13 साल, 12 सरकारी परीक्षा. सब में सफलता. किसी भी अभ्यर्थी के लिए ऐसा ट्रैक रिकॉर्ड रखने वाला शख्स रोल मॉडल हो सकता है. लेकिन यह ट्रैक रिकॉर्ड बहुत बड़ा छलावा निकला. ऐसा रिकॉर्ड बनाने वाला शख्स झारखंड लोक सेवा आयोग (JPSC) परीक्षा में पेपर लीक कराने का मास्टरमाइंड निकला.
13 साल में 12 परीक्षा पास, जानें कौन है JPSC पेपर लीक का मास्टरमाइंड अभय कुमार तिवारी
JPSC परीक्षा पेपर लीक की जांच CID के जिम्मे है. CID ने इस मामले में जिन लोगों को गिरफ्तार किया है, उसमें अभय तिवारी भी शामिल है. उसे कथित तौर पर पेपर लीक का मास्टरमाइंड बताया जा रहा है. अभय के नाम प्रतियोगी परीक्षाओं की सफलता का ऐसा रिकॉर्ड है, जिसकी बराबरी देश भर में कुछ ही लोग कर पाएंगे. उसने 13 साल में 12 प्रतियोगी परीक्षाओं में सफलता हासिल की है.

मास्टरमाइंड के नाम दुर्लभ रिकॉर्ड
JPSC परीक्षा पेपर लीक की जांच CID के जिम्मे है. CID ने इस मामले में जिन लोगों को गिरफ्तार किया है, उसमें अभय कुमार तिवारी भी शामिल है. उसे कथित तौर पर पेपर लीक का मास्टरमाइंड बताया जा रहा है. अभय के नाम प्रतियोगी परीक्षाओं की सफलता का ऐसा रिकॉर्ड है, जिसकी बराबरी देश भर में कुछ ही लोग कर पाएंगे. उसने 13 साल में 12 प्रतियोगी परीक्षाओं में सफलता हासिल की है.
13 साल में पास की ये 12 सरकारी परीक्षाएं
साल 2018 : पुलिस सब-इंस्पेक्टर (लिखित परीक्षा)
साल 2013 : साल 2013 में नेवी में सीनियर सेकेंडरी रिक्रूट (SSR) लिखित परीक्षा
साल 2014 : भाभा न्यक्लियर रिसर्च सेंटर में सहायक की लिखित परीक्षा
IRB कांस्टेबल लिखित परीक्षा
साल 2018 : CRPF हेड कॉन्स्टेबल (लिखित और टाइपिंग)
साल 2014 : नॉदर्न कोल फील्ड्स लिमिटेड (NCL) की PT परीक्षा
JSSC : PGT टीचर परीक्षा
JSSC : CGL परीक्षा
JPSC : सहायक वन रक्षक (ACF) परीक्षा
JPSC : वन क्षेत्र पदाधिकारी (FRO) परीक्षा
JPSC : खाद्य सुरक्षा अधिकारी (FSO) परीक्षा
JPSC : 11वीं झारखंड संयुक्त असैनिक सेवा (Combined Civil Services)
ब्लॉक सप्लाई ऑफिसर के पोस्ट पर थी तैनाती
अभय कुमार तिवारी फिलहाल गोड्डा जिले के पोड़ैयाहाट ब्लॉक में ब्लॉक सप्लाई ऑफिसर (BSO) के पद पर तैनात था. उस पर एक सिंडिकेट चलाने का आरोप है, जो JPSC और JSSC द्वारा कराई जाने वाली प्रतियोगी परीक्षाओं में पेपर लीक कराने और नौकरी की सेटिंग कराने का काम करती थी.
ब्लॉक सप्लाई ऑफिसर बनने से पहले तिवारी TRS-Data Processing Private Limited (TDPL) नाम की एजेंसी का मार्केटिंग मैनेजर रह चुका था. यह लखनऊ बेस्ड टेस्टिंग एजेंसी है, परीक्षाओं में गड़बड़ी करने के आरोप में इसे उत्तर प्रदेश में ब्लैकलिस्ट किया जा चुका है.
अपने ट्रैक रिकॉर्ड से छात्रों को फांसता था
अभय तिवारी अभ्यर्थियों को अपने जाल में फंसाने के लिए अपनी सफलता का ढिंढोरा पीटता था. वह अभ्यर्थियों के सामने अपनी 12 सरकारी नौकरियां क्रैक करने का रिकॉर्ड दिखाता था, ताकि छात्रों को उस पर भरोसा हो जाए.
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40 लाख तक का रेट
छात्रों को भरोसे में लेने के बाद अभय तिवारी उनको गारंटीड सिलेक्शन का वादा करता था. फिर जाल में फंसने के बाद उनसे एक-एक सीट के लिए 25 लाख से 40 लाख रुपये तक वसूलता था.
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