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पंजाब में आप की उम्मीदोंं को बड़ा झटका

नए ओपिनियन पोल में चौंकाने वाले रिजल्ट.

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फोटो - thelallantop
पंजाब की अगली सरकार अधर में लटकी हो सकती है. मतलब, न इस पार, न उस पार. लेकिन अरसे बाद कांग्रेस के लिए बांछें खिलने वाली खबर आ रही है. 'इंडिया टुडे-एक्सिस' के ओपिनियन पोल के मुताबिक,  अगर अभी चुनाव हुए तो पंजाब में कांग्रेस सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभर सकती है, लेकिन किसी को बहुमत मिलने की संभावना नहीं है. ओपिनियन पोल के मुताबिक, कैप्टन अमरिंदर सिंह सबसे लोकप्रिय मुख्यमंत्री कैंडिडेट हैं. दूसरे नंबर पर अरविंद केजरीवाल की आम आदमी पार्टी रहेगी. इस वक्त सत्ता में चल रहे शिरोमणि अकाली दल और BJP गठबंधन की हालत सबसे पतली होगी. इसके मुताबिक,  117 सीटों वाली पंजाब असेंबली में किसी भी पार्टी को बहुमत मिलता नहीं दिख रहा. इस ओपिनियन पोल से AAP को बड़ा झटका लगा है,  जिसके 6 महीने पुराने सर्वे में क्लीन स्वीप करने का अंदाजा था. वो सर्वे 'हफपोस्ट-सी वोटर सर्वे' ने  करवाया था. इसमें AAP को 94 से 100 सीटें मिलती दिख रही थीं. अब लग रहा है कि इन 6 महीनों में AAP की हालत पंजाब में कमजोर हुई है और कांग्रेस को बड़ा फायदा हुआ है. 1

कौन पीटेगा कितनी सीटें

कांग्रेस 49 से 55 सीट पा सकती है. AAP के खाते में 42 से 46 सीट जाती दिख रही हैं. और SAD-BJP मिलकर 17 से 21 सीट पर ही निपटते दिख रहे हैं. कुछ एक छोटे-छोटे ग्रुप्स भी 3 से 7 सीट निकाल ले जाएंगे. ऐसे आसार बने हैं.

कित्ता वोट पाएंगे 

कांग्रेस 33 परसेंट के साथ सबसे आगे. AAP बस जरा सा चूकती दिख रही है. उसे 30 परसेंट वोट मिलने के आसार हैं. SAD-BJP को 22 परसेंट वोट मिल सकते हैं. बाकी टुटपुंजिया पार्टी भी 15 परसेंट तक वोट निकाल ले जाएंगीं.

ड्रग्स इस बार रहेगी बड़ा मुद्दा

ओपिनियन पोल में हिस्सा लेने वाले 76 परसेंट लोग मानते हैं कि ड्रग्स पंजाब की सबसे बड़ी प्रॉब्लम है. इनमें से 80 परसेंट ये भी मानते हैं कि इस प्रॉब्लम से न निपट पाने के लिए पंजाब सरकार और नेता जिम्मेदार हैं. करीबन 60 परसेंट से ज्यादा पार्टिसिपेट करने वाले ड्रग प्रॉब्लम के साथ ही 19 अलग-अलग मुद्दों पर स्टेट की सरकार के काम से नाखुश दिखे.

पंजाब में खेती के बुरे हाल

पंजाब में पिछले कई सालों से किसानों की खुदकुशी के वाकये सामने आ गए हैं. ओपिनियन पोल में पार्टिसिपेट करने वाले 65 परसेंट से ज्यादा लोगों ने स्टेट की फसल बीमा योजना को लेकर असंतोष जताया. न्यूनतम समर्थन मूल्य यानी MSP और फसलों के पेमेंट को लेकर भी 55 फीसदी पार्टिसिपेट करने वाले खुश नहीं दिखे. 65 परसेंट से ज्यादा पार्टिसिपेट करने वालों ने स्टेट में होने वाली फसल बीमा योजना को लेकर असंतोष जताया.

SAD-BJP की सत्ता से विदाई तय?

