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बृजभूषण शरण सिंह पर लगे आरोपों में कितना दम है?

महिला पहलवानों ने फेडरेशन के अध्यक्ष और भाजपा सांसद बृज भूषण शरण सिंह तथा कोचेज़ पर कैंप्स के दौरान यौन शोषण के आरोप लगाए हैं.

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सांकेतिक फोटो (साभार: आजतक)

>विनेश फोगाट - पहली भारतीय महिला पहलवान, जिन्होंने कॉमनवेल्थ और एशियन गेम्स - दोनों मुकाबलों में गोल्ड मेडल जीता.
>साक्षी मलिक - पहली भारतीय महिला पहलवान, जिन्होंने ओलंपिक मेडल जीता. साल था 2016, जगह रियो.
>बजरंग पुनिया - टोक्यो ओलंपिक्स में ब्रोंज़ जीतने वाले पहलवान.
>रवि दहिया - टोक्यो ओलंपिक्स में सिल्वर जीतने वाले पहलवान.

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ये चार और इनके जैसे सैंकड़ों पहलवानों को ट्रेनिंग करके दूसरे देशों के पहलवानों से जीतना था, और मेडल जीतने थे, नए पहलवान तैयार करने थे. लेकिन इन दिनों इनका वक्त अपनी ही फेडरेशन और सरकार से कुश्ती लड़ने में ज़ाया हो रहा है. जंतर मंतर पर प्रदर्शन चल रहा है. और बात सिर्फ रेसलिंग फेडरेशन ऑफ इंडिया के प्रशासकीय मामलों की ही नहीं है. महिला पहलवानों ने फेडरेशन के अध्यक्ष और भाजपा सांसद बृज भूषण शरण सिंह तथा कोचेज़ पर कैंप्स के दौरान यौन शोषण के आरोप लगाए हैं. जवाब में बृजभूषण सिंह का कहना है कि अगर आरोप साबित हो जाएं, तो उन्हें फांसी दे दी जाए.

देश के नामी खिलाड़ी अगर खेलने की जगह प्रदर्शन को मजबूर हो जाएं तो उस खेल और खेल के प्रशासन पर बात करना ज़रूरी हो जाता है. फिर पहलवानों के मामले में तो एक गंभीर अपराध का इल्ज़ाम भी लगा है. इसीलिए आज के दी लल्लनटॉप शो में हम भारतीय कुश्ती संकट की बात करेंगे. जानेंगे कि पहलवानों के आरोपों में दम है या फिर दूसरे पक्ष से लगाए गए इन आरोपों में, कि ये सब दरअसल दो लॉबीज़ की लड़ाई का नतीजा है. 

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पहलवान रेसलिंग फेडरेशन के खिलाफ हैं. लेकिन क्यों, पहले ये जानना ज़रूरी है. सबसे बड़ा आरोप तो विनेश फोगाट ने ही लगाया है. उनका कहना है कि कैंप के दौरान WFI अध्यक्ष बृजभूषण सिंह और कोचेज़ ने महिला पहलवानों का यौन शोषण किया. विनेश फोगाट ने कहा, 

“उन्हें जो किट दी जाती है, वो घटिया क्वालिटी की है. उन्होंने दावा किया कि इसकी शिकायत उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से भी की थी. उन्होंने आरोप लगाया कि नेशनल न खेलने पर बैन लगाने की धमकी दी जाती है.”

विनेश ने ये भी कहा कि उन्हें टोकयो ओलंपिक्स के वक्त से परेशान किया जा रहा है. अनुशासनहीनता के आरोप लगाए जा रहे हैं, क्योंकि वो आवाज़ उठाती हैं. जब प्रदर्शन हो रहा था, तब फेडरेशन के विनोद तोमर प्रदर्शनकारियों से बात करने गए, लेकिन बातचीत बेनतीजा ही रही. तब तोमर लौट गए. और उन्होंने कहा कि अगर पहलवान अपनी समस्याओं पर बात करना चाहते हैं, तो फेडरेशन दफ्तर आ जाए.

