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इस साल CBSE की पढ़ाई पर हावी रही सफाई, जानें कब-कब बोर्ड को देना पड़ा क्लैरिफिकेशन

CBSE को मई 2026 से अब तक अपनी नई नीतियों और फैसलों को लेकर छह बार स्पष्टीकरण जारी करना पड़ा है. ऑनलाइन मार्किंग सिस्टम, नंबरों की गणना, तीन भाषा पॉलिसी, 10वीं के पासिंग मार्क्स और कक्षा 9 के सिलेबस में बदलाव जैसे मुद्दों पर विवाद और भ्रम की स्थिति बनी.

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सीबीएसई ने बोर्ड परीक्षा के सिलेबस में बदलाव किया है. (सांकेतिक- Courtesy: India Today)

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  • सेंट्रल बोर्ड ऑफ सेकेंड्री एजुकेशन (CBSE) ने 2026-27 के लिए कक्षा 9 के सिलेबस से तीन विषय हटाकर कुल पढ़ाई जाने वाली विषयों की संख्या नौ कर दी है।
  • 2026 में CBSE में ऑन-स्क्रीन मार्किंग सिस्टम, तीन भाषा पॉलिसी, और कई क्लियरेंस जारी करने की वजह से विवाद और नेतृत्व परिवर्तन जैसे कई घटनाएं हुईं।
  • बोर्ड ने 2026-27 में बदलावों के बाद छात्रों के लिए सिलेबस में आवश्यक समायोजन किए हैं, और क्लास 10 के टेंटेटिव टाइमटेबल को अभी तक जारी नहीं किया गया है।

सेंट्रल बोर्ड ऑफ सेकेंड्री एजुकेशन (CBSE) के लिए 2026 का साल ‘सफाई देने’ का साल रहा. एक नहीं. दो नहीं. कुल 6 बार CBSE को अपने बदलावों और नई पॉलिसी को लेकर क्लैरिफिकेशन जारी करना पड़ा. कई फैसले जांच के दायरे में आए. इस वजह से लीडरशिप तक बदली. नए चेयरपर्सन आए. इन सबका असर CBSE के सिस्टम पर भी पड़ा. अक्टूबर बीत गया लेकिन बोर्ड ने अभी तक क्लास 10 और क्लास 12 का टेंटेटिव टाइमटेबल जारी नहीं किया. पिछले साल तक ये काम सितंबर में हो जाता था. इस साल अब तक नहीं हुआ और CBSE ने इस देरी का कारण भी नहीं बताया.

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इन सबके बीच भी बोर्ड में बदलावों का काम नहीं रुक रहा. ताजा जानकारी 29 अक्टूबर को आई. CBSE ने 2026-27 क्लास-9 बैच के लिए अपनी ‘स्कीम ऑफ स्टडीज’ में बदलाव किया है. इसमें कोर्स से तीन सब्जेक्ट्स हटा दिए गए हैं. नए बदलावों के बारे में बोर्ड ने फिर से क्लैरिफिकेशन जारी किया है और बताया है कि ये बदलाव छात्रों के लिए क्यों जरूरी हैं. हालांकि, इस साल CBSE की ये कोई पहली सफाई नहीं है. इससे पहले मई 2026 से लेकर अब तक 6 बार बोर्ड को कटघरे में आकर जवाब देना पड़ा है. बारी-बारी से जानते हैं.

ऑनलाइन मार्किंग सिस्टम का विवाद

सबसे ज्यादा विवाद ‘ऑनलाइन मार्किंग सिस्टम’ (OSM) को लेकर हुआ. मई 2026 में बोर्ड ने कक्षा 12 की कॉपियों की जांच के लिए नया ऑन-स्क्रीन मार्किंग (OSM) सिस्टम लागू किया. इसमें स्टूडेंट्स की आंसर शीट की स्कैन की हुई कॉपी को एग्जामिनर फिजिकल आंसर बुक के बजाय कंप्यूटर पर चेक करते हैं. इस सिस्टम को लेकर छात्रों ने शिकायतें कीं और कई सवाल उठाए.