पंजाब में फिजा SAD-BJP गठबंधन के खिलाफ बनती नजर आ रही है. जबकि पंजाब में पिछले दो चुनाव से SAD-BJP गठबंधन ही बाजी मारता नजर आ रहा है. लेकिन इस ओपिनियन पोल के मुताबिक, अब पंजाब के लोग इनको सत्ता से रुखसत करने का मन बना चुके हैं. 61 से 71 परसेंट लोग मानते हैं कि अब SAD-BJP गठबंधन की विदाई होनी चाहिए.

कास्ट इक्वेशन भी है बड़ा अहम

जित्ती पॉपुलेशन है पंजाब की उसके हिसाब से पंजाब में सबसे ज्यादा अनुसूचित जातियां हैं. 2011 की जनगणना के हिसाब से स्टेट की 2.70 करोड़ की आबादी में जातियों के लोग 32 परसेंट हैं. ओपिनियन पोल के रिजल्ट के हिसाब से कांग्रेस को अनुसूचित जाति के सिखों और हिंदुओं में से 35 परसेंट वोट मिलने वाले हैं. जहां तक अगड़ी जातियों के सिखों का सवाल है तो कांग्रेस को उनके 30 परसेंट वोट मिलते दिख रहे हैं. वहीं अगड़ी जातियों के 38 परसेंट हिंदू कांग्रेस के फेवर में हैं. OBC के 35 फीसदी हिंदू और 29 फीसदी सिख कांग्रेस के साथ हैं. ओपिनियन पोल के मुताबिक केजरीवाल की आम आदमी पार्टी को OBC सिखों के मामले में कांग्रेस पर हल्की बढ़त मिल रही है. AAP को OBC सिखों के 30 फीसदी वोट मिल रहे हैं. अगड़ी जातियों के हिंदुओ में AAP को 26 परसेंट वोट मिलने वाले हैं. वहीं इस पार्टी को अगड़ी जाति के सिखों के 29 फीसदी वोट मिलने का अनुमान है.

SAD की सबसे बुरी हार हो सकती है इस बार

पंजाब के एक-तिहाई किसान और पेशेवर लोग कांग्रेस के साथ हैं. ओपिनियन पोल के मुताबिक छोटे दुकानदारों और श्रमिकों में 35 फीसदी से ज्यादा का समर्थन कांग्रेस को मिल रहा है. वहीं, AAP को 37 परसेंट स्टूडेंट और 34 परसेंट बेरोजगारों का साथ मिल रहा है. पारंपरिक किसानों से कांग्रेस को समर्थन मिल रहा है पर SAD भी ज्यादा पीछे नहीं है. ओपिनियन पोल के नतीजों से पता चलता है कि पंजाब के 30 परसेंट किसान अब भी SAD के साथ डटे हुए हैं. पंजाब का हालिया चुनावी इतिहास देखे तो SAD को सबसे बुरी हार का सामना 2002 में करना पड़ा था. तब इस पार्टी को सिर्फ 41 सीट मिली थीं. इस बार ये वाला रिकॉर्ड भी टूट सकता है.

वोट शिफ्ट में सबसे ज्यादा नुकसान झेलने वाला है SAD-BJP

2014 लोकसभा चुनाव के बाद से सत्तारूढ़ SAD-BJP गठबंधन के वोट शेयर से 22 फीसदी वोट छिटक कर AAP के पाले में चले गए हैं. वहीं इस गठबंधन के 19 फीसदी वोट कांग्रेस की ओर भी शिफ्ट हुए हैं. जहां तक कांग्रेस का सवाल है तो वो 2014 लोकसभा चुनाव के अपने 74 फीसदी वोट अपने साथ रखने में कामयाब नजर आ रही है. वहीं AAP का अपने 80 परसेंट वोटों पर कब्जा बरकरार है.

सर्वे कैसे किया गया?

ओपिनियन पोल के लिए सारी 117 असेंबली सीटों में बंटे पंजाब के 6,552 लोगों से मिलकर तमाम मुद्दों राय और नेताओं के लिए उनकी पसंद को जाना गया. इसके हिसाब से फिर एनालिसिस हुआ और फिर आया रिजल्ट.
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