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ज्ञानेश कुमार के खिलाफ लगी ‘मॉक संसद’, 12 साल बाद स्पीकर की कुर्सी पर बैठीं मीरा कुमार

ज्ञानेश कुमार के खिलाफ विरोध जताने के लिए विपक्षी दलों ने 31 अक्टूबर को मल्लिकार्जुन खरगे के घर पर मॉक संसद आयोजित की. इसमें पूर्व लोकसभा स्पीकर मीरा कुमार ने अध्यक्षता की.

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खरगे के घर पर मॉक संसद में पूर्व लोकसभा स्पीकर मीरा कुमार अध्यक्ष बनीं. (फोटो- Congress)

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  • मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ विपक्ष ने मल्लिकार्जुन खरगे के नेतृत्व में एक मॉक संसद का आयोजन कर महाभियोग प्रस्ताव पेश किया।
  • विपक्ष का आरोप है कि ज्ञानेश कुमार प्रधानमंत्री और गृहमंत्री के निर्देशों पर चुनाव आयोग चला रहे हैं और वोटर लिस्ट में गड़बड़ियां की जा रही हैं।
  • मॉक संसद का आयोजन 1 नवंबर को रामलीला मैदान में होने वाली रैली की तैयारी है, जिससे विपक्षी एकता और विरोध को मजबूत करने की योजना है।

मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार के खिलाफ विपक्ष का विरोध तेज हो गया है. 1 नवंबर को रामलीला मैदान के प्रोटेस्ट से पहले 31 अक्टूबर को विपक्षी दलों ने मल्लिकार्जुन खरगे के घर पर संसद की तर्ज पर कार्यवाही शुरू कर दी. पूर्व लोकसभा स्पीकर मीरा कुमार की अध्यक्षता में लगी इस संसद में ज्ञानेश कुमार के खिलाफ महाभियोग पेश करने की कार्रवाई की गई. हालांकि, यह पूरी तरह से ‘मॉक संसद’ है, जो कांग्रेस के विरोध का एक तरीका है. यहां लिए गए फैसले प्रभाव में नहीं आएंगे.

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 इंडिया टुडे की रिपोर्ट के मुताबिक, इस ‘मॉक पार्लियामेंट’ में विपक्ष की अलग-अलग पार्टियों के करीब 30 नेताओं के बोलने की उम्मीद है. लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी कार्यक्रम के आखिर में अपनी बात रखेंगे. 

खरगे ने क्या कहा?

कांग्रेस के अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे के भाषण से इस कार्यवाही की शुरुआत हुई. खरगे ने कहा कि मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृहमंत्री अमित शाह के सीधे निर्देशों पर चुनाव आयोग चला रहे हैं. सात महीने पहले विपक्ष के 193 सांसदों ने संसद के दोनों सदनों में मुख्य चुनाव आयुक्त को पद से हटाने के लिए प्रस्ताव दिया था. लेकिन नोटिस खारिज कर दिए गए और उन पर कोई ध्यान नहीं दिया गया. खरगे ने कहा, 

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इसलिए आज हम जो प्रस्ताव लेकर आए हैं, उसका मकसद एक संवैधानिक संस्था की गरिमा की रक्षा करना है. मुख्य चुनाव आयुक्त से हमारी कोई निजी दुश्मनी नहीं है. हम चाहते हैं कि चुनाव आयोग संविधान की भावना के मुताबिक निष्पक्ष तरीके से काम करे, ताकि आम लोगों का उस पर भरोसा बना रहे.

खरगे ने कहा कि ये तय करना होगा कि कमजोर वर्गों, महिलाओं और युवाओं के वोट देने के अधिकार किसी दिल्ली में बैठे व्यक्ति के जरिए कंप्यूटर पर चुपके से मतदाता सूची से न हटा दिए जाएं. खरगे ने आरोप लगाया कि बीजेपी ने साल 2014 से सत्ता हासिल करने और उसे बनाए रखने के लिए हर तरह की साजिश रची है. सांसदों को अपने पाले में किया. राजनीतिक पार्टियों को तोड़ा. सरकारें गिराईं. चुनावी बॉन्ड, ED और CBI का इस्तेमाल किया गया. अब वोटों की चोरी की जा रही है. हमारे पास वोट चोरी के ऐसे सैकड़ों उदाहरण हैं.

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उन्होंने ज्ञानेश कुमार पर कथित वोट चोरी में मदद करने का आरोप लगाया और कहा कि नए कानून बनाकर उन्हें जीवन भर के लिए सुरक्षा कवच दिया गया है. ऐसी सुरक्षा राष्ट्रपति या भारत के मुख्य न्यायाधीश को भी नहीं मिली है. खरगे ने कहा कि सीईसी को बचाने वाले इस कानून को दिसंबर 2023 में विपक्ष के 145 सांसदों को सस्पेंड करने के बाद पास किया गया था. यह शर्मनाक है.

बारिश की वजह से टला था प्रोग्राम

बता दें कि विपक्षी पार्टियां वोटर लिस्ट के स्पेशल इंटेंस रिवीजन (SIR) और चुनाव में कथित गड़बड़ियों को लेकर ज्ञानेश कुमार का इस्तीफा मांग रही हैं. खरगे के घर पर मॉक संसद का यह कार्यक्रम पहले शुक्रवार, 30 अक्टूबर को होना था, लेकिन दिल्ली में भारी बारिश की वजह से इसे टाल दिया गया. इस आयोजन को 1 नवंबर को दिल्ली के रामलीला मैदान में होने वाली INDIA गठबंधन की रैली की तैयारी के तौर पर भी देखा जा रहा है.

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