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चीन की चाल और पाकिस्तान की ढाल, दोनों पर भारी पड़ेगा इंडियन नेवी का 'प्रोजेक्ट-75 अल्फा'

Project 75 Alpha: Indian Navy ने Strait of Malacca से लेकर Gwadar Port तक के समुद्री इलाके में चीन और पाकिस्तान की 'नौसैनिक जुगलबंदी' की काट तैयार कर ली है. इसके तहत इस पूरे क्षेत्र में 'न्यूक्लियर अटैक सबमरीन्स' का जाल बिछाया जाएगा. भारत के इस प्रोजेक्ट को नाम दिया गया है- 'प्रोजेक्ट-75 अल्फा'.

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1 जून 2026 (अपडेटेड: 1 जून 2026, 02:04 PM IST)
Project 75 Alpha
क्या है इंडियन नेवी का सीक्रेट हथियार 'प्रोजेक्ट-75 अल्फा'? (फोटो- इंडियन नेवी)

Story Summary

वीडियो: ईरान की नेवी ने होर्मुज के पास भारतीय जहाज पर गोली क्यों चलाई?

सामान्य प्रश्न

प्रोजेक्ट-75 अल्फा क्या है?

ये भारतीय नौसेना का एक बेहद महत्वपूर्ण प्रोजेक्ट है जिसके तहत छह स्वदेशी न्यूक्लियर अटैक सबमरीन्स (SSN) का निर्माण किया जा रहा है. ये भारत की समुद्री रक्षा प्रणाली को मजबूत करने के लिए तैयार किया गया है.

न्यूक्लियर अटैक सबमरीन आम पनडुब्बियों से बेहतर क्यों होती हैं?

परमाणु ऊर्जा से चलने के कारण इन्हें ईंधन के लिए सतह पर नहीं आना पड़ता. ये महीनों तक पानी के नीचे रह सकती हैं, इनकी रफ्तार बहुत तेज होती है और इन्हें ढूंढ पाना दुश्मन के लिए नामुमकिन जैसा होता है.

आईएनएस अरिहंत और प्रोजेक्ट-75 अल्फा की पनडुब्बियों में क्या अंतर है?

आईएनएस अरिहंत एक एसएसबीएन (SSBN) है जो परमाणु मिसाइलें लॉन्च करने के लिए बनी है, जबकि प्रोजेक्ट-75 अल्फा के तहत बनने वाली पनडुब्बियां एसएसएन (SSN) हैं, जो दुश्मन के जहाजों और पनडुब्बियों पर सीधा हमला करने वाली लड़ाकू पनडुब्बियां होती हैं.

इस प्रोजेक्ट से चीन को क्या दिक्कत है?

चीन हिंद महासागर में अपना दबदबा बनाना चाहता है, लेकिन भारत की न्यूक्लियर सबमरीन्स चीन के ग्वादर पोर्ट से लेकर मलक्का स्ट्रेट तक के पूरे रूट को ब्लॉक करने की क्षमता रखती हैं, जिससे चीन की घेराबंदी फेल हो जाएगी.

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