The Lallantop

भारत को कच्चा तेल बेचने वाले रूस पर बड़ा संकट, अब हमसे पेट्रोल खरीदेगा पुतिन का देश!

Russia imports gasoline from India: यूक्रेनी ड्रोन हमलों के कारण रूसी रिफाइनरियां तबाह हो गई हैं और देश में पेट्रोल की भारी किल्लत है. अब रूस भारत की वर्ल्ड क्लास रिफाइनरियों से पेट्रोल आयात कर रहा है. भारत के इस तेल वाले मास्टरस्ट्रोक का पूरा गणित क्या है?

Advertisement
post-main-image
भारत से तेल खरीदेगा रूस (फोटो- सोशल मीडिया)

Quick AI HighlightsClick here to view more

  • रूस की अधिकांश तेल रिफाइनरियां यूक्रेन द्वारा किए गए ड्रोन हमलों के कारण क्षतिग्रस्त हो गईं हैं, जिससे पेट्रोल उत्पादन में लगभग 25 प्रतिशत की गिरावट आई है और देश को अन्य स्रोतों से फ्यूल आयात करना पड़ रहा है।
  • रूस में पेट्रोल की गंभीर कमी और घरेलू उत्पादन में गिरावट के कारण, भारत ने रूस को पेट्रोल निर्यात करना शुरू किया है, जहाँ भारत सस्ते कच्चे तेल को रिफाइन करके उच्च कीमत पर बेच रहा है।
  • यह भारत के रिफाइनिंग उद्योग के लिए आर्थिक अवसर प्रस्तुत करता है और वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला में भारत की भूमिका को मजबूत करता है, जबकि पश्चिमी देशों की रूस पर लगाए प्रतिबंधों के बावजूद व्यापार जारी है।

वक्त का पहिया जब घूमता है तो पूरी दुनिया देखती है. जो रूस कभी दुनिया के कोने-कोने में अपना तेल बेचकर अकूत मुनाफा कमाता था, आज वो भारत के सामने पेट्रोल के लिए हाथ फैलाए खड़ा है. ग्लोबल जियोपॉलिटिक्स का इससे बड़ा 'रोल रिवर्सल' शायद ही पहले कभी देखा गया हो. रॉयटर्स (Reuters) की एक ताजा रिपोर्ट ने पूरी दुनिया के सामने एक ऐसी सच्चाई रखी है जिसने सुपरपावर्स के होश उड़ा दिए हैं.

Add Lallantop as a Trusted Sourcegoogle-icon
Advertisement

समाचार एजेंसी रॉयटर्स के मुताबिक अपनी रिफाइनरियों पर हो रहे हमलों और घरेलू किल्लत से जूझ रहा रूस अब भारत से पेट्रोल (Gasoline) खरीदने की कोशिश में लग गया है. द हिंदू (The Hindu) की रिपोर्ट की मानें तो समंदर के रास्ते भारत से पेट्रोल की खेप रूस पहुंचने भी लगी है. ये खबर वैश्विक राजनीति और बिजनेस के नजरिए से भारत के एक बड़े 'रिफाइनिंग सुपरपावर' बनने की कहानी कहती है.

दुनिया को तेल बांटने वाले पुतिन के देश में ये क्या हो गया?

सबसे बड़ा सवाल ये उठता है कि आखिर इतने बड़े देश में पेट्रोल की कमी कैसे हो गई? इसके पीछे की कहानी यूक्रेन के ताबड़तोड़ ड्रोन हमलों से जुड़ी है. कैस्पियन न्यूज (Caspian News) के मुताबिक पिछले कुछ महीनों में यूक्रेन ने सीधे रूस के फ्यूल इन्फ्रास्ट्रक्चर को अपना निशाना बनाया है. मई और जून के महीनों में रूस की लगभग 22 से ज्यादा प्रमुख तेल रिफाइनरियों पर यूक्रेन ने भीषण ड्रोन हमले किए हैं. इन हमलों ने रूस के तेल साफ करने वाले सिस्टम को बुरी तरह पंगु बना दिया है. इसका असर ये हुआ है कि रूस में तेल प्रोसेसिंग का वॉल्यूम पिछले दो दशकों में अपने सबसे निचले स्तर पर पहुंच गया है और पेट्रोल का प्रोडक्शन सीधे 25 परसेंट तक गिर गया है.

