इंडोनेशिया में एनिमल क्रूअल्टी करते हुए गुप्ता जी.
बचपन में एक गाना सुना था. बॉलीवुड के बड़े वाले खिलाड़ी और राष्ट्रवादी एक्टर अक्षय कुमार थे उसमें. नाचते-नाचते ममता कुलकर्णी को जबरदस्ती चूम लिया और होठों से ख़ून निकाल दिया था. गा रहे थेः
ज़हर है कि प्यार है तेरा चुम्मा
कैसा ये ख़ुमार है तेरा चुम्मा
मैंने देखा नहीं तेरे जैसा कोई
मुझको तेरे सर की कसम...
चुम्मा ज़हर कैसे हो सकता है, ये समझने में बरसों लग गए. जवानी आई. ब्रेकअप हुए तो समझ में आया कि कैसे? वैसे सत्ता भी ज़हर ही है. ये बात खुद कांग्रेस के युवराज राहुल गांधी भी बहुत पहले कह चुके हैं. आज गुप्ता जी आपने भी इस ज़हर को पी ही लिया. ख़ुदा जाने, इसे पीने (या पाने) के लिए आपने कितनी कीमत चुकाई होगी.
सत्ता ऐसा जहर है, जिसे पीने के लिए क्या गुप्ता जी और क्या डॉक्टर साहब, हर कोई बैचेन रहता है. फिलहाल आज बात करते हैं सिर्फ गुप्ता जी. जी हां, अपने आम आदमी पार्टी वाले सुशील गुप्ता साहेब. उनको जुम्मा जुम्मा चालीस दिन भी नहीं हुए कांग्रेस का हाथ छोड़कर आम आदमी पार्टी की झाडू पकड़े हुए. मेडिकल कॉलेज चलाते हैं. और समाजसेवी हैं. वैसे भी अपने देश में हर मेडिकल कॉलेज चलाने वाला समाजसेवी ही होता है. यहां व्यापमं की बात नहीं करेंगे. वहां भी खूब समाजसेवा हुई है. शिवराज में रामराज है. ख़ैर, गुप्ता जी सेल्फी के ऐसे भूखे हैं कि हर मौके पर झपट ही लेते हैं. वैसे उनसे बेहतर कौन जानता है कि किसमें मुनाफा चोखा है.

दो बरस पहले गुप्ता जी इंडोनेशिया गए तो खूब सेल्फी ली. उन्हें क्या पता था कि वो फोटो अब सोशल मीडिया के थकेलों के काम आएंगी. प्रिय गुप्ता जी तत्काल प्रभाव से अपने फेसबुक की सेटिंग चेंज कर लो, वरना एफबी के ये थकेले आपकी फोटोज़ को चुन चुन कर
मिस यूज़ करेंगे. जैसे आपने राजनीति को किया. 'दिल है कि मानता नहीं' की तर्ज पर एक सवाल मन में उफान मार रहा है. आप 2013 में मोतीनगर दिल्ली से कांग्रेस के टिकट पर चुनाव लड़े. बरसों तक कांग्रेस की सेवा करने के बाद अचानक से आप की सेवा करने का मन में कैसे प्रिय विचार आया? कुछ तो
लालच मजबूरियां रही होंगी, वरना ऐसे ही कोई बेवफा थोड़े हो जाता है.

उधर, आपकी पुरानी पार्टी के अजय माकन साहब आपकी पोल ऐसे खोल रहे हैं, जैसे ब्रेकअप के बाद कोई प्रेमी अपनी प्रेमिका को बदनाम करता है. ख़ैर, आपको खोजने में हम मीडियावालों को बड़ी मेहनत करनी पड़ी. गूगल पर ज्यादा जानकारी मिली ही नहीं. शुक्र है फेसबुक पर आप भयानक एक्टिव हैं तो आपकी प्रोफाइल और फोटो प्राप्त हो सकीं.

सुनने में तो ये भी आ रहा है कि आप कांग्रेस से चुनाव लड़ना चाह रहे थे. बैटिंग भी खूब की थी. लेकिन चंदा भी किसी काम न आया. लेकिन सुनी-सुनाई बातों का अब क्या भरोसा करें जी. बस इत्ती सी दुआ है कि जब ये ज़हर आपने पी ही लिया है और आप समाजसेवी तो हैं ही, तो राज्यसभा में दिखा ही दीजिएगा सबको कि आप कौन हैं. अच्छा जी! अरविंद केजरीवाल प्रणाम.
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