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पाकिस्तान ने सरहद पर जो SH-15 तोपों की तैनाती की है, उनसे निपटने के लिए कितना तैयार है भारत?

Pakistan's SH-15 Howitzers: चीन की SH-15 155mm सेल्फ प्रोपेल्ड होवित्जर पाकिस्तान की आर्टिलरी क्षमता को मजबूत कर रही है. इस स्पेशल रिपोर्ट में हम इस मेड इन चाइना तोप की रेंज, गोले की ताकत, खूबियां औप कमियां तो जानेंगे ही, साथ ही भारत की K9 Vajra-T, ATAGS, M777 जैसी तोपों से उसकी तुलना भी करेंगे.

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SH-15 की तैनाती से पाकिस्तान ने बढ़ाई लंबी दूरी की मारक क्षमता (फोटो-CCTV

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  • पाकिस्तान ने चीन की SH-15 155mm ट्रक माउंटेड सेल्फ प्रोपेल्ड होवित्जर को अपने सैन्य बलों में शामिल किया है, जिसकी डिलीवरी 2022 के आस-पास शुरू हुई और यह आधुनिक आर्टिलरी सिस्टम है।
  • पाकिस्तान ने 2019 में चीन के साथ SH-15 होवित्जर की खरीद का समझौता किया था ताकि अपनी आर्टिलरी संतुलन को दक्षिण एशिया में मजबूती मिले, खासकर भारत के साथ बढ़ते सैन्य प्रतिस्पर्धा के बीच।
  • भारत ने अपने सैन्य आर्टिलरी उपकरणों को आधुनिक बनाने के लिए स्वदेशी प्रोजेक्ट्स और विभिन्न विदेशी हथियार प्रणालियां शामिल की हैं, जिससे उसे लंबी दूरी और सटीक फायरिंग में सुधार मिल रहा है।

पाकिस्तान की सेना में चीन की बनी SH-15 155mm ट्रक माउंटेड सेल्फ प्रोपेल्ड होवित्जर की मौजूदगी ने दक्षिण एशिया में आर्टिलरी संतुलन को लेकर नई चर्चा शुरू कर दी है. रिपोर्ट्स के मुताबिक पाकिस्तान ने पिछले कुछ वर्षों में चीन से इन तोपों की खरीद की है और इन्हें अपने महत्वपूर्ण सैन्य क्षेत्रों में शामिल किया है. हालांकि इनकी वास्तविक तैनाती संख्या और लोकेशन को लेकर पाकिस्तान सेना ने आधिकारिक जानकारी सार्वजनिक नहीं की है.

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SH-15 चीन की NORINCO कंपनी की बनाई हुई आधुनिक आर्टिलरी प्रणाली है. ये चीन की PCL-181 155mm/52 कैलिबर व्हील्ड सेल्फ प्रोपेल्ड होवित्जर का एक्सपोर्ट वर्जन है. पाकिस्तान ने 2019 में चीन के साथ इस सिस्टम की खरीद को लेकर समझौता किया था. मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार पाकिस्तान को लगभग 236 सिस्टम मिलने थे और डिलीवरी 2022 के आसपास शुरू हुई.

SH-15 तोप की सबसे बड़ी ताकत क्या है?

अंतरराष्ट्रीय डिफेंस पोर्टल JANES के मुताबिक SH-15 की सबसे बड़ी खासियत इसकी गतिशीलता है. पारंपरिक भारी तोपों के मुकाबले ये सिस्टम ट्रक चेसिस पर आधारित है, जिसकी वजह से इसे एक जगह से दूसरी जगह तेजी से ले जाया जा सकता है.

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ये 6x6 व्हील वाले ट्रक प्लेटफॉर्म पर लगी है. इसका मतलब है कि इसे तैनात करने के लिए बड़े टैंक ट्रांसपोर्टर या भारी लॉजिस्टिक सपोर्ट की जरूरत कम पड़ती है.

युद्ध के दौरान इसकी सबसे महत्वपूर्ण क्षमता "शूट एंड स्कूट" है. यानी ये तेजी से फायर कर सकती है और जवाबी हमला आने से पहले अपनी जगह बदल सकती है. दुश्मन की काउंटर बैटरी फायरिंग से बचने के लिए ये क्षमता काफी अहम मानी जाती है.

कितनी दूर तक मार कर सकती है SH-15?

SH-15 में 155 mm की 52 कैलिबर बैरल लगी है. ये NATO स्टैंडर्ड 155mm गोले इस्तेमाल कर सकती है. सामान्य हाई एक्सप्लोसिव गोले के साथ इसकी मारक क्षमता करीब 30 किलोमीटर तक बताई जाती है. Extended Range Full Bore Base Bleed जैसे आधुनिक गोले इस्तेमाल करने पर इसकी रेंज 40 किलोमीटर से ज्यादा तक पहुंच सकती है.

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IDRW की रिपोर्ट्स के मुताबिक इससे भी ज्यादा दूरी के लिए रॉकेट असिस्टेड प्रोजेक्टाइल इस्तेमाल करने की क्षमता का जिक्र किया गया है. हालांकि अलग-अलग गोला-बारूद के आधार पर इसकी वास्तविक रेंज बदल सकती है.

भारतीय सेना के आर्टिलरी डिवीजन में सेवा दे चुके रिटार्यड कर्नल दीपेंद्र गजारिया कहते हैं,

155 mm गोला अपने आकार और विस्फोटक क्षमता के कारण बड़े क्षेत्र में नुकसान पहुंचाने में सक्षम होता है. इसका इस्तेमाल दुश्मन के सैनिक ठिकानों, कमांड पोस्ट, हथियार डिपो और लॉजिस्टिक नेटवर्क को निशाना बनाने के लिए किया जाता है.