Advertisement

‘द टाइम्स ऑफ इंडिया’ के मुताबिक रूस के कुल 11 टाइम जोन्स में पेट्रोल की भयंकर किल्लत महसूस की जा रही है. पेट्रोल पंपों पर लंबी-लंबी कतारें लगी हैं, दाम रिकॉर्ड तोड़ ऊंचाई पर हैं और कई इलाकों में तो फ्यूल की बकायदा राशनिंग करनी पड़ रही है. कई पंपों पर गाड़ियों में एक बार में सिर्फ 40 लीटर पेट्रोल या 80 लीटर डीजल ही भरा जा रहा है ताकि लोग पैनिक बाइंग ना करें. 

गर्मियों के मौसम में रूस में रोजाना कम से कम 1 लाख 10 हजार टन पेट्रोल की खपत होती है, लेकिन प्रोडक्शन ठप होने की वजह से अब रूस को हर महीने लगभग 4 लाख टन पेट्रोल दूसरे देशों से मंगाना पड़ रहा है. इसी जरूरत को पूरा करने के लिए रूस ने अब भारत का दरवाजा खटखटाया है.

भारत के 'रिफाइनिंग हब' का मुनाफा: इस बिजनेस मॉडल का पूरा गणित समझें

इस पूरी डील में भारत का जो बिजनेस मॉडल है, वो किसी मास्टरस्ट्रोक से कम नहीं है. गणित एकदम सीधा और दिलचस्प है. ‘इकोनॉमिक टाइम्स’ के मुताबिक भारत खुद रूस से भारी डिस्काउंट पर कच्चा तेल (Crude Oil) खरीदता है. जून के डेटा को देखें तो भारत ने रूस से रिकॉर्ड 27 लाख बैरल प्रति दिन कच्चा तेल इम्पोर्ट किया है, जो भारत के कुल कच्चे तेल के इम्पोर्ट का आधे से भी ज्यादा (लगभग 50 परसेंट) है.

Advertisement

अब कहानी का ट्विस्ट देखिए. भारत इस सस्ते कच्चे तेल को अपनी वर्ल्ड क्लास रिफाइनरियों (जैसे जामनगर और अन्य रिफाइनरी हब्स) में प्रोसेस करता है, उसे साफ करके पेट्रोल और डीजल बनाता है और अब उसी पेट्रोल को वापस रूस को ऊंचे दामों पर बेच रहा है.

‘द हिंदू’ ने इंडस्ट्री सोर्सेज के हवाले से बताया है कि भारत से कम से कम 60 हजार मीट्रिक टन पेट्रोल की पहली खेप समंदर के रास्ते रूस के लिए रवाना भी हो चुकी है. दो बड़े टैंकर, जिनमें से प्रत्येक में 30 हजार से 40 हजार टन पेट्रोल लोड है, रूस की तरफ बढ़ रहे हैं.

‘मनी कंट्रोल’ के मुताबिक संकट इतना गहरा है कि रूस की संसद ने बकायदा अपने टैक्स कोड में बदलाव किया है ताकि भारत से आने वाले इस महंगे पेट्रोल पर अपनी घरेलू तेल कंपनियों को सब्सिडी दी जा सके. ये भारत की रिफाइनिंग कैपेसिटी का वो लोहा है जिसे आज पूरी दुनिया मान रही है. भारत ने कच्चे तेल की इस आपदा को अपने लिए एक शानदार इकोनॉमिक अवसर में बदल दिया है.

अमेरिका की नजर: भारत-रूस की इस नई पेट्रोल डील पर वेस्टर्न वर्ल्ड क्या सोचेगा?

