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पोर्न में 'चोक‍िंग', 'देवर-भाभी' वाले सीन पर ब्रिटेन ने लगाया बैन, देखने-शेयर करने पर होगी जेल

ब्रिटेन सरकार का कहना है कि इस तरह के कंटेंट से खासकर युवाओं की सोच प्रभावित हो सकती है. उन्हें लग सकता है कि सेक्स के दौरान हिंसा करना सामान्य बात है. जबकि असल जिंदगी में ऐसा व्यवहार किसी को गंभीर नुकसान पहुंचा सकता है.

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सांकेतिक फोटो- Adobe Stock

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  • ब्रिटेन में 6 नवंबर 2026 से चोकिंग, करीबी रिश्तेदारों के बीच सेक्स और बच्चों का रोल प्ले दिखाने वाले पोर्नोग्राफिक कंटेंट पर कड़े प्रतिबंध लागू होंगे और उल्लंघन पर पांच साल तक जेल की सजा हो सकती है।
  • ब्रिटेन सरकार ने यह कदम 2025 में किए गए एक रिव्यू के बाद उठाया है जिसमें पाया गया कि पोर्नोग्राफिक साइटों पर ऐसे सीन का प्रभाव युवाओं में यौन हिंसा को सामान्य मानने की प्रवृत्ति बढ़ा सकता है।
  • भारत में पहले से अश्लील और यौन कंटेंट को लेकर कानून मौजूद हैं, लेकिन ब्रिटेन जैसे विशिष्ट प्रतिबंध अभी लागू नहीं हुए हैं और भारत सरकार ने ऐसे नए नियमों को लेकर कोई घोषित योजना नहीं बनाई है।

पोर्न में सेक्स के दौरान चोक‍िंग और देवर-भाभी, भाई-बहन जैसे करीबी रिश्तों के बीच सेक्स दिखाने वाले वीडियो देखने, रखने और शेयर करने पर जेल हो सकती है. 6 नवंबर से ब्रिटेन में ऐसे पोर्नोग्राफिक कंटेंट पर नए प्रतिबंध लागू होने जा रहे हैं. इन्हें ऑनलाइन शेयर करने पर पांच साल तक की जेल हो सकती है. लेकिन भारत का क्या? क्या यहां भी ऐसे वीडियो देखना, डाउनलोड करना या शेयर करना अपराध है? क्या भारत में भी ऐसा कानून आ सकता है? या फिर यहां पहले से मौजूद कानून ही ऐसे मामलों में कार्रवाई के लिए काफी हैं? 

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इस रिपोर्ट में ब्रिटेन के नए कानून से लेकर भारत के मौजूदा नियमों तक, हर जरूरी सवाल का जवाब समझेंगे. 

शुरुआत ब्रि‍टेन वाले कानून से करते हैं. ब्रिटेन में 6 नवंबर से लागू होने वाले नए कानून के तहत तीन तरह के पोर्नोग्राफिक कंटेंट पर कार्रवाई की जाएगी.

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पहला- ऐसे वीडियो जिनमें सेक्स के दौरान चोक‍िंग यानी किसी का गला घोंटते या दम घुटते दिखाया जाता है. 
दूसरा- मां-बेटा, प‍िता-बेटी, भाई-बहन, ससुर-बहू जैसे करीबी रिश्तेदारों के बीच फि‍ज‍िकल र‍ि‍लेशन दिखाने वाले वीडियो. और 
तीसरा- ऐसे सीन जिनमें एडल्ट एक्टर्स 16 साल से कम उम्र के बच्चों का रोल प्ले करते हैं.  

इसे लेकर बीबीसी ने एक र‍िपोर्ट छापी है. ये र‍िपोर्ट बीबीसी की टेक्नोलॉजी रिपोर्टर लॉरा क्रेस और क्रिस वैलेंस ने की है. र‍िपोर्ट के मुताबि‍क ब्रिटेन सरकार का कहना है कि इस तरह के कंटेंट से खासकर युवाओं की सोच प्रभावित हो सकती है. उन्हें लग सकता है कि सेक्स के दौरान हिंसा करना सामान्य बात है जबकि असल जिंदगी में ऐसा व्यवहार किसी को गंभीर नुकसान पहुंचा सकता है.

बीबीसी की रिपोर्ट के मुताबिक, ये फैसला साल 2025 में पोर्नोग्राफी के रेग्युलेशन को लेकर कि‍ए गए र‍िव्यू के बाद आया है. र‍िव्यू में पाया गया था कि फेसम पोर्न वेबसाइटों पर Sexual activities के दौरान चोक‍िंग से जुड़े सीन बड़ी संख्या में मौजूद हैं. र‍िव्यू में चिंता जताई गई थी कि इस तरह के कंटेंट से युवाओं के बीच Sexual violence को सामान्य व्यवहार समझने की प्रवृत्ति बढ़ सकती है.

