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NCERT की सोशल साइंस की किताब हुई 'क्लीन चिट', न्यायपालिका में भ्रष्टाचार वाला कॉन्टेंट पूरी तरह हटा

NCERT ने सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के बाद अब क्लास 8 की सोशल साइंस की एडिटेड किताब जारी की है. NCERT ने नई किताब से 'ज्यूडिशियरी में करप्शन', 'ज्यूडिशियल बैकलॉग' और 'सुप्रीम कोर्ट के कुछ ऐतिहासिक फैसलों पर चर्चा' जैसे सेक्शन हटा दिए गए हैं. इनकी जगह 'सुप्रीम कोर्ट की भूमिका', 'जनहित याचिका (PIL)', 'ट्रिब्यूनल' और 'वैकल्पिक विवाद समाधान' जैसे नए विषयों को जगह दी गई है.

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सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर NCERT ने क्लास 8 की सोशल साइंस की एडिटेड किताब जारी की है. (इंडिया टुडे)

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  • नेशनल काउंसिल ऑफ एजुकेशनल रिसर्च एंड ट्रेनिंग (NCERT) ने क्लास 8 की सोशल साइंस की किताब का एडिटेड वर्जन जारी किया है जिसमें ज्यूडिशियरी से जुड़े विवादित चैप्टर को संशोधित किया गया है।
  • पहले की किताब में न्यायपालिका से जुड़े भ्रष्टाचार, ज्यूडिशियल बैकलॉग और सुप्रीम कोर्ट के विवादित फैसलों पर चर्चा थी, जिसे विवादों के चलते सुप्रीम कोर्ट ने रोक लगा दी थी।
  • नई एडिटेड किताब में विवादित हिस्सों को हटाकर सुप्रीम कोर्ट की भूमिका, जनहित याचिका, ट्रिब्यूनल और वैकल्पिक विवाद समाधान जैसे नए विषय शामिल किए गए हैं।

नेशनल काउंसिल ऑफ एजुकेशनल रिसर्च एंड ट्रेनिंग (NCERT) ने क्लास 8 की सोशल साइंस की किताब का एडिटेड वर्जन जारी किया है. ये वही किताब है जिसे कुछ महीने पहले ज्यूडिशियरी से जुड़े विवादित कॉन्टेंट के चलते वापस लेना पड़ा था. अब नए एडिशन में ज्यूडिशियरी से जुड़े चैप्टर को फिर से तैयार किया गया है. इसमें पुराने विवादित हिस्सों को हटा दिया गया है.

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ज्यूडिशियरी से जुड़े विवादित चैप्टर हटाए

हिंदुस्तान टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक, एडिटेड चैप्टर से 'न्यायपालिका में भ्रष्टाचार', 'ज्यूडिशियल बैकलॉग' और 'सुप्रीम कोर्ट के कुछ ऐतिहासिक फैसलों पर चर्चा' जैसे सेक्शन हटा दिए गए हैं. इनकी जगह 'सुप्रीम कोर्ट की भूमिका', 'जनहित याचिका (PIL)', 'ट्रिब्यूनल' और 'वैकल्पिक विवाद समाधान' जैसे नए विषयों को जगह दी गई है.

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करप्शन और बैकलॉग वाला हिस्सा हटाया गया

NCERT ने नई किताब से ज्यूडिशियरी में करप्शन से जुड़ा पूरा सेक्शन हटा दिया है. पहले की किताब में तत्कालीन चीफ जस्टिस बीआर गवई के बयान का रेफरेंस देते हुए ज्यूडिशियरी में करप्शन की घटनाओं को जिक्र किया गया था. यह हिस्सा अब पूरी तरह से गायब है. इसी तरह अदालतों में लंबित मामलों (Backlog of Cases), जजों की कमी, कानूनी प्रक्रिया की जटिलता और न्यायिक ढांचे की कमजोरियों पर आधारित चर्चा भी नई किताब से हटा दिया गया है.

सुप्रीम कोर्ट के बड़े फैसलों का जिक्र हटाया

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पुराने एडिशन में छात्रों को समझाने के लिए सुप्रीम कोर्ट के दो बड़े फैसलों का उदाहरण दिया गया था. श्रेया सिंघल बनाम यूनियन ऑफ इंडिया केस, जिसमें आईटी एक्ट की धारा 66A को रद्द किया गया था. और एसोसिएशन फॉर डेमोक्रेटिक रिफॉर्म्स (ADR) बनाम यूनियन ऑफ इंडिया मामला, जिसमें चुनावी बॉन्ड को असंवैधानिक घोषित किया गया था. अब नई किताब में इन दोनों मामलों को हटा दिया गया है.

स्वतंत्र न्यायपालिका पर पुरानी चर्चा भी हटाई गई

पहले की किताब में बताया गया था कि स्वतंत्र न्यायपालिका नागरिकों के मौलिक अधिकारों की सुरक्षा की गारंटी है और संविधान जजों को कार्यपालिका और विधायिका के हस्तक्षेप से बचाता है. लेकिन नई किताब में यह पूरा हिस्सा भी हटा दिया गया है.

इसके अलावा चैप्टर की शुरुआत में दिए जाने वाले 'बिग क्वेशचन' में भी बदलाव हुआ है. पहले छात्रों से पूछा जाता था कि स्वतंत्र न्यायपालिका क्यों जरूरी है, जबकि अब उनसे यह सवाल पूछा गया है कि न्याय एक न्यायपूर्ण और सौहार्दपूर्ण समाज के लिए क्यों जरूरी है.

सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के बाद दोबारा से बनी किताब

इस साल फरवरी में क्लास 8 की सोशल साइंस(भाग-2) की किताब जारी हुई थी. इसमें न्यायपालिका पर लिखे कुछ टॉपिक को लेकर विवाद खड़ा हो गया. सुप्रीम कोर्ट ने स्वत: संज्ञान लेते हुए मामले की सुनवाई शुरू की. सुनवाई के दौरान NCERT ने कोर्ट से माफी मांगी और स्वीकार किया कि किताब में कुछ गलत कॉन्टेंट शामिल हो गया था. इसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने किताब के प्रिंट और डिजिटल दोनों एडिशन के डिस्ट्रीब्यूशन पर रोक लगा दी थी. साथ ही न्यायपालिका से जुड़े चैप्टर को दोबारा लिखने का निर्देश दिया था. अब उसी आदेश के बाद एडिटेड किताब पब्लिश की गई है. 

वीडियो: NCERT की नई किताब में न्यायपालिका पर ऐसा क्या लिखा कि भड़के CJI सूर्यकांत?

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