सरकारी काम अक्सर देरी से होता है, काफी सुना होगा. लेकिन इसी 'आराम-काम' ने कुछ लोगों का सपना उनसे छीन लिया. मामला झारखंड का है. टीचर भर्ती से जुड़ा है. 2016 में कुछ पैरा टीचरों ने झारखंड टीचर एलिजिबिलिटी टेस्ट (JTET) पास किया था. इसके बाद असिस्टेंट टीचर भर्ती की चयन परीक्षा 2023 में आयोजित हुई. और अपॉइंटमेंट प्रोसेस 2025 में शुरू हुआ.
20 साल पक्की सरकारी नौकरी की राह देखी, रिटायरमेंट से एक दिन पहले मिला अपॉइंटमेंट लेटर
Jharkhand teacher appointment letter: 29 जून को मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने 1,042 शिक्षकों को नियुक्ति पत्र सौंपे. इन टीचर्स ने 2016 में झारखंड टीचर एलिजिबिलिटी टेस्ट (JTET) दिया था.


सोमवार, 29 जून 2026 को मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने 1,042 शिक्षकों को नियुक्ति पत्र सौंपे. यानी परीक्षा से लेकर रिजल्ट आने तक इतनी देर कर दी गई कि कुछ टीचर रिटायर हो गए और कुछ इसके कगार पर हैं.
टाइम्स ऑफ इंडिया ने ऐसे ही कुछ पैरा टीचरों से बात की है. पैरा टीचर यानी वह टीचर जो नियमित शिक्षकों की कमी पूरी करते हैं या उनके साथ सहयोग करते हैं. या दूरदराज के इलाकों में शिक्षा पहुंचाने के लिए अस्थायी तौर पर नियुक्त किए जाते हैं.
नंदलाल रवानी: पहली कहानी नंदलाल रवानी की है. वे झारखंड के जामताड़ा के रहने वाले हैं. 2006 से पैरा टीचर थे. 2016 में JTET का एग्जाम पास किया था. 29 जून को नियुक्ति पत्र मिला. लेकिन उसके अगले ही दिन रिटायरमेंट की उम्र में आ गए. क्योंकि 30 जून (जन्मदिन की तारीख) को वह 60 साल के हो गए.
यानी पक्की नौकरी करने से पहले ही वह रिटायर हो गए. रवानी ने कहा,
"मुझे समझ नहीं आ रहा कि क्या कहूं. मैंने पूरी जिंदगी एक पक्की नौकरी का इंतजार किया. अब ये नौकरी रिटायरमेंट से ठीक एक दिन पहले मिली."
नईम अंसारी: पलामू के नईम अंसारी का केस तो और भी अजीब है. वे बीती 31 मई को ही रिटायर हो गए थे. लेकिन उनकी सरकारी नौकरी अब लगी है. वे 24 साल तक पैरा टीचर रहे.
भारती धन: खूंटी की रहने वाली 54 वर्षीय भारती धन के पास भी समय कम है. उनके पास टीचर के तौर पर काम करने के लिए सिर्फ छह साल बचे हैं.
“भर्तियों समय पर होती, तो समस्या न होती”टाइम्स से बात करते हुए झारखंड प्राथमिक शिक्षक संघ के वाइस-प्रेसिडेंट अमित महतो ने बताया कि यह समस्या पैरा-टीचर्स पर खासा असर डालती है. उन्होंने कहा, "अगर भर्तियां समय पर होतीं, तो यह समस्या नहीं आती."
स्कूल शिक्षा और साक्षरता विभाग की सेक्रेटरी उमा शंकर सिंह ने मामले पर कहा कि पिछले कुछ सालों से रेगुलर भर्ती अभियान चलाए जा रहे हैं. अगर ऐसा ही चलता रहा तो ऐसी समस्याएं दोबारा नहीं होंगी.
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उन्होंने आगे बताया कि 2022-23 में सरकार द्वारा पुराने सहायक शिक्षक और प्राइमरी टीचर कैडर की जगह नए असिस्टेंट टीचर्स कैडर लाने के बाद 50 हजार पदों को मंजूरी दी गई. झारखंड कर्मचारी चयन आयोग को 26 हजार पदों के लिए रिक्वेस्ट भेजी गई थी. अब तक लगभग 11 हजार पद भरे जा चुके हैं, जबकि राज्य भर में लगभग 39 हजार पद अब भी खाली पड़े हैं.
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