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जब विनेश का ये बयान प्रेस में चलने लगा, तो बृजभूषण सिंह ने अपना पक्ष भी रखा. उन्होंने कहा कि अगर उनपर लगे आरोपों में दम है, तो FIR क्यों नहीं की गई?
उन्होंने कहा,

"यौन उत्पीड़न की कोई घटना नहीं हुई है. अगर आरोप सच निकले तो मैं फांसी पर लटकने के लिए तैयार हूं. यौन उत्पीड़न बड़ा आरोप है. जब मेरा नाम ही इसमें घसीटा गया है तो मैं कैसे कार्रवाई कर सकता हूं? मैं जांच के लिए तैयार हूं. मैं विनेश फोगाट से पूछना चाहता हूं कि उन्होंने ओलंपिक में कंपनी के लोगो वाली पोशाक क्यों पहनी थी? मैच हारने के बाद मैंने उसे सिर्फ प्रोत्साहित किया है. क्या कोई सामने आ सकता है जो कह सके कि फेडरेशन  ने किसी एथलीट का उत्पीड़न किया है?'"

बृजभूषण ने ये भी कहा कि ये उनके खिलाफ कोई बड़ा उद्योगपति साज़िश कर रहा है. उन्होंने सवाल उठाया कि जो पहलवान फेडरेशन पर सवाल उठा रहे हैं, वो फेडरेशन के नियमों का पालन क्यों नहीं करते. नियमित रूप से ट्रायल्स में क्यों शामिल नहीं होते,  उन्होंने कहा,

“सारी समस्या तब शुरू होती है, जब हम कुछ नियम बनाते हैं और नीति में बदलाव करते हैं. कुछ खिलाड़ी नेशनल गेम्स नहीं खेलना चाहते. ट्रायल नहीं देना चाहते हैं कि सभी खिलाड़ी ट्रायल दें और नेशनल गेम्स में हिस्सा लें.' उन्होंने कहा कि कोई शिकायत है तो लिखित में देना चाहिए.”

बृजभूषण ने कई उदाहरण देकर साबित करने की कोशिश की, कि उन्होंने समय समय पर विनेश को कितना सपोर्ट किया. उन्होंने ये भी पूछा कि विनेश ने आधिकारिक किट की जगह एक दूसरी कंपनी की कॉस्ट्यूम में मुकाबला क्यों लड़ा. दरअसल विनेश ने ये भी कहा था कि जो किट दी जाती है, उसकी गुणवत्ता ठीक नहीं होती. ऐसे में पहलवान कम्फर्टेबल महसूस नहीं करते, और तब अगर उन्होंने कोई और कॉस्ट्यूम पहन ली, तो क्या गलत कर दिया.

ये तो बृजेश और विनेश के बीच बयानों का सिलसिला था. लेकिन विनेश के साथ कई नामी पहलवान भी प्रदर्शन के लिए आये थे. रवि दहिया ने भी एक बयान जारी करके पहलवानों के लिए समर्थन मांग लिया था. अंशु मलिक ने तो यहां तक कहा कि जब बृज भूषण टीम होटल में रुके होते हैं, तो महिला पहलवान मुकाबलों के बाद अपने कमरों में जाने से कतराती हैं. ये सब दिल्ली में हो रहा था, तो दिल्ली महिला आयोग की अध्यक्षा स्वाती मालीवाल ने एक बयान जारी कर दिया. और केंद्र को नोटिस भी भेजा.