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बचाव में बोर्ड ने बताया कि OSM प्रोसेस इंसानी गलतियों को कम करने और रिजल्ट प्रोसेसिंग में तेजी लाने के लिए डिजाइन किया गया है. बोर्ड ने आगे कहा कि जिन छात्रों को अपने नंबरों से संतुष्टि नहीं है, वो अपनी कॉपियों का वेरिफिकेशन और दोबारा जांच (री-इवैल्यूएशन) करा सकते हैं. हालांकि, इस विवाद ने राजनीतिक गलियारों में भी हलचल मचाई, जिसके बाद 2 जून को CBSE के चेयरमैन राहुल सिंह और सचिव हिमांशु गुप्ता का तबादला कर दिया गया. इतना ही नहीं, इसके बाद ऑन-स्क्रीन मार्किंग सर्विसेज की खरीद में हुई गड़बड़ियों की जांच भी शुरू की गई.

मार्क कैलकुलेशन पर सवाल 

बोर्ड ने छात्रों को अपनी कॉपी रीचेक कराने का ऑप्शन तो दे दिया, लेकिन यही उसके गले की फांस बी बन गया. छात्रों ने जब अपनी स्कैन की गई कॉपियां देखीं तो उन्हें नंबरों के हिसाब में गड़बड़ी नजर आई. छात्रों ने पाया कि कैलकुलेशन शीट में जो नंबर लिखा था वो लास्ट में दिए गए कुल नंबरों से अलग था. इस पर बोर्ड ने सफाई दी कि छात्रों ने अगर जरूरत से ज्यादा सवाल हल कर दिए होंगे तो एक तय नियम के हिसाब से ही उनके फाइनल नंबर जोड़े जाएंगे. बोर्ड के अनुसार, कई क्वेश्चन पेपर में इंटर्नल चॉइस होती हैं. स्टूडेंट्स को दिए गए ऑप्शन में से सिर्फ एक ही अटेम्प्ट करना होता है. लेकिन कई स्टूडेंट्स जरूरी संख्या से ज्यादा सवाल अटेम्प्ट करते हैं. 

CBSE ने बताया कि ऐसे हालात में, सिस्टम एक फिक्स्ड पॉलिसी फॉलो करता है. इसमें CBSE कैंडिडेट के सबसे अच्छे अंकों को गिनता है. बाकी के सवालों को ओवर अटेम्प्ट बताकर उनके नंबर फाइनल मार्क में ऐड नहीं करता है. बोर्ड ने ये भी साफ किया कि कोई भी सवाल या सब-पार्ट जो फाइनल स्कोर में नहीं गिना जाएगा, उसे एस्टरिस्क सिंबल (*) से मार्क किया जाएगा. मार्कशीट में इसका मतलब होगा कि जवाब को जांचा गया था, लेकिन उसे टोटल कैलकुलेशन में शामिल नहीं किया गया.

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तीन भाषा पॉलिसी

बोर्ड ने 15 मई को ऐलान किया कि 2026-27 के सेशन से कक्षा 9 के छात्रों के लिए तीन भाषाएं पढ़ना अनिवार्य होगा. जून में ही इस पॉलिसी पर बोर्ड को सफाई देनी पड़ गई. 29 जून को बोर्ड ने इस उलझी पॉलिसी को क्लियर करने की कोशिश की और बताया कि 2026-27 सेशन के दौरान क्लास 10 के स्टूडेंट्स मौजूदा दो-भाषा सिस्टम के तहत ही पढ़ाई करते रहेंगे. उन्हें तीसरी भाषा नहीं लेनी होगी. CBSE ने बताया कि वह नेशनल एजुकेशन पॉलिसी के तीन-भाषा वाले फ्रेमवर्क के साथ आगे बढ़ रहा है. लेकिन यह बदलाव अचानक नहीं बल्कि धीरे-धीरे होगा. 

