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चाचा ने 8 महीने की बच्ची का बेरहमी से किया रेप, प्राइवेट पार्ट्स में घाव

3 घंटे चली बच्ची की सर्जरी.

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ग्रेटर नोएडा में एक बच्ची के साथ रेप की घटना सामने आई है.
दुनिया भरोसे पर चल रही है. मगर समाज में कुछ वाकये ऐसे हो रहे हैं, जिनसे ये भरोसा टूट ही नहीं रहा. छिन्न-भिन्न हो रहा है. दिल्ली के शालीमार बाग इलाके में ऐसा ही एक मामला हुआ है. दरिंदगी हुई है. एक 8 महीने की बच्ची के साथ. की भी उसके ही एक रिश्तेदार ने है. चाचा पर आरोप लगा है. दरअसल, हुआ यूं कि बच्ची के पिता जोकि एक मजदूर हैं वो काम पर गए हुए थे. उसकी मां भी आसपास के घरों में साफ-सफाई के काम पर गई थी. बच्ची को रिश्तेदारों के भरोसे छोड़ृ गई थी. मां लौटी तो उसने देखा कि बच्ची खून से लथपथ है. दर्द से चिल्ला रही है. रिश्तेदारों से पूछा तो टालमटोल करने लगे. बच्ची को अस्पताल ले जाया गया, जहां पता चला कि बच्ची के साथ रेप हुआ है.
जिस शख्स पर इस बच्ची के साथ दरिंदगी का आरोप लगा है वो 28 साल का आदमी है. शादीशुदा है. दो बच्चे हैं. पुलिस ने परिवारवालों की शिकायत पर उसे गिरफ्तार कर लिया है जहां उसने अपना अपराध स्वीकार लिया है. उधर, बच्ची की हालत नाजुक बनी हुई है. वो दिल्ली के कलावती सरन अस्पताल में भर्ती है. बच्ची के मां-बाप से जो भी मिल रहा है, वो उससे आरोपी को सख्त से सख्त सजा दिलवाने की गुहार लगा रहे हैं.
रेप का आरोपित गिरफ्तार हो गया है.
रेप का आरोपी गिरफ्तार हो गया है.

3 घंटे चली बच्ची की सर्जरी
मामले में दिल्ली महिला आयोग और बाल कल्याण आयोग की टीमें भी एक्टिव हो गई हैं. दोनों अस्पताल पहुंचीं और बच्ची की हालत देखी. साथ ही पैरंट्स से बातचीत की. दिल्ली महिला आयोग की चीफ स्वाति मालीवाल का कहना है कि वह शॉक में हैं कि कैसे बच्चियों की आवाज अनसुनी की जा सकती है. उन्होंने बताया कि 8 महीने की बच्ची की 3 घंटे तक सर्जरी हुई. उसके प्राइवेट पार्ट में चोटें आईं हैं. बच्ची लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर है. उन्होंने मामले में दोषी को फांसी देने की वकालत की है.
स्वाति का कहना है कि आयोग पिछले दो साल से मांग कर रहा है कि रेपिस्ट को 6 महीने में फांसी दी जाए. कार्रवाई तेज करने के लिए पुलिस संसाधन बढ़ाए जाएं. केंद्र सरकार विमिन सेफ्टी को लेकर फौरन एक हाई लेवल कमिटी बनाए. इसमें एलजी, केंद्र, राज्य सरकार, दिल्ली पुलिस और दिल्ली महिला आयोग शामिल हो. मगर इन मांगों पर कोई पहल नहीं हुई. परिवार की आर्थिक मदद भी की गई है. बच्ची के परिवार की माली हालत देखते हुए दिल्ली महिला आयोग ने अदालत में अंतरिम मुआवजे के लिए ऐप्लिकेशन दी थी, जिस पर स्पेशल पॉक्सो कोर्ट ने 75 हजार मुआवजा दे दिया. आयोग ने भी 50 हजार रुपये मदद की बात कही है. साथ ही वो मीटिंग कर इस मामले में जल्द कोई कार्रवाई कर सकती है.


घटना से हर कोई हैरान है. सकते में है. चाहे वो पीड़ित के आसपास रहने वाले लोग हों या जिस अस्पताल में बच्ची का इलाज चल रहा है, वहां का स्टाफ. हर कोई मामले के दोषी पर सख्त से सख्त कार्रवाई की मांग कर रहा है. कार्रवाई होनी भी चाहिए. बच्ची की मां तो इस घटना से गहरे सदमे में है. उनका कहना है कि अब वो कोई काम नहीं करेंगी. अपने बच्चों को एक मिनट भी अपनी आंखों से दूर नहीं रहने दूंगी. पिता का तो बस यही कहना है कि उन्हें कुछ भी नहीं चाहिए, बस इंसाफ दिला दो. उन्हें इंसाफ मिलना ही चाहिए. क्योंकि इस घटना से बुरा कुछ भी नहीं हो सकता. ये उस बच्ची पर ही नहीं, पूरे समाज पर आघात है. ऐसे मामले में अगर ढील दी गई तो ये पूरे समाज के साथ अन्याय होगा.


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