वैसे खेल मंत्रालय 18 जनवरी को ही एक्टिव हो गया था. इस रोज़ केंद्रीय खेल मंत्रालय ने प्रदर्शन का संज्ञान लेते हुए WFI से जवाब तलब किया था. मंत्रालय ने WFI को 72 घंटों की डेडलाइन दी थी, जो 21 जनवरी को खत्म हो जाएगी. मंत्रालय ने ये भी कहा है कि अगर समयसीमा के भीतर WFI जवाब नहीं दे पाता, तो उसके खिलाफ नेशनल स्पोर्ट्स डेवलपमेंट कोड 2011 के तहत कार्रवाई की जाएगी. आज प्रदर्शनकारी पहलवानों से मिलने सरकार ने भी एक पहलवान को भेजा. कॉमनवेल्थ खेलों में गोल्ड समेत कई पदक जीत चुकीं पहलवान और भाजपा युवा मोर्चा की नेता बबीता फोगाट आज जंतर मंतर पहुंची. उन्होंने प्रदर्शनकारियों को संबोधित भी किया. क्या कहा, 

“मैं अपने खिलाड़ियों की इस लड़ाई में उनके साथ हूं. मुझे सरकार पर पूरा भरोसा है कि वह विश्व में देश का मान-सम्मान बढ़ाने वाले देश के खिलाड़ियों के साथ न्याय करेगी.”

संयोग की बात है कि बबीता के पिता और द्रोणाचार्य अवॉर्डी महावीर सिंह फोगाट भी प्रदर्शनकारियों के समर्थन में उतरे थे. उन्होंने क्या कहा, 

“उनकी भतीजी विनेश फोगाट और उनके साथी इस मुद्दे पर बातचीत के लिए मंत्रालय गए थे, जहां से थोड़ी देर पहले ही वो वापस लौटे हैं. उन्हें पता चला है कि आरोपी रेसलिंग फेडरेशन ऑफ इंडिया के अध्यक्ष बृज भूषण शरण सिंह को हटा दिया गया, जो कि सरकार का एक अच्छा कदम है.”

जब प्रदर्शन की खबरें सब तरफ छा गईं, तो प्रदर्शन स्थल पर सीपीएम नेता वृंदा करात पहुंची. लेकिन पहलवानों ने कहा, कि प्रदर्शन के मंच पर राजनेता न आएं. नेताओं को मंच से उतारने की बात चली, लेकिन नेतानगरी में हलचल तो मच चुकी थी. धड़ाधड़ विपक्षी पार्टियों ने पहलवानों के समर्थन में बयान जारी करने शुरू कर दिये.

ताप बढ़ा, तो सब सरकार की ओर देखने लगे. सरकार ने पहलवानों को मिलने भी बुलाया जिसके बाद सरकारी सूत्रों ने दावा किया कि पहलवान खुश हैं. लेकिन जब प्रेस कॉन्फ्रेंस हुई, तब पहलवानों ने साफ किया कि वो wfi अध्यक्ष के इस्तीफे के बिना पीछे नहीं हटेंगे. बार बार फेडरेशन का ज़िक्र आ रहा है. इसीलिए जानना ज़रूरी है कि फेडरेशन है क्या. तो भारतीय कुश्ती संघ की संरचना और उसके अध्यक्ष चुने जाने के नियमों पर बात करते हैं.  भारतीय कुश्ती संघ को संचालित करने के लिए एक बड़ी टीम होती है. जिसमें एक अध्यक्ष होता है. एक वरिष्ठ उपाध्यक्ष और 4 उपाध्यक्ष होते हैं. इसके अलावा एक-एक मानद महासचिव और मानद कोषाध्यक्ष भी होते हैं. कुश्ती संघ में 2 मानद संयुक्त सचिव भी होते हैं. WFI की वेबसाइट के मुताबिक कार्यकारी समिति के पदाधिकारियों और सदस्यों के चुनाव के लिए निर्वाचक मंडल होता है. जिसमें 26 राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों 51 सदस्य शामिल होते हैं. निर्वाचक मंडल में आमतौर पर राज्य कुश्ती संघ के अध्यक्ष और महासचिव होते हैं.