त्रिभाषा पर नए सवाल

हालांकि, इस विषय में बोर्ड की सफाई पर्याप्त नहीं थी. तीन भाषा की पॉलिसी को लेकर छात्रों और स्कूलों के कई सवाल बने हुए थे. इसे देखते हुए CBSE ने 10 जुलाई को इसे लागू करने के लिए नई गाइडलाइंस जारी कीं. इन गाइडलाइंस में बताया गया कि अगर कोई छात्र तीसरी भाषा की परीक्षा में फेल हो जाता है, तो क्या होगा. बोर्ड के सर्कुलर में कहा गया कि अगर अभी क्लास 9 का कोई स्टूडेंट एकेडमिक ईयर में तीसरी भाषा (R3) के स्कूल-बेस्ड असेसमेंट में पास नहीं होता है तो भी स्टूडेंट को एकेडमिक सेशन 2027-28 के लिए क्लास-10 में प्रमोट कर दिया जाएगा. हालांकि, स्टूडेंट को क्लास 10 में पढ़ते हुए क्लास 9 की तीसरी चुनी हुई भाषा (R3) का असेसमेंट क्लियर करना होगा. इसके अलावा स्कूलों में भाषा पढ़ाने के लिए शिक्षकों की व्यवस्था कैसे की जाएगी, परिवार के दूसरी जगह शिफ्ट होने पर छात्रों को क्या सुविधा मिलेगी और पढ़ाई के लिए जरूरी सामग्री कैसे उपलब्ध कराई जाएगी, इन सभी मुद्दों पर बोर्ड ने इस सर्कुलर में स्थिति स्पष्ट की.

10वीं के पासिंग मार्क्स का नियम बदला?

अब अक्टूबर में आते हैं. CBSE के एक करिकुलम डॉक्युमेंट से 10वीं की परीक्षा में पास होने के नियमों को लेकर भ्रम पैदा हो गया. ऐसा लग रहा था कि छात्रों को इंटर्नल असेसमेंट और बोर्ड परीक्षा दोनों में अलग-अलग 33 फीसदी नंबर लाना जरूरी होगा. इस पर CBSE ने सफाई दी कि पास होने के नियमों में कोई बदलाव नहीं किया गया है. पास होने के लिए इंटर्नल असेसमेंट और बोर्ड परीक्षा के नंबर मिलाकर छात्रों को 33 फीसदी अंक लाने होंगे. यानी दोनों परीक्षाओं में अलग-अलग 33 फीसदी नंबर लाना जरूरी नहीं है.

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सिलेबस से तीन विषय हटाए

ये इस साल का बोर्ड का सबसे नया फरमान है. CBSE ने अपने नए सर्कुलर में मौजूदा कक्षा 9 के छात्रों के सिलेबस में बदलाव किया है. बोर्ड ने इस बैच के लिए 'इंडिविजुअल्स इन सोसाइटी' और 'कंप्यूटेशनल थिंकिंग एंड AI' मॉड्यूल हटा दिए. इसके अलावा, 9वीं के ये छात्र जब 2027-28 के सत्र में कक्षा 10 में पहुंचेंगे, तब उन्हें 'एनवायरनमेंटल एजुकेशन' भी नहीं पढ़ाई जाएगी. बोर्ड ने क्लियर किया कि स्टूडेंट्स कुल 9 सब्जेक्ट पढ़ेंगे. इनमें तीन भाषाओं (R1, R2 और R3) के अलावा मैथेमेटिक्स, साइंस, सोशल साइंस, आर्ट एजुकेशन, फिजिकल एजुकेशन एंड वेल-बीइंग और वोकेशनल एजुकेशन शामिल होंगे. बोर्ड एग्जाम के 5 जरूरी सब्जेक्ट R1, R2, मैथेमेटिक्स, साइंस और सोशल साइंस होंगे. जो स्टूडेंट्स कोई एक्स्ट्रा सब्जेक्ट चुनते हैं, उन्हें सब्जेक्ट के आधार पर उसका बोर्ड एग्जाम भी देना पड़ सकता है. वहीं तीसरी भाषा (R3), आर्ट एजुकेशन और फिजिकल एजुकेशन एंड वेल-बीइंग का असेसमेंट इंटर्नल होगा. नंबर्स ग्रेड में मिलेंगे.

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