दिल्ली की बीजेपी (BJP) सरकार को हाई कोर्ट से झटका लगा है. दिल्ली हाई कोर्ट ने 2020 नॉर्थ-ईस्ट दिल्ली दंगा पीड़ितों को मुआवजा देने के अपने आदेश को वापस लेने से साफ इनकार कर दिया है. सोमवार, 6 जुलाई को हाई कोर्ट की डिवीजन बेंच ने दंगा पीड़ितों को 21 करोड़ रुपये मुआवजा देने का 27 जनवरी 2026 का आदेश बरकरार रखा. तब आदमी आदमी पार्टी (AAP) की सरकार ने इस पर ऐतराज नहीं जताया था, लेकिन मौजूदा BJP सरकार ने इसे कोर्ट में चुनौती दी.
HC से BJP सरकार को झटका, 2020 दिल्ली दंगा पीड़ितों को मुआवजे में देने होंगे 21 करोड़
Delhi High Court से मौजूदा दिल्ली सरकार को बड़ा झटका लगा है. कोर्ट ने साल 2020 में हुए दिल्ली दंगा पीड़ितों को मुआवजे में 21 करोड़ रुपये देने के अपने पुराने आदेश को पलटने से इनकार कर दिया है.


इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, 6 जुलाई को दिल्ली हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस डीके उपाध्याय और जस्टिस तेजस कारिया की डिवीजन बेंच ने आदेश वापस लेने से इनकार कर दिया है. जस्टिस तेजस कारिया की डिवीजन बेंच ने कहा कि फिलहाल उसके पहले दिए गए आदेश में दखल देने की जरूरत नहीं है. कोर्ट ने दिल्ली सरकार को जनवरी 2025 के आदेश को चुनौती देने के लिए अलग से अर्जी दाखिल करने की छूट दी है.
21 करोड़ की सिफारिशदिल्ली दंगा पीड़ितों के नुकसान की भरपाई के लिए 'नॉर्थ ईस्ट दिल्ली रॉयट्स क्लेम्स कमीशन (NEDRCC)' बनाया गया था. NEDRCC ने दंगा पीड़ितों को करीब 21.71 करोड़ रुपये देने की सिफारिश की थी. 2020 में ही AAP सरकार ने यह सिफारिश स्वीकार कर ली. सरकार ने मुआवजा लेने का फॉर्म भी जारी कर दिया था.
दिल्ली सरकार ने हाई कोर्ट में दलील दी कि सुप्रीम कोर्ट के 2009 के एक फैसले के मुताबिक दंगों या हिंसा से हुए नुकसान की भरपाई सरकार नहीं, बल्कि हिंसा करने वाले और उसके जिम्मेदार लोगों से कराई जानी चाहिए. इस पर कोर्ट ने सरकार से ही पूछ लिया,
"सुप्रीम कोर्ट के पहले के फैसलों के मुताबिक, आपको नुकसान पहुंचाने वालों से रकम वसूलनी है. क्या आपने उनसे पैसा वसूला है? पीड़ित खुद जाकर तो उनसे पैसा नहीं मांग सकते, है ना?... आपको ऐसे लोगों से हुए नुकसान की भरपाई के लिए कोई तरीका बनाना होगा, क्या ऐसा कोई तरीका मौजूद है?"
सरकार की तरफ से पेश वकील समीर वशिष्ठ ने जवाब दिया कि दंगों के आरोपियों के खिलाफ मुकदमे अभी चल रहे हैं. जब अदालत ने पूछा कि क्या दोषियों से पैसा वसूलने का कोई सिस्टम बनाया गया है, तो सरकार के वकील ने कहा, "अभी तक नहीं."

15 जनवरी 2025 को हाईकोर्ट की सिंगल बेंच ने पीड़ितों की मांग पर दिल्ली सरकार को मुआवजे की रकम जारी करने का आदेश दिया था. उस समय AAP सरकार थी. उसने कोर्ट के आदेश पर कोई आपत्ति नहीं जताई. लेकिन फरवरी 2025 में BJP सत्ता में आ गई.
दिल्ली सरकार ने वकील पर तोहमत लगाईनई सरकार ने कहा कि सुनवाई के दौरान उसके स्थाई वकील की जगह पेश हुए प्रॉक्सी वकील ने 'स्थाई वकील या संबंधित विभाग के अधिकारियों से किसी भी निर्देश या अधिकार के बिना' अनजाने में सरकार का 'नो ऑब्जेक्शन' दे दिया था.'
इसके बाद सितंबर 2025 में सरकार ने जनवरी 2025 के आदेश को वापस लेने की मांग करते हुए हाई कोर्ट में अर्जी दाखिल की. हालांकि, 7 मई 2026 को सिंगल बेंच ने यह अर्जी खारिज कर दी. अदालत ने कहा कि सरकार का 'गलती से ऐसा हो गया' वाला तर्क भरोसेमंद नहीं है. कोर्ट ने यह भी कहा कि अर्जी दाखिल करने में हुई देरी भी बताती है कि सरकार की दलील में दम नहीं है.

इसके बाद सरकार ने 29 मई 2026 को इस फैसले को चुनौती देते हुए डिवीजन बेंच का रुख किया. दूसरी ओर, दंगा पीड़ितों की ओर से पेश वकील चिरायु जैन ने कहा कि सरकार ने यह अर्जी सिर्फ कोर्ट की अवमानना की कार्रवाई से बचने के लिए लगाई है. उनका कहना था,
"मई 2025 में कानून विभाग ने राय दी थी कि अवमानना की कार्रवाई से बचने के लिए समीक्षा याचिका दायर की जाए. ऐसी याचिका पर गौर नहीं किया जाना चाहिए, जो सिर्फ अवमानना की कार्रवाई से बचने के लिए दाखिल की गई है, वह भी सिर्फ़ इसलिए कि फरवरी में सरकार बदल गई और इसके बाद पूरा रुख ही बदल गया."
सुनवाई के बाद डिवीजन बेंच ने सरकार की अपील का निपटारा करते हुए जनवरी 2025 और 7 मई 2026 के आदेशों में कोई बदलाव नहीं किया. सरकार को यह छूट जरूर दी गई कि वो जनवरी 2025 के मूल आदेश को चुनौती देने के लिए नई अर्जी दाखिल कर सकती है.
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फरवरी 2020 में नॉर्थ-ईस्ट दिल्ली में हुए सांप्रदायिक दंगों में 53 लोगों की मौत हुई थी, जिनमें ज्यादातर मुस्लिम थे. 700 से ज्यादा लोग घायल हुए थे. दंगा पीड़ितों ने कुल 153.69 करोड़ रुपये के मुआवजे का दावा किया है, लेकिन NEDRCC ने करीब 21.71 करोड़ रुपये देने की ही सिफारिश की थी.
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