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निठारी कांड से बरी सुरेंद्र कोली ने हरिद्वार में अपनी जान दे दी, फांसी से रिहाई तक पूरी कहानी जानिए

Surendra Koli death: निठारी हत्याकांड के आरोपी सुरेंद्र कोली की हरिद्वार में मौत की खबर सामने आई है. जानिए 2006 में निठारी कांड के खुलासे से लेकर कई बार मिली फांसी की सजा, 2015 में मौत की सजा के उम्रकैद में बदलने, 2023 में 12 मामलों में बरी होने और नवंबर 2025 में सुप्रीम कोर्ट से अंतिम मामले में बरी होने तक की पूरी कहानी.

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सुरेंद्र कोली ने हरिद्वार में दी जान (Courtesy:@PTI)

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  • नोएडा के निठारी हत्याकांड के मुख्य आरोपी सुरेंद्र कोली, जिन्हें सभी मामलों से बरी कर दिया गया था, हरिद्वार में चाय की दुकान पर मृत पाए गए।
  • निठारी हत्याकांड 2005-06 में नोएडा के सेक्टर 31 में बच्चों और महिलाओं के गायब होने और उनके नरकंकाल मिलने की घटना के कारण प्रमुखता से सुर्खियां बनी थी।
  • सुरेंद्र कोली की मौत के बाद हरिद्वार पुलिस ने जांच शुरू कर दी है, और घटनाक्रम व कारणों की पूरी जानकारी सामने आने की प्रतीक्षा है।

नोएडा के बहुचर्चित निठारी हत्याकांड के आरोपी और बाद में सभी मामलों से बरी हो चुके सुरेंद्र कोली की हरिद्वार में मौत की खबर सामने आई है. शुरुआती जानकारी के मुताबिक कोली ने हरिद्वार में एक चाय की दुकान पर अपनी जान दे दी है. घटना की सूचना मिलने के बाद स्थानीय पुलिस ने जांच शुरू की है. फिलहाल पुलिस की ओर से घटना के कारणों और पूरे घटनाक्रम को लेकर पूरी जानकारी सामने आना अभी बाकी है. 

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आजतक ने भी शुरुआती रिपोर्ट में बताया कि कोली ने हरिद्वार में अपनी जान दे दी है. हरिद्वार पुलिस के SHO कुंदन सिंह राणा के हवाले से आजतक ने बताया कि सुबह करीब 11:30 बजे इस संबंध में कॉल मिली थी. इसके बाद जब मृतक की ID चेक की गई तो पता चला कि उसने अपना नाम सुरेंद्र कोली बताया था. SHO के मुताबिक, मृतक के पास से मिली ID निठारी वाले सुरेंद्र कोली से मिलती है. 

2006 में निठारी से मिले नरकंकाल और खुला राज

निठारी कांड की कहानी साल 2005-06 में नोएडा के सेक्टर 31 स्थित D-5 बंगले के आसपास गायब हो रहे बच्चों और महिलाओं से जुड़ी थी. 29 दिसंबर 2006 को बंगले के पीछे नाले और आसपास के इलाके से नरकंकाल, हड्डियां और कपड़े बरामद होने के बाद मामला देशभर में सुर्खियों में आया. D-5 के मालिक मोनिंदर सिंह पंढेर थे और सुरेंद्र कोली वहां घरेलू नौकर के तौर पर काम करता था. मामले में दोनों को आरोपी बनाया गया. जांच बाद में CBI को सौंप दी गई. सुप्रीम कोर्ट के रिकॉर्ड के मुताबिक निठारी से जुड़े मामलों में एक जैसी परिस्थितिजन्य सामग्री और कोली के कथित बयान के आधार पर कुल 13 मुकदमे चले.

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किस पर क्या आरोप लगाए गए थे?

मोनिंदर सिंह पंढेर और सुरेंद्र कोली इस मामले के दो प्रमुख आरोपी थे. अभियोजन का आरोप था कि कोली पीड़ितों को D-5 तक लाता था और उनके साथ अपराध करता था. बाद में हत्या और शवों को ठिकाने लगाने के आरोप भी लगाए गए. हालांकि अदालतों में इन आरोपों को साबित करने के लिए इस्तेमाल किए गए सबूतों की विश्वसनीयता पर बाद में गंभीर सवाल उठे. इलाहाबाद हाई कोर्ट ने 2023 में कहा कि अभियोजन की कहानी मुख्य रूप से कथित स्वीकारोक्ति और बरामदगी पर टिकी थी, लेकिन इन सबूतों को कानून की कसौटी पर भरोसेमंद नहीं माना जा सकता.