अब सवाल ये आता है कि इस नई डील पर अमेरिका और पश्चिमी देशों का क्या रुख होगा? 'द प्रिंट’ के मुताबिक जब से यूक्रेन युद्ध शुरू हुआ है, अमेरिका और यूरोपीय देशों ने रूस पर कड़े आर्थिक प्रतिबंध लगा रखे हैं. वो चाहते हैं कि दुनिया का कोई भी देश रूस से व्यापार ना करे ताकि पुतिन की जंग लड़ने की ताकत कमजोर हो जाए. लेकिन भारत ने हमेशा अपनी एनर्जी सिक्योरिटी और नेशनल इंटरेस्ट को ऊपर रखा है. जब भारत ने रूस से सस्ता कच्चा तेल खरीदना शुरू किया था, तब भी पश्चिमी देशों ने आंखें तरेरी थीं, लेकिन भारत पीछे नहीं हटा.

सेमाफोर (Semafor) के मुताबिक अब जब भारत उसी कच्चे तेल को साफ करके वापस रूस को पेट्रोल के रूप में बेच रहा है, तो अमेरिका के लिए प्रतिबंधों का कोई सीधा नियम इस पर लागू करना मुश्किल होगा. वजह ये है कि जब कच्चा तेल भारत में रिफाइन हो जाता है, तो उसका ओरिजिन बदल जाता है और वो तकनीकी रूप से भारतीय प्रोडक्ट बन जाता है. अमेरिका इस पूरी स्थिति पर कड़ी नजर बनाए हुए है, लेकिन वो भारत पर बहुत ज्यादा दबाव नहीं बना सकता क्योंकि ग्लोबल सप्लाई चेन को सुचारू रूप से चलाने के लिए भारत के रिफाइनिंग हब की जरूरत खुद पश्चिमी देशों को भी है.

रूस के लिए खरीदार नहीं, लाइफलाइन बन गया है भारत

ये पूरी स्थिति बदलती हुई वैश्विक व्यवस्था का एक बड़ा सबूत है. वरिष्ठ पत्रकार प्रेम कुमार के मुताबिक ‘खरीदार’ अब ‘दुकानदार’ बन चुका है. लल्लनटॉप से बात करते हुए प्रेम कुमार कहते हैं,

कुछ साल पहले तक ये माना जाता था कि रूस एक सीनियर पार्टनर है और भारत सिर्फ एक डिफेंस और एनर्जी बायर है. लेकिन आज जंग के इस नाजुक मोड़ पर रूस के लिए भारत की अहमियत सिर्फ एक सामान्य खरीदार जैसी नहीं बची है, बल्कि वो एक लाइफलाइन जैसी हो चुकी है. रूस को अपनी अर्थव्यवस्था को बचाए रखने के लिए भारतीय मार्केट और भारतीय रिफाइनिंग क्षमता की सख्त जरूरत है.

चाहे बात भारत के जरिए इंटरनेशनल मार्केट्स में रूस के तेल की पहुंच बनाए रखने की हो, या फिर खुद रूस के घरेलू बाजार में पेट्रोल की आग को शांत करने की, नई दिल्ली इस समय ग्लोबल एनर्जी इक्वेशन के केंद्र में बैठी है. पुतिन ने भी माना है कि उनके देश के कुछ हिस्सों में ड्रोन हमलों की वजह से किल्लत हुई है, और इस किल्लत को दूर करने के लिए भारत की रिफाइनरियों से बेहतर और भरोसेमंद विकल्प उनके पास आज की तारीख में कोई दूसरा नहीं है. 

ये भी पढ़ें: चीन की चाल और पाकिस्तान की ढाल, दोनों पर भारी पड़ेगा इंडियन नेवी का ‘प्रोजेक्ट-75 अल्फा’

वीडियो: रूस में तेल की कमी क्यों? भारत कैसे काम आया?

Advertisement