'इंदिरा सरकार में बेरोजगारी, महंगाई... ', पहली बार कक्षा 9 की किताब में जोड़ा इमरजेंसी पर चैप्टर
NCERT ने पहली बार कक्षा 9 की सोशल साइंस किताब में Emergency को 'लोकतंत्र की बड़ी चुनौती' के रूप में शामिल किया है. इस बदलाव की टाइमिंग भी अहम मानी जा रही है, क्योंकि नेशनल इमरजेंसी के 50 साल 2026 में पूरे हो रहे हैं.

भारत में इमरजेंसी लागू हुए पांच दशक से ज्यादा का समय बीत चुका है. अब NCERT ने पहली बार कक्षा 9 की किताब में इस टॉपिक को शामिल किया है. इसे ‘भारत में लोकतंत्र के सामने बड़ी चुनौतियों में से एक’ के तौर पर पेश किया गया है. इससे पहले NCERT पर इतिहास के साथ छेड़छाड़ करने का आरोप लगा था, जब कक्षा 9 की किताब में एक नग्न नर्तकी की मूर्ति को कपड़ों के साथ छापा गया था. कांसे की यह मूर्ति मोहन जोदड़ो की खुदाई में मिली थी.
नई किताब में क्या बदलाव?नेशनल एजुकेशन पॉलिसी (NEP) 2020 के तहत स्कूली शिक्षा में बड़े स्तर पर बदलाव किया जा रहा है. इसी बदलाव के तहत NCERT ने पहली बार क्लास 9 की सोशल साइंस की किताब में 1975-77 की नेशनल इमरजेंसी के टॉपिक को शामिल किया है. किताब का नाम है- 'अंडरस्टैंडिंग सोसाइटी: इंडिया एंड बियॉन्ड' और चैप्टर 6 में यह टॉपिक शामिल किया गया है.

इंडिया टुडे की रिपोर्ट के मुताबिक, इमरजेंसी सेक्शन में लिखा है,
“भारत में लोकतंत्र के सामने आई बड़ी चुनौतियों में से एक चुनौती 1975-77 में इमरजेंसी लागू होने के समय देखी गई थी. 1970 के दशक की शुरुआत में इंदिरा गांधी के नेतृत्व वाली सरकार के प्रति लोगों में असंतोष बढ़ रहा था. बढ़ती बेरोज़गारी, महंगाई और कुशासन के आरोपों के कारण बड़े पैमाने पर विरोध-प्रदर्शन हुए.”
इसमें आगे लिखा गया कि जून 1975 में सरकार ने आंतरिक अशांति के आधार पर देश में आपातकाल लागू किया. इस दौरान ज्यादातर मौलिक अधिकारों को सस्पेंड कर दिया गया, प्रेस पर सेंसरशिप लगाई गई और कई राजनीतिक नेताओं और कार्यकर्ताओं को गिरफ्तार किया गया. लोकतांत्रिक संस्थाओं पर भारी दबाव पड़ा और नागरिकों की आजादी सीमित कर दी गई.
जयप्रकाश नारायण का जिक्रकिताब में इमरजेंसी के खिलाफ आंदोलन में जयप्रकाश नारायण की भूमिका पर भी रोशनी डाली गई है. किताब के एक हिस्से में लिखा है,
“पॉलिटिकल लीडर और सोशलिस्ट विचारक जयप्रकाश नारायण (जिन्हें लोक नायक के नाम से जाना जाता है) के नेतृत्व में हुए बड़े आंदोलनों ने स्टूडेंट्स और लोगों को इकट्ठा किया, खासकर बिहार और गुजरात में. 1977 में इमरजेंसी हटाई गई और आम चुनाव हुए. इससे लोगों को बैलेट के जरिए अपनी इच्छा जाहिर करने का मौका मिला. सत्ताधारी सरकार की हार ने भारतीय लोकतंत्र की ताकत दिखाई और लोकतंत्र के महत्व को दिखाया.”
अब तक इमरजेंसी के बारे में 12वीं कक्षा की पॉलिटिकल साइंस की किताब में ही पढ़ाया जाता था. लेकिन अब कक्षा 9 के छात्रों को अपनी पढ़ाई के शुरुआती दिनों में ही इमरजेंसी के बारे में बताया जाएगा, ताकि छात्रों में भारत के संवैधानिक मूल्यों, लोकतांत्रिक संस्थाओं और समकालीन इतिहास की बेहतर समझ बन सके.
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इमरजेंसी के 50 साल पूरेसिलेबस में इस बदलाव की टाइमिंग भी अहम हो जाती है, क्योंकि 25 जून, 1975 को लागू हुई नेशनल इमरजेंसी के 50 साल इसी साल यानी 2026 में पूरे हो रहे हैं. यह इमरजेंसी मार्च 1977 तक लागू रही. इस दौरान नागरिक अधिकारों पर रोक और प्रेस पर सेंसरशिप लगाई गई थी और चुनाव टाल दिए गए थे.
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