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ये र‍िव्यू ब्रिटेन के तत्कालीन प्रधानमंत्री ऋषि सुनक की सरकार ने कराया था. इसकी अगुवाई कंजर्वेटिव पार्टी की सदस्य और हाउस ऑफ लॉर्ड्स की सदस्य बैरोनेस गैबी बर्टिन ने की थी.

बर्टिन ने नए नियमों का स्वागत करते हुए बीबीसी रेडि‍यो से कहा कि ये फैसला बहुत पहले आ जाना चाहिए था. उनके मुताबिक, इससे पोर्नोग्राफी से जुड़ी कंपनियों और समाज को स्पष्ट संदेश जाएगा कि असल जीवन में नुकसान पहुंचाने वाले Sexual violence को बढ़ावा देने वाले कंटेंट को स्वीकार नहीं किया जा सकता.

इस र‍िव्यू में एक 14 साल के लड़के का उदाहरण भी दिया गया. ज‍िसने अपने टीचर से पूछा था कि सेक्स के दौरान लड़कियों का चोक कैसे क‍िया जाए? (how to choke girls during sex). रिपोर्ट में कहा गया कि पोर्न में ऐसे सीन देखकर बच्चे उनकी नकल कर सकते हैं, जिससे किसी की जान भी खतरे में पड़ सकती है.

अब जरा सोचिए. अगर कोई बच्चा पोर्न में बार-बार ऐसी एक्ट‍िव‍िटी देखता है तो उसके मन में सेक्स और रिश्तों को लेकर कैसी समझ बन सकती है? क्या वो हिंसा को भी सेक्स का सामान्य हिस्सा मानने लगेगा? ब्रिटेन सरकार की चिंता यही है. उसका कहना है कि महिलाओं के खिलाफ हिंसा को सामान्य दिखाने वाला कंटेंट असल जिंदगी में भी लोगों के व्यवहार को प्रभावित कर सकता है.

कानून तोड़ने पर कितनी सजा होगी? 

ब्रिटेन में नए नियमों के तहत प्रतिबंधित कंटेंट इंटरनेट पर अपलोड करने, पोस्ट करने या दूसरों के साथ शेयर करने पर अधिकतम पांच साल की जेल हो सकती है.

वहीं, ऐसे कुछ प्रतिबंधित वीडियो अपने फोन, कंप्यूटर या क्लाउड स्टोरेज में रखने पर भी सजा का प्रावधान है. चाेक‍िंग वाले सीन और कुछ करीबी रिश्तेदारों के बीच सेक्स सीन दिखाने वाले कंटेंट को रखने पर अधिकतम दो साल की जेल हो सकती है. वहीं, बच्चों की उम्र का रोल प्ले करने वाले एडल्ट के मामले में ये सजा तीन साल तक हो सकती है.

ब्रिटेन की जस्ट‍िस म‍िन‍िस्टर एलेक्स डेविस जोन्स ने लोगों से ऐसे कंटेंट को डिलीट करने और शेयर करना बंद करने की अपील की है. उनका कहना है कि ये कानून किसी की harmless sexual preferences को criminalising के लिए नहीं है. इसका मकसद ऐसे कंटेंट पर रोक लगाना है, जो हिंसा को सामान्य बना सकता है.

बीबीसी से बातचीत में इंग्लैड की डरहम यूनिवर्सिटी की कानून विशेषज्ञ प्रोफेसर क्लेयर मैकग्लिन ने नए नियमों का स्वागत किया. उन्होंने कहा कि ये बदलाव उस सोच के खिलाफ एक अहम कदम हो सकता है, जिसमें पोर्नोग्राफी के जरिए यौन हिंसा को सामान्य व्यवहार के तौर पर पेश किया जाता है.

हालांकि, उन्होंने यह भी कहा कि कानून लागू होने के बाद यह देखना जरूरी होगा कि टेक्नोलॉजी कंपनियां और रेग्युलेशन, प्रतिबंधित कंटेंट को हटाने और उसके प्रसार को रोकने के लिए कितनी तेजी से कार्रवाई करते हैं. उनके मुताबिक, इस कानून का उद्देश्य केवल लोगों पर मुकदमे चलाना नहीं, बल्कि ऑनलाइन पोर्नोग्राफी की दुनिया में बदलाव लाना भी है. इसके लिए इंटरनेट प्लेटफॉर्म और नियामक संस्थाओं की सक्रिय भूमिका जरूरी होगी.

ब्रिटेन के क्राइम एंड पुलिसिंग बिल में किए गए संशोधनों के जरिए इन एक्ट‍िव‍िटी को अपराध के दायरे में लाने का प्रावधान किया गया था. ये कानून अप्रैल 2026 में कानून बन चुका है जो अब 6 नवंबर 2026 से लागू होगा. 

भारत में क्या स्थिति है?

