्मीदों के अनुसार किया जाना है. भारत को कश्मीरी लोगों और पाकिस्तान की इच्छा के विरुद्ध इस पर एकतरफा निर्णय लेने का कोई अधिकार नहीं है.”
बयान में आगे कहा गया कि पाकिस्तान जम्मू-कश्मीर पर भारतीय सुप्रीम कोर्ट के फैसले को स्वीकार नहीं करता है. उसके मुताबिक भारतीय संविधान के तहत किसी भी प्रक्रिया का कोई कानूनी महत्व नहीं है. घरेलू कानूनों और न्यायिक फैसलों के बहाने भारत अंतरराष्ट्रीय दायित्वों से पीछे नहीं हट सकता. जम्मू कश्मीर को अपने साथ मिलाने की भारत की साजिश निश्चित रूप से असफल होगी.
ये भी पढ़ें:-Article 370 पर सुप्रीम कोर्ट का पूरा फैसला जानिए
बता दें कि 11 दिसंबर को सुप्रीम कोर्ट ने संविधान के अनुच्छेद 370 को समाप्त करने के केंद्र सरकार के फैसले को वैध ठहराया था. अपने फैसले में सुप्रीम कोर्ट की 5 सदस्यीय संविधान बेंच ने कहा कि भारत में विलय के साथ ही जम्मू-कश्मीर ने अपनी संप्रभुता छोड़ दी थी. बेंच ने अनुच्छेद 370 को अस्थाई व्यवस्था बताया और कहा कि जम्मू-कश्मीर देश के बाकी राज्यों की ही तरह है. अदालत ने जम्मू-कश्मीर में 30 सितंबर, 2024 तक विधानसभा चुनाव कराने का निर्देश भी दिया.
वीडियो: संसद के अंदर कब क्या हुआ, सांसदों की जुबानी समझिये पूरी कहानी