कब मिली थी फांसी की सजा?

निठारी से जुड़े मामलों में कोली को अलग-अलग मुकदमों में कई बार मौत की सजा सुनाई गई. सबसे अहम पहला मामला रिंपा हलदर की हत्या से जुड़ा था. 13 फरवरी 2009 को गाजियाबाद की विशेष अदालत ने कोली को दोषी ठहराकर मौत की सजा सुनाई. इलाहाबाद हाई कोर्ट ने 11 सितंबर 2009 को उसकी मौत की सजा बरकरार रखी, जबकि मोनिंदर सिंह पंढेर को उस मामले में बरी कर दिया. 15 फरवरी 2011 को सुप्रीम कोर्ट ने कोली की दोषसिद्धि और मौत की सजा को बरकरार रखा. इसके बाद दूसरे मामलों में भी कोली को मौत की सजा सुनाई जाती रही और निठारी से जुड़े 13 मामलों में उसे मृत्युदंड मिला.

फांसी टली और मौत की सजा बनी उम्रकैद

कोली की दया याचिकाएं भी लंबे समय तक लंबित रहीं. 2014 में राष्ट्रपति ने उसकी दया याचिका खारिज कर दी थी. एक समय मेरठ जेल में उसकी फांसी की तैयारी तक हो चुकी थी, लेकिन कानूनी प्रक्रिया के बीच उसे राहत मिली. 28 जनवरी 2015 को इलाहाबाद हाई कोर्ट ने दया याचिका के निपटारे में हुई लंबी देरी को आधार बनाकर उसकी मौत की सजा को उम्रकैद में बदल दिया. यानी फांसी का फैसला खत्म नहीं हुआ था, बल्कि सजा बदलकर आजीवन कारावास कर दी गई थी.

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2023 में कहानी ने लिया बड़ा मोड़

16 अक्टूबर 2023 को इलाहाबाद हाई कोर्ट ने कोली को निठारी से जुड़े 12 मामलों में बरी कर दिया. कोर्ट ने कथित स्वीकारोक्ति, बरामदगी और जांच की प्रक्रिया पर सवाल उठाते हुए कहा कि अभियोजन दोष साबित करने के लिए पर्याप्त और विश्वसनीय सबूत पेश नहीं कर सका. मोनिंदर सिंह पंढेर को भी संबंधित मामलों में राहत मिली. इसके बाद CBI और पीड़ित परिवारों की ओर से सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी गई. 30 जुलाई 2025 को सुप्रीम कोर्ट ने 12 मामलों में कोली और पंढेर की बरी होने की स्थिति को बरकरार रखा.

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आखिरी मामला भी खत्म, नवंबर 2025 में जेल से बाहर आया

इसके बावजूद कोली एक मामले में उम्रकैद की सजा काट रहा था. ये रिंपा हलदर हत्याकांड से जुड़ा वही मामला था, जिसमें 2011 में सुप्रीम कोर्ट ने उसकी सजा बरकरार रखी थी. कोली ने इसके खिलाफ क्यूरेटिव याचिका दाखिल की. 11 नवंबर 2025 को सुप्रीम कोर्ट ने क्यूरेटिव याचिका मंजूर करते हुए उसकी दोषसिद्धि रद्द कर दी और उसे बरी करने का आदेश दिया. कोर्ट ने माना कि जब बाकी मामलों में उसी तरह के सबूतों को अविश्वसनीय माना जा चुका है, तो उसी आधार पर एक मामले में दोषसिद्धि कायम रखना न्यायसंगत नहीं होगा. इसके बाद कोली जेल से बाहर आ गया.

इस तरह करीब दो दशक तक चले निठारी कांड में सुरेंद्र कोली को पहले कई मामलों में मौत की सजा मिली, फिर एक मामले में मौत की सजा उम्रकैद में बदली और आखिरकार नवंबर 2025 में सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद वो सभी आपराधिक मामलों में बरी हो गया. अब सितंबर 2026 में हरिद्वार से उसकी मौत की खबर सामने आई है. इस नई घटना की परिस्थितियों को लेकर पुलिस की विस्तृत जांच और आधिकारिक जानकारी का इंतजार है.

वीडियो: निठारी हत्याकांड का आरोपी सुरेंद्र कोली अपनी ही याचिका लेकर पंहुचा सुप्रीम कोर्ट, CJI क्या बोले?

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