भारत जैसे समाज में परिवार और रिश्तों को खास अहमियत दी जाती है. यहां मां-बेटे, भाई-बहन, पिता-बेटी जैसे रिश्तों को सिर्फ पारिवारिक रिश्ता नहीं, बल्कि भरोसे, सम्मान और मर्यादा से भी जोड़कर देखा जाता है. देवर-भाभी जैसे रिश्तों के भी अपने सामाजिक दायरे और मान्यताएं हैं. ऐसे में जब पोर्नोग्राफी में इन रिश्तों को सेक्सुअल रिलेशनशिप के तौर पर दिखाया जाता है, तो सवाल उठता है कि क्या इस तरह का कंटेंट पारिवारिक रिश्तों को लेकर लोगों की सोच पर असर डाल सकता है?

हालांकि, किसी कंटेंट का सामाजिक रूप से आपत्तिजनक होना और उसका कानूनन अपराध होना दो अलग बातें हैं. इसलिए यह समझना भी जरूरी है कि भारत में ऐसे कंटेंट को लेकर कानून क्या कहता है. 

भारत में पहले से ही ऑनलाइन अश्लील और यौन कंटेंट को लेकर कानून मौजूद हैं. IT एक्ट की धारा 67 के तहत अश्लील सामग्री को इलेक्ट्रॉनिक रूप में प्रकाशित या प्रसारित करने पर सजा हो सकती है.

धारा 67A में Sexual activities को दिखाने वाले कंटेंट को वीडि‍यो के तौर पर पब्ल‍िश या शेयर करने पर सजा का प्रावधान है. वहीं, बच्चों से जुड़ी यौन सामग्री के मामलों में धारा 67B के तहत कड़ी सजा हो सकती है. लेकिन यहां एक जरूरी फर्क समझिए. भारत में अश्लील कंटेंट पर पहले से कानून होना और ब्रिटेन की तरह चोक‍िंग और करीबी र‍िश्तेदारों वाले सेक्स सीन को अलग से अपराध घोषित करना, दोनों अलग बातें हैं.

भारत में कानून मौजूद हैं, लेकिन ब्रिटेन ने जिस तरह कुछ खास तरह के पोर्नोग्राफिक कंटेंट को निशाना बनाया है, वैसा ही कोई अलग नियम भारत में कब आएगा, इसे लेकर फि‍लहाल कोई अपडेट नहीं है.  

भारत सरकार ऑनलाइन अश्लील कंटेंट के खिलाफ कार्रवाई करती रही है. फरवरी 2026 में सरकार ने संसद में बताया था कि साल 2025 में अनुचित कंटेंट दिखाने के कारण 25 OTT प्लेटफॉर्म ब्लॉक किए गए थे. इसके अलावा, जुलाई 2026 में सरकार ने बताया कि पिछले दो साल में अश्लील कंटेंट और संबंधित कानूनों के उल्लंघन के कारण 50 OTT प्लेटफॉर्म को भारत में ब्लॉक क‍िया गया था.  

वहीं, बच्चों से जुड़ी यौन सामग्री के मामले में भी कानून सख्त हैं. IT एक्ट की धारा 67B ऐसी सामग्री को बनाने, सर्च करने, डाउनलोड करने, शेयर करने और प्रसारित करने जैसी गतिविधियों को अपराध के दायरे में लाती है लेकिन इन कार्रवाइयों से ये नतीजा नहीं निकालना चाहिए कि भारत में पोर्नोग्राफी से जुड़ी हर तरह की हिंसक सामग्री पर अपने आप पूरी तरह रोक लग चुकी है. अलग-अलग कंटेंट पर कौन-सा कानून लागू होगा, ये उसके नेचर और मामले के फैक्ट्स पर निर्भर करता है.

तो क्या भारत में भी ऐसा कानून आना चाहिए? 

इसे लेकर कुछ सवाल हैं, जिन पर चर्चा जरूरी है. मसलन, क्या सेक्स के दौरान चोक‍िंग जैसे सीन को बार-बार दिखाने से हिंसा को सामान्य समझने का खतरा बढ़ता है? क्या पोर्नोग्राफी की वेबसाइटों और ऐप्स की जिम्मेदारी तय होनी चाहिए? और अगर सरकार ऐसे कंटेंट पर रोक लगाने का फैसला करती है, तो उसकी पहचान और निगरानी कैसे होगी?

इसके साथ एक और सवाल है. कानून बनाना एक बात है, उसे लागू करना दूसरी. इंटरनेट पर कंटेंट अलग-अलग देशों के सर्वर पर मौजूद हो सकता है. उसे हटाना, उसकी पहुंच रोकना और नियमों का पालन करवाना आसान नहीं होता. ऐसे में प्लेटफॉर्म की जवाबदेही और कानून लागू करने के तरीके भी अहम होंगे.

ब्रिटेन ने 6 नवंबर 2026 की तारीख तय कर दी है. भारत में अश्लील और यौन कंटेंट से जुड़े कानून पहले से मौजूद हैं, लेकिन चोक‍िंग वाले सीन और करीबी र‍िश्तेदारों के बीच सेक्स सीन द‍िखाने वाले कंटेंट पर ब्रिटेन जैसा प्रतिबंध कब लगेगा, ये अभी साफ नहीं है.

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