SH-15 में कौन-कौन सी आधुनिक खूबियां हैं?

SH-15 में डिजिटल फायर कंट्रोल सिस्टम लगाया गया है. इसकी मदद से लक्ष्य की जानकारी जल्दी हासिल कर फायरिंग की जा सकती है. इसमें ऑटोमेटेड लोडिंग सिस्टम की सुविधा है, जिससे फायरिंग की गति बेहतर होती है. रिपोर्ट्स के मुताबिक ये एक मिनट में कई राउंड फायर कर सकती है.

इसके अलावा इसमें GPS आधारित नेविगेशन, आधुनिक संचार प्रणाली और अलग-अलग तरह के 155mm गोला-बारूद इस्तेमाल करने की क्षमता है.

लेकिन SH-15 की कुछ सीमाएं भी हैं

SH-15 पूरी तरह अजेय हथियार नहीं है. इसकी सबसे बड़ी सीमा इसकी सुरक्षा है. ये टैंक की तरह भारी कवच से लैस नहीं है. ट्रैक्ड सेल्फ प्रोपेल्ड होवित्जर जैसे K9 Vajra-T की तुलना में व्हील्ड सिस्टम की ऑफ-रोड क्षमता कुछ परिस्थितियों में सीमित हो सकती है.

भारतीय सेना के आर्टिलरी डिवीजन में सेवा दे चुके रिटार्यड कर्नल दीपेंद्र गजारिया कहते हैं,

मॉर्डन वॉर फेयर में केवल लंबी दूरी की तोप होना काफी नहीं है. सटीक लक्ष्य पहचान, ड्रोन निगरानी, सैटेलाइट डेटा, काउंटर बैटरी रडार और नेटवर्क आधारित कमांड सिस्टम भी उतने ही महत्वपूर्ण हैं.

भारत के पास कौन-कौन सी आधुनिक होवित्जर हैं?

भारत ने पिछले कुछ वर्षों में अपनी आर्टिलरी क्षमता को तेजी से आधुनिक बनाने की कोशिश की है. भारतीय सेना के पास दक्षिण कोरिया की तकनीक पर आधारित K9 Vajra-T 155mm/52 कैलिबर सेल्फ प्रोपेल्ड होवित्जर है. इसे खास तौर पर रेगिस्तान और मैदानी इलाकों में इस्तेमाल के लिए शामिल किया गया है.

इसके अलावा भारत के पास अमेरिका से खरीदी गई M777 Ultra Light Howitzer है, जिसे ऊंचाई वाले इलाकों जैसे लद्दाख और हिमालयी क्षेत्रों में तैनात किया गया है.

स्वदेशी Dhanush 155mm/45 कैलिबर होवित्जर भी भारतीय सेना में शामिल है. वहीं Advanced Towed Artillery Gun System यानी ATAGS भारत का बड़ा स्वदेशी प्रोजेक्ट है, जिसे लंबी दूरी और बेहतर फायरिंग क्षमता के लिए विकसित किया गया है.

भारत ने Pinaka मल्टी बैरल रॉकेट सिस्टम और लंबी दूरी के प्रिसिजन स्ट्राइक सिस्टम पर भी निवेश बढ़ाया है.

भारत और पाकिस्तान की आर्टिलरी ताकत में कितना अंतर है?

पाकिस्तान की आर्टिलरी फोर्स लंबे समय से बड़ी संख्या में तोपों पर आधारित रही है. उसके पास अमेरिकी M109 सेल्फ प्रोपेल्ड होवित्जर, चीनी SH-15 और अन्य टोड आर्टिलरी सिस्टम मौजूद हैं.

भारत के पास संख्या के साथ-साथ विविधता का फायदा है. भारतीय सेना के पास पुराने सिस्टम के साथ K9 Vajra-T, M777, Dhanush और स्वदेशी सिस्टम का मिश्रण है.

हालांकि दोनों देशों की कुल आर्टिलरी संख्या के सटीक आंकड़े सार्वजनिक नहीं हैं. अलग-अलग रक्षा संस्थानों के अनुमान अलग-अलग हैं. आधुनिक युद्ध में केवल तोपों की संख्या नहीं बल्कि उनकी रेंज, सटीकता, सर्विलांस सिस्टम और नेटवर्क क्षमता ज्यादा महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है.

IND vs PAK
भारत और पाकिस्तान के तोपखाने की तुलना (ग्राफिक्स-AI)

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चीन-पाकिस्तान रक्षा साझेदारी का नया चैप्टर

SH-15 सिर्फ एक तोप नहीं बल्कि चीन और पाकिस्तान के बढ़ते रक्षा सहयोग का हिस्सा है. पाकिस्तान ने चीन से JF-17 लड़ाकू विमान, J-10CE फाइटर जेट, नौसेना के युद्धपोत और अन्य हथियार प्रणालियां भी हासिल की हैं. चीन के लिए पाकिस्तान एक महत्वपूर्ण रणनीतिक साझेदार है, जबकि पाकिस्तान के लिए चीन आधुनिक हथियारों का बड़ा स्रोत बन चुका है. 

भारत के लिए SH-15 की चुनौती किसी एक हथियार तक सीमित नहीं है. असली चुनौती ये है कि चीन और पाकिस्तान दोनों अपनी सैन्य क्षमताओं को लगातार आधुनिक बना रहे हैं.

इसी वजह से भारत की रणनीति भी अब केवल हथियार खरीदने तक सीमित नहीं है बल्कि स्वदेशी रक्षा उत्पादन, नेटवर्क आधारित युद्ध क्षमता और तेज तैनाती पर केंद्रित है.

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