WFI संविधान के आर्टिकल IV के मुताबिक सभी राज्य कुश्ती संघ अपने दो प्रतिनिधियों को जनरल काउंसिल में भेज सकता है. हर प्रतिनिधि के पास एक वोट डालने का अधिकार होगा. इसके अलावा सभी केंद्रशासित प्रदेश के कुश्ती संघ के एक प्रतिनिधि को जनरल काउंसिल में भेजने का नियम है और उनको एक वोट का अधिकार है. हालांकि दिल्ली एक ऐसा केंद्रशासित प्रदेश हैं, जहां से दो प्रतिनिधि जनरल काउंसिल में भेजे जाते हैं और उन दोनों को एक-एक वोट डालने का अधिकार होता है. भारतीय कुश्ती संघ के चुने गए पदाधिकारियों के लिए एक नियम ये भी है कि अध्यक्ष, महासचिव या कोषाध्यक्ष का पद धारण करने वाला कोई भी सदस्य किसी दूसरे खेल महासंघ में हिस्सा नहीं ले सकता. हालांकि इनको IOA यानी Indian Olympic Association. में शामिल होने की छूट होती है.

भारतीय कुश्ती संघ की जनरल काउंसिल की बैठक में ही अध्यक्ष का चुनाव होता है, जो कि 4 साल में एक बार होती है. साल 2019 में भी  ये बैठक हुई जिसमें बृजभूषण सिंह निर्विरोध अध्यक्ष चुने गए. 2019 में वो तीसरी बार इस पद तक पहुंचे. उत्तर प्रदेश के गोंडा जिले से ताल्लुक रखने वाले ब्रजभूषण सिंह राजनीति में माहिर होने के साथ-साथ कुश्ती के भी दांव-पेंच भी समझते हैं. युवाअवस्था दौरान वो कुश्ती के आयोजन कराया करते  थे. 80 के दशक में उन्होंने गोंडा में छात्र राजनीति मे अपनी पहचान बनायी और साल 1988 में बीजेपी में शामिल हो गए. राम मंदिर आंदोलन के दौरान उनकी उग्र हिंदुत्व वाली छवि ने उन्हें काफी पहचान दिलाई. आपको जानकारी के लिए बता दें कि बृजभूषण सिंह उन 40 आरोपियों में से एक थे, जिन्हें 1992 में अयोध्या में विवादित ढांचा गिराने के लिए जिम्मेदार कहा गया था. हालांकि, लंबे समय तक कानूनी लड़ाई के बाद 30 सितंबर 2020 को कोर्ट ने उन्हें सभी आरोपों से बरी कर दिया.

साल 2009 का लोकसभा चुनाव में उन्होंने बीजेपी की जगह समाजवादी पार्टी के टिकट पर लड़ा और कैसरगंज सीट पर जीत भी दर्ज की. उसके बाद सपा से भी उनकी राहें अलग हो गईं. 2014 चुनाव से पहले बृजभूषण फिर बीजेपी में शामिल हो गए. 2014 और 2019 में वे बीजेपी के टिकट पर चुनाव लड़े और लोकसभा पहुंचे. पहलवानी से राजनीतिक में आए ब्रजभूषण 6 बार लोकसभा चुनाव जीत चुके हैं. बृजभूषण के आने के बाद कुश्ती में क्या बदलाव आए-

1. रेसलिंग फेडरेशन के अध्यक्ष ने इस सारे फसाद की जड़ उन नियमों को बताया है जिसके तहत ओलंपिक खेलने के लिए सभी खिलाड़ियों को ट्रायल से गुजरना जरूरी है. 
2. कोई भी राज्य नेशनल में एक से ज्यादा टीम नहीं भेज सकता. ओलंपिक में सबसे ज्यादा टीमें हरियाणा, रेलवे और सेना से भेजी जाती थीं. 

वीडियो: देश के बड़े पहलवान जिन WFI अध्यक्ष बृजभूषण शरण सिंह के खिलाफ खड़े, वो हैं कौन?

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