ओमान में फंसे 14 भारतीयों ने वीडियो के जरिए अपनी समस्या बताई है और मदद मांगी है.
ओमान के मस्कट में फंसे 14 भारतीयों ने विदेश मंत्री सुषमा स्वराज, पीएम मोदी, राहुल गांधी, राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत और अन्य से मदद की गुहार लगाई है. उन्होंने वीडियो संदेश के जरिए अपनी समस्या बताई है. उनका कहना है कि घर की आर्थिक स्थिति खराब होने के कारण काम की तलाश में ओमान चले गए. कंपनी ने एक साल तक उनका ख्याल रखा, सैलरी देती रही, लेकिन पिछले एक साल से कंपनी ने सैलरी देना बंद कर दिया है. इन लोगों का कहना है कि उनकी आर्थिक स्थिति खराब है. उन्हें खाना पीना भी नहीं मिल रहा है. वे जहां रह रहे हैं वहां बिजली भी नहीं है. इनका कहना है कि वे अपनी समस्या लेकर इंडियन एंबेसी में गए थे, लेकिन कोई रिस्पॉन्स नहीं मिला. एक व्यक्ति अपनी समस्या बताते हुए रोने लगता है. इन लोगों की अपील है कि इन्हें कैसे भी करके इंडिया वापस बुला लिया जाए. इन्होंने पीएम मोदी, विदेश मंत्री सुषमा स्वराज और राहुल गांधी ने निवेदन किया है कि उन्हें इंडिया बुलाने के लिए कदम उठाए जाएं. इस मामले से संबंधित वीडियो, फोटो और नेताओं को लिखे गए पत्र हमें दी लल्लनटॉप के एक पाठक ने मेल के जरिए भेजे.
क्या है मामला
ये 14 भारतीय 2015 में नौकरी के लिए ओमान गए थे. दो साल पूरे होने पर 2017 में इन लोगों ने कंपनी के अधिकारियों से भारत भेजने के लिए कहा. कंपनी के अधिकारियों ने मस्कट में ही वीजा बढ़ाने की बात की और कहा कि उन्हें भारत जाने की जरूरत नहीं है. लेकिन कंपनी ने न तो वीजा का समय बढ़ाया न ही इन लोगों को भारत भेजा. अब इन लोगों को सैलरी नहीं मिल रही है. कंपनी के मालिक फरार हो गए हैं. और इन लोगों का पासपोर्ट अपने पास रख लिया है. सोशल मीडिया पर मदद की गुहार वाला वीडियो आने के बाद इंडियन एंबेसी का जवाब आया है. एंबेसी ने 13 अप्रैल को रिप्लाई किया,
एंबेसी इन वकर्स के संपर्क में है. उन्हें सहायता और जरूरी निर्देश दिए जा रहे हैं. एंबेसी इस मामले से संबंधित संस्थाओं के संपर्क में है.

ट्विटर पर लोगों ने पीएम मोदी, विदेश मंत्री और कई मीडिया संस्थाओं को टैग करते हुए ओमान में फंसे भारतीयों के लिए मदद की गुहार लगाई है. मस्कट में फंसे 14 लोगों में से तीन चूरू के रहने वाले हैं. इनके अलावा 11 लोग पंजाब, केरल, उत्तरप्रदेश, उड़ीसा, आंध्रप्रदेश, पश्चिम बंगाल और तमिलनाडु के हैं. इन लोगों का कहना है कि ईमेल के माध्यम से विदेश मंत्री सुषमा स्वराज से मदद मागी गई थी लेकिन किसी तरह की कोई हेल्प नहीं मिली. एंबेसी के ट्वीट के बाद उम्मीद की जानी चाहिए कि इन लोगों को जल्द ही मदद मिलेगी और ये भारत लौट सकेंगे.
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