इन्फ्लुएंसर बनने का लालच देकर कथित तौर पर कुछ लड़कियों को प्रॉस्टिट्यूशन की तरफ धकेला जा रहा है. सोशल मीडिया पर ऐसे गैंग एक्टिव हैं, जो फेमस होने की चाह रखने वाली लड़कियों से ऑनलाइन इमोशनल रिलेशनशिप बनाते हैं. दिखावा करते हैं कि उनकी फेमस होने में मदद करेंगे. फिर उनकी इंटीमेट तस्वीरें लेते हैं. ऐसे ही एक गैंग के कब्जे से 12 से 15 साल की लड़कियों को बचाया गया है.
इंस्टाग्राम का कॉमेंट सेक्शन लड़कियों को प्रॉस्टिट्यूशन में धकेलने का जरिया कैसे बन गया?
Instagram influencer dream trafficking: NGO की फाउंडर सुनीता कृष्णन का कहना है कि सोशल मीडिया, खासकर इंस्टाग्राम का इस्तेमाल नाबालिग लड़कियों को फंसाने के लिए किया जा रहा है. ऑनलाइन तुरंत फेमस होने का बढ़ता जुनून, मानव तस्करों के लिए कमजोर बच्चों को निशाना बनाने का एक जरिया बन गया है.

मानव तस्करी के खिलाफ काम करने वाली NGO प्रज्वला ने इसकी जानकारी दी है. डेक्कन क्रॉनिकल से बात करते हुए एनजीओ ने बताया कि उन्होंने 12 से 15 साल की लड़कियों को बचाया है, जो मानव तस्करी के एक संगठित नेटवर्क का शिकार हो गई थीं. उन्हें वेश्यावृत्ति के धंधे में धकेलने के लिए फंसाया जा रहा था.
NGO की फाउंडर सुनीता कृष्णन का कहना है कि सोशल मीडिया, खासकर इंस्टाग्राम का इस्तेमाल नाबालिग लड़कियों को फंसाने के लिए किया जा रहा है. ऑनलाइन तुरंत फेमस होने का बढ़ता जुनून, मानव तस्करों के लिए कमजोर बच्चों को निशाना बनाने का एक जरिया बन गया है.
अखबार ने अपनी रिपोर्ट में बताया कि पीड़िताओं में एक 12 साल की लड़की भी शामिल है. वह इन्फ्लुएंसर बनना चाहती थी. उसके इंस्टाग्राम पर 1000 से ज्यादा रील्स पोस्टेड थीं. एक व्यक्ति उसकी हर रील पर कॉमेंट करता था. फॉलोअर्स और व्यूज बढ़ाने का ऑफर देता था. कॉमेंट से बातचीत प्राइवेट मैसेज और कॉल तक पहुंची. लड़की उसके बताए तरीके से कॉन्टेंट बनाने लगी.
सुनीता कृष्णन ने बताया कि आरोपी ने उसे भावनात्मक रूप से बहकाना शुरू कर दिया. इसकी वजह से लड़की का ऑनलाइन शोषण होने लगा. सेक्सटॉर्शन का इस्तेमाल करके घर से भागने पर मजबूर किया गया. सुनीता बताया,
“ये लोग पहले वर्चुअल दुनिया में भरोसा बनाते हैं. जब लड़कियां भावनात्मक रूप से उन पर निर्भर हो जाती हैं, तो उन्हें 'सेक्सटॉर्शन' (यौन शोषण के लिए ब्लैकमेल) का शिकार बनाया जाता है. घर से भागने के लिए बहलाया-फुसलाया जाता है.”
एक्टिविस्ट ने आगे कहा,
“एक लड़की को शरीर के अंग दिखाते हुए रील्स पोस्ट करने के लिए कहा गया. ताकि व्यूज और फॉलोअर्स बढ़ें. लड़की ने ऐसा ही किया और उसकी एंगेजमेंट बढ़ी भी. इससे पीड़िता को लगा कि वह व्यक्ति उसकी मदद कर रहा है. मगर असल में वह लड़की का शोषण करने के लिए उसे फंसा रहा था.”
सुनीता कृष्णन ने पाया कि कई पीड़ित लड़कियां गरीब और भावनात्मक रूप से परेशान घरों से आती हैं. या जहां माता-पिता अपने बच्चों की ऑनलाइन गतिविधियों पर नजर नहीं रख पाते. इनमें से ज्यादातर लड़कियां बस इन्फ्लुएंसर बनना चाहती थीं.
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महिला सुरक्षा विंग की DCP लावण्या नाइक ने कहा कि किशोर-किशोरियां खास तौर पर खतरे में होते हैं. उन्होंने कहा,
"हमारे पास गेमिंग ऐप्स के जरिए लड़कियों को फंसाने के मामले आए हैं. हमने देखा है कि कुछ लड़कियां उस लड़के से मिलने के लिए दूसरे राज्यों तक भी चली जाती हैं."
कृष्णन ने पुलिस से कहा कि वे नाबालिग के गायब होने या घर से भागने के हर मामले को संभावित तस्करी का मामला मानकर जांच शुरू करें.
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