आपके फोन पर मैसेज आया कि बैंक ने आपके अकाउंट से 3.35 लाख रुपये काट लिए और आपको वजह ही पता ना हो. फिर तो होश उड़ने ही हैं. एक एडवोकेट कपल के साथ ऐसा ही हुआ. इससे पहले कपल के जॉइंट अकाउंट में 1.09 लाख रुपये आने थे, लेकिन बैंक ने ये रकम गलती से किसी दूसरे के खाते में जमा कर दी. बैंक ने मसला हल नहीं किया, तो मामला कोर्ट पहुंचा. कंज्यूमर कमीशन ने बैंक की सेवा में कमी मानते हुए बैंक को 2.29 लाख रुपये पीड़ित कपल को देने का आदेश दिया.
बैंक ने गलती से किसी और के खाते में पैसे डाले, अब कोर्ट ने अकाउंट होल्डर को 2.29 लाख दिलाए
पीड़ित कपल ने शिकायत में कहा कि उनके क्लाइंट ने चार बार में कुल 1.09 लाख रुपये भेजे, जिसे यूनियन बैंक ऑफ इंडिया ने उनके अकाउंट के बजाय किसी और के खाते में जमा कर दिया. बैंक ने पैसे वापस करने का भरोसा दिया, लेकिन नहीं किए.

मामला तेलंगाना के वारंगल का है. 56 साल और 55 साल की उम्र वाले एडवोकेट कपल ने वारंगल डिस्ट्रिक्ट कंज्यूमर कमीशन में यूनियन बैंक ऑफ इंडिया के खिलाफ एक शिकायत दी. कपल ने बताया कि उनका यूनियन बैंक में एक जॉइंट खाता है, और एक जॉइंट प्रॉपर्टी टर्म लोन अकाउंट है. उन्होंने बैंक की तरफ से की गई ज्यादती कमीशन को बताई.
कमीशन ने क्या कहा?वारंगल डिस्ट्रिक्ट कंज्यूमर कमीशन के प्रेसिडेंट जी नागराजू और मेंबर वी जनार्दन रेड्डी ने पूरा मामला सुना, और कपल के हक में फैसला सुनाया. इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, 24 अगस्त के ऑर्डर में कमीशन ने कहा,
बैंक पर हर्जाना लगा"विपक्षी पार्टी (यूनियन बैंक ऑफ इंडिया) ने शिकायत करने वालों के सेविंग अकाउंट से 1.09 लाख रुपये किसी तीसरे व्यक्ति के खाते में जमा करके जो अनऑथराइज्ड ट्रांजैक्शन किया, वो विपक्ष पार्टी की लापरवाही और गलत ट्रेड प्रैक्टिस की वजह से हुआ. इस वजह से शिकायत करने वालों को बहुत परेशानी हुई."
कंज्यूमर कमीशन ने बैंक को सर्विस में कमी और उसकी अनफेयर ट्रेड प्रैक्टिस के लिए मानसिक उत्पीड़न के मुआवजे के तौर पर 1 लाख रुपये देने का आदेश दिया. कमीशन ने बैंक से कहा कि जो 1.09 लाख रुपये किसी और के खाते में डाले, उसे कपल के खाते में जमा किया जाए. मुकदमेबाजी के खर्च के लिए भी कमीशन ने बैंक को कपल को 10,000 रुपये देने का आदेश दिया.
क्या है पूरा मामला?कपल ने शिकायत में कहा कि उनके क्लाइंट ने चार बार में कुल 1.09 लाख रुपये भेजे, जिसे बैंक ने उनके अकाउंट के बजाय किसी और के खाते में जमा कर दिया. ये चार पेमेंट फरवरी और दिसंबर 2024 के बीच हुए. यूनियन बैंक ऑफ इंडिया को उसकी गलती के बारे में बताया गया. बैंक ने भरोसा दिया कि वो अपनी गलती ठीक करेगा, और कपल के पैसे वापस मिल जाएंगे. लेकिन, बैंक ने रकम वापस नहीं की.
पीड़ित कपल ने बैंक को लीगल नोटिस भेजा. इसके बाद भी बैंक ने कुछ नहीं किया. ना ही गलत ट्रांसफर पर कोई सफाई दी. पीड़ित को अदालती रास्ता अख्तियार करना पड़ा. कंज्यूमर कमीशन में शिकायत दर्ज की गई.
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कपल ने यह भी बताया कि फरवरी 2025 में उन्हें वॉट्सऐप मैसेज मिला. मैसेज में लिखा था कि बैंक ने उनके सेविंग अकाउंट से 3.35 लाख रुपये काट लिए. कपल ने दावा किया ये रकम उन्हें बिना बताए काटी गई. बैंक ने कहा कि सिस्टम गलती से 57.80 लाख रुपये के लोन पर कम ब्याज काटा जा रहा था, जिसकी पूर्ति के लिए ये पैसा काटा गया. कमीशन ने माना कि इस मामले में भी बैंक उचित सबूत पेश नहीं कर